अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की चल रही राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में आज देश-दुनिया के कई ज्वलंत मुद्दों पर गहन चिंतन-मंथन किया गया। बैठक में मुख्य रूप से शिक्षा प्रणाली, वैश्विक परिदृश्य, भारतीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र (Indian Research Ecosystem) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखा गया।
कल पारित होंगे 4 अहम प्रस्ताव
देशभर के विभिन्न प्रांतों से आए अभाविप के कार्यकर्ता-प्रतिनिधियों ने इस बैठक में अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। गहन चिंतन-मंथन के उपरांत कल (आगामी सत्र में) चार प्रमुख विचारार्थ प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया जाएगा।
इन 4 प्रमुख विषयों पर लाए जाएंगे प्रस्ताव:
- शिक्षा (Education) और उसमें सुधार की आवश्यकताएं।
- अर्बन माओवाद (Urban Maoism) से राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती।
- महिला सुरक्षा (Women Safety) और सशक्तिकरण।
- वैश्विक परिदृश्य (Global Scenario) में भारत की बढ़ती भूमिका।
उद्योग जगत से ‘अनुसंधान एवं विकास’ (R&D) में निवेश की अपील
आज की बैठक का सबसे प्रमुख आकर्षण भारत के ‘रिसर्च इकोसिस्टम’ को मजबूत करने पर जोर देना रहा। अभाविप ने भारतीय उद्योग जगत (Corporate Sector) से अनुसंधान एवं विकास (R&D) में अपना निवेश बढ़ाने का पुरजोर आह्वान किया है, जिससे ‘विकसित भारत’ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में तेजी से गति प्राप्त हो सके।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा: “विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने हेतु अनुसंधान संबंधी अवसंरचना एवं परिवेश का सुदृढ़ीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत के विकास तथा उसे वैश्विक पटल पर अग्रणी बनाने के लिए सरकारी संस्थानों के साथ उद्योग जगत का समन्वित योगदान बहुत आवश्यक है।”
R&D पर GDP का 1% से भी कम खर्च: अभाविप ने जताई चिंता
डॉ. सोलंकी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में भारत में अनुसंधान एवं विकास पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का एक प्रतिशत से भी कम व्यय किया जाता है। इसमें भी लगभग 60 प्रतिशत से अधिक का योगदान सरकारी तंत्र- जैसे ISRO, DRDO, प्रमुख शैक्षिक संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों का ही है।
अभाविप का मानना है कि आज भारतीय उद्यमियों के लिए प्रत्येक क्षेत्र में अपार संभावनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में उद्योग जगत को इन सरकारी संस्थानों के साथ ‘दीर्घकालिक सहयोग’ स्थापित करना चाहिए।
इन उभरते क्षेत्रों में निवेश की है सख्त आवश्यकता:
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI)
- क्वांटम प्रौद्योगिकी (Quantum Technology)
- साइबर सुरक्षा (Cyber Security)
- जैव प्रौद्योगिकी (Bio-Technology)
- स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा (Clean & Green Energy)
“शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, राष्ट्र निर्माण का आधार”
अभाविप ने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार प्राप्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण और ज्ञान सृजन का आधार है। इसी व्यापक दृष्टि के साथ अभाविप ने सदैव शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार (Innovation) तथा वैज्ञानिक चिंतन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया है।
डॉ. सोलंकी ने अंत में कहा-
“उद्योग जगत के संसाधनों और शैक्षिक संस्थानों की क्षमता का समन्वय ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा। अनुसंधान में बढ़ा हुआ यह निवेश केवल आर्थिक प्रगति का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करने का बड़ा आधार भी बनेगा।”














