उत्तर प्रदेश

बस्ती में बना ‘सोहर’ का विश्व रिकॉर्ड : 2500 महिलाओं ने अनोखे अंदाज में कहा अमित शाह को धन्यवाद

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में 2500 महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत 'सोहर' गाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है। नक्सलवाद के खात्मे पर गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद देने के इस अनूठे सांस्कृतिक शंखनाद की पूरी कहानी पढ़ें

Published by
Shivam Dixit



बस्ती | उत्तर प्रदेश का बस्ती जिला अब सिर्फ अपनी क्षेत्रीय पहचान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यहां की माटी की खुशबू और लोक-परंपरा ने वैश्विक मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। अवसर था एक भव्य और अनूठे सांस्कृतिक आयोजन का, जहां 2500 महिलाओं ने एक सुर में पारंपरिक लोकगीत “सोहर” गाकर एक नया इतिहास रच दिया।

इस अभूतपूर्व आयोजन ने सीधा ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपनी जगह बना ली है, जिसके बाद से पूरे जिले में जश्न और उत्साह का माहौल है।

लोकधुनों में छिपा था राष्ट्रप्रेम का संदेश

बता दें कि यह आयोजन केवल एक लोकगीत की प्रस्तुति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके भीतर राष्ट्रप्रेम और कृतज्ञता की एक गहरी भावना छिपी थी। पारंपरिक परिधानों में सजी इन हजारों माताओं और बहनों ने अपनी लोकधुनों के जरिए देश के गृहमंत्री अमित शाह को एक विशेष संदेश भेजा।

  • महिलाओं ने भारत को नक्सलवाद के दंश से मुक्त कराने की दिशा में किए गए कड़े और सफल प्रयासों के लिए गृहमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया।
  • कार्यक्रम के दौरान जब 2500 कंठों से एक साथ पारंपरिक सोहर की गूंज उठी, तो वहां मौजूद हर शख्स का रोम-रोम पुलकित हो उठा।
  • भारतीय संस्कृति और विश्व रिकॉर्ड की उपलब्धि ने उपस्थित लोगों की आंखें खुशी से नम कर दीं।

जानिए क्या है सोहर’

बता दें कि सोहर एक पारंपरिक लोकगीत होता है, जो बच्चे के जन्म की खुशी में गाया जाता है। सोहर मुख्य रूप से उत्तर भारत- विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बहुत अधिक प्रचलित है।

सोहर के गीतों को आमतौर पर महिलाएँ गाती हैं, जिसमे-

  • नवजात शिशु के जन्म की खुशी,
  • माँ के भाव,
  • परिवार की प्रसन्नता,
  • तथा धार्मिक/पौराणिक संदर्भों का वर्णन होता है।

उदाहरण के तौर पर, भगवान राम या कृष्ण के जन्म प्रसंगों से जुड़े सोहर भी गाए जाते हैं। सोहर को “जन्मोत्सव लोकगीत” भी कह सकते हैं।

‘यह सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, मातृशक्ति का शंखनाद है’

इस ऐतिहासिक आयोजन की रूपरेखा तैयार करने वाले और इसके संयोजक मनीष मिश्रा कार्यक्रम की सफलता पर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने इस कार्यक्रम के विश्व रिकॉर्ड को भारतीय संस्कृति और नारी शक्ति के शंखनाद के रूप में परिभाषित किया।

मनीष मिश्रा ने कहा-

“यह सिर्फ एक कीर्तिमान स्थापित करने की होड़ नहीं थी। हमारा मकसद दुनिया को यह दिखाना था कि हमारे गांवों की चौपालों और आंगनों में गाई जाने वाली परंपराओं में कितनी ताकत है, और यह विश्व स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना सकती है।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा-

“आज हमारी मातृशक्ति ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिकता की इस दौड़ में भी भारतीय लोकसंस्कृति पूरी तरह से जीवंत है और हमारी रगों में बसती है। 2100 महिलाओं का एक साथ आकर सोहर गाना बस्ती ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए असीम गर्व का क्षण है।”

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