भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग एक बार फिर सुर्खियों में है। रूस की फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री-टेक्निकल कॉपरेशन (FSMTC) ने पुष्टि की है कि भारत के साथ Su-57 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान के उत्पादन को लेकर बातचीत चल रही है। यह बातचीत दोनों देशों के पुराने और मजबूत रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Su-57 उत्पादन प्रस्ताव और भारत-रूस रक्षा सहयोग
FSMTC के अनुसार, रूस भारत में Su-57E विमान के उत्पादन की सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दे रहा है। इस पर अभी दोनों देशों के बीच चर्चा जारी है। रूस ने यह भी बताया कि भारत पहले से ही कई रूसी रक्षा उपकरणों का लाइसेंस उत्पादन कर रहा है, जैसे Su-30MKI विमान, T-90S टैंक, AK-203 राइफलें और AK-630 तोपें। Su-57 एक आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट है, जो कम रडार पहचान, तेज गति और आधुनिक हथियार प्रणाली के लिए जाना जाता है। रूस का दावा है कि यह विमान चीन और अमेरिका के बाहर विकसित एकमात्र पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसे 2020 में रूसी वायुसेना में शामिल किया गया था। रूस के अनुसार, इस विमान का उपयोग यूक्रेन युद्ध में भी किया गया है, जहां इसने सटीक हमलों और हवाई लड़ाई में भूमिका निभाई। इसे खास तौर पर SEAD और DEAD मिशनों के लिए तैयार किया गया है, जिनका उद्देश्य दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को दबाना और नष्ट करना होता है।
हाल ही में Su-57 के नए संस्करण Su-57D की भी चर्चा हुई है, जिसमें दो पायलट की व्यवस्था बताई जा रही है। इसमें एक पायलट विमान उड़ाने और दूसरा ड्रोन और अन्य सिस्टम को नियंत्रित करने का काम करेगा। भारत की कंपनी HAL के अनुसार, इस परियोजना के लिए मौजूदा उत्पादन क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए नए निवेश की जरूरत होगी। अभी लागत और तकनीकी विवरण पर बातचीत जारी है। रक्षा मंत्रालय ने भी संकेत दिया है कि Su-57 के लाइसेंस उत्पादन पर बातचीत अब उन्नत चरण में पहुंच चुकी है। इसके साथ ही रूस ने ‘सोर्स कोड’ तक पहुंच देने का प्रस्ताव भी रखा है, जो किसी भी देश के लिए तकनीकी नियंत्रण के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।












