पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ लगातार कदम उठा रही है। राज्य सरकार की ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ का असर ये हो रहा है कि उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर चेकपोस्ट पर रोजाना 70 से 80 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस उनके देश भेजा जा रहा है। बीएसएफ और बांग्लादेश के बार्डर गार्ड के बीच समन्वय से यह प्रक्रिया चल रही है।
होल्डिंग सेंटर बनाए गए
प्रशासन ने बढ़ती संख्या को संभालने के लिए हाकिमपुर इलाके में तीन नए होल्डिंग सेंटर शुरू किए हैं। इनमें करीब 220 बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। उत्तर 24 परगना के अलावा दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में भी अस्थायी होल्डिंग सेंटर सक्रिय कर दिए गए हैं। बीडीओ कार्यालय और पुलिस की निगरानी में इन केंद्रों में संदिग्ध लोगों को रखा जा रहा है। हर व्यक्ति के दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच की जा रही है। पुष्टि होने और सत्यापन पूरा होने के बाद ही उन्हें वापस भेजा जा रहा है।
लोगों की कहानियां
मध्यमग्राम के माइकल नगर में रह रही शमीमा खातून बांग्लादेश के सतखीरा जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि वह आठ साल पहले घोजाडांगा सीमा से भारत आई थीं। उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर कार्ड थे। लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ भी मिल रहा था। लेकिन हालिया जांच में मतदाता सूची से उनका नाम हट गया, जिसके बाद अब उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।
दुर्गा नगर में रंग-मिस्त्री का काम करने वाले अख्तारुल मंडल ने कहा कि उन्होंने तीन साल पहले 10,000 रुपये देकर दलाल के जरिए सीमा पार की थी। जशोर से आए एक बुजुर्ग ने बताया कि उन्होंने 7,000 रुपये देकर भारत पहुंचने की व्यवस्था की थी।
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दलालों का नेटवर्क
कार्रवाई के दौरान दलालों और मानव तस्करी के नेटवर्क की भी कई परतें खुल रही हैं। कई बांग्लादेशी परिवार अब डर के माहौल में वापस लौट रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ मकान मालिकों ने उन्हें घर खाली करने को कहा है।
तृणमूल नेताओं की भूमिका
छह महीने पहले सीमा इलाकों में स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं की सक्रियता काफी दिखती थी। वे घुसपैठियों के रहने-खाने और उनकी बातचीत में भी शामिल रहते थे। अब स्थिति बदल गई है। सीमा क्षेत्र में इन नेताओं की मौजूदगी लगभग गायब हो गई है। पूरा काम अब प्रशासन और पुलिस संभाल रही है।
क्या हो रहा है
हाकिमपुर चेकपोस्ट पर वापस जाने वालों की लंबी कतारें लग रही हैं। प्रशासन इन लोगों को व्यवस्थित तरीके से उनके देश भेजने की प्रक्रिया चला रहा है। दस्तावेजों की जांच सख्ती से की जा रही है ताकि सही पहचान हो सके।

















