पाकिस्तान से विस्थापित 1,645 परिवारों एवं पूर्व सैनिकों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मैं इस समय एक चलन देख रहा हूँ, तमाम मौलवी और मौलाना इस समय एक बयान दे रहे हैं, कह रहे हैं गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करो। हमने कहा कि गौ हमारी माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है। क्या माँ और पुत्र के बीच में कुछ घोषित करने की आवश्यकता पड़ती है क्या? क्या किसी पुत्र को बताने की आवश्यकता पड़ती है कि तुम्हारी माँ है, इसका सम्मान करो?
उन्होंने कहा कि ये हमारे संस्कार हैं। हमने अपनी माँ के बारे में जो सम्मान का भाव रखते हैं और हमने गाय को माता माना है, तो गाय तो हमारे लिए माता है, वह पशु नहीं, पशु तुम्हारी बुद्धि है, जो तुम हमारी गौमाता को पशु बोलते हो। तुम्हारी सोच पशुवत है, जो तुम गौमाता को पशु बोल रहे हो, और तुम्हारा ये दोगलापन है, कि जो एक ओर गौकशी को प्रश्रय देते हो। मैं देख रहा था बकरीद में, उनके तमाम चेले-चपाटे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर बकरईद पर गौमाता का चित्र दिखा करके बकरीद की बधाई दे रहे थे,
मां के बारे में परिचय की आवश्यकता नहीं
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौमाता तो स्वघोषित राष्ट्रमाता है, उसको किसी को राष्ट्रमाता घोषित करने की आवश्यकता नहीं। वैसे ही जैसे हमारी माता के बारे में किसी को परिचय देने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जैसे गंगा माता के बारे में किसी को परिचय देने की आवश्यकता नहीं। हम सब गंगा माता की आरती करते हैं, गंगा पूजा करते हैं, अपने साथ गंगा पुत्र जोड़ करके अपने को सम्मानित महसूस करते हैं। हमारे तीर्थ माँ गंगा के तट पर हैं, हमारे सारे संस्कार माँ गंगा के तट पर संपन्न होते हैं, क्या कोई हमें बताएगा कि गंगा हमारी माता है? ये स्वतः स्फूर्त घोषित है, किसी आक्रांता को ये बताने की आवश्यकता नहीं,ये हमारे संस्कार हैं, हमने गौ को माता माना है, हमने गंगा को माता माना है।
दोहरा चरित्र यही होता है
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से उस मजहबी निर्ममता के शिकार इन पाकिस्तानी विस्थापितों के बारे में या देश भर में फैले हुए उन विस्थापितों के बारे में इन मौलाना और मौलवियों की कभी आवाज़ नहीं निकली, कभी नहीं निकली। कितना अच्छा होता ये बोलते कि इनकी संपत्ति को वहां पर उन कट्टरपंथियों ने कब्जा किया है, या वक्फ के नाम पर जिन्होंने यहां के हिंदुओं की जमीन को कब्जा किया है, इन विस्थापितों को हम दे रहे हैं, फ्री में देने की घोषणा करते तो हम मानते कि हां ये कुछ इनकी कुछ संवेदना है, लेकिन नहीं।दोहरा चरित्र जो होता है ना, यही होता है। मुंह में कुछ और पीछे कुछ।















