मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 साल के अनुभवों पर एक किताब लिखी है। नाम है – ‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’। इस किताब का विमोचन आज (26 मई, 2026) दिल्ली के पूसा स्थित NASC कॉम्प्लेक्स में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने किया। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री को सच्चे कर्मयोगी और असाधारण इंसान बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पुस्तक के विमोचन के अवसर पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान समेत करीब एक दर्जन राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के कई बड़े नेता शामिल हुए।
12 वर्ष पहले आज ही के दिन केंद्र में भाजपा सरकार का गठन हुआ था।
अपनापन: नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव का विमोचन केवल आयोजन नहीं बल्कि नेतृत्व, संवेदना और जनसेवा की उस आत्मीय यात्रा का साझा होना है, जिसे शिवराज जी ने निकट से जिया। प्रभात प्रकाशन को बधाई#अपनापन #ShivrajSinghChouhan pic.twitter.com/Ubn7JSEfwM— Hitesh Shankar (@hiteshshankar) May 26, 2026
1999 से शुरू हुआ साथ
अपनी पुस्तक में पीएम मोदी के साथ के अपने अनुभवों को साझा करते हए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह किताब उनके लिए सिर्फ पुस्तक नहीं है, बल्कि मोदी जी के साथ बिताए लंबे समय का अपनापन है। इसमें 1999 की एकता यात्रा से लेकर आज तक के अनुभव इसमें शामिल हैं। उस समय मुरली मनोहर जोशी की यात्रा में नरेंद्र मोदी संगठनात्मक प्रभारी थे।
शिवराज ने बताया कि उनका और मोदी जी का पहला साथ इसी यात्रा से शुरू हुआ। उस वक्त कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था। भाजपा ने तय किया कि कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया जाएगा, ताकि देश को भावनात्मक रूप से जोड़ा जा सके। यात्रा का संचालन मोदी जी को सौंपा गया।
केंद्रीय मंत्री बताते हैं कि वह उस समय लोकसभा उपचुनाव जीतकर आए थे। प्रमोद महाजन का फोन आया और उन्हें केसरिया वाहिनी का संयोजक बनाया गया। पहली बैठक में मोदी जी ने कहा कि तिरंगा सिर्फ लाल चौक पर नहीं, बल्कि हर नौजवान के दिल में फहराना है।
23 जनवरी को फगवाड़ा में आतंकियों ने बस पर हमला किया, जिसमें छह कार्यकर्ता बलिदान हो गए। फिर भी यात्रा नहीं रुकी। अंत में डॉ. मुरली मनोहर जोशी और नरेंद्र मोदी ने लाल चौक पर तिरंगा फहराया। जम्मू में वापसी पर सभा हुई, जहां मोदी जी भावुक हो गए और कार्यकर्ताओं के लिए अपनी संवेदना जताई।
मोदी जी सच्चे कर्मयोगी
शिवराज ने कहा कि मोदी जी को दुनिया नेता कहती है, लेकिन वे असल में सच्चे कर्मयोगी और असाधारण इंसान हैं। 26 मई को मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के 12 साल पूरे हुए, लेकिन उनका साथ 35 साल का है। उन्होंने हर क्षण देश के लिए काम करते देखा।
वह कहते हैं कि मैंने मुख्यमंत्री के रूप में, फिर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री के नाते उन्होंने उनके साथ काम किया। उनसे सीखा कि कैसे फैसले लिए जाएं जो आम लोगों का जीवन बदल दें।
किताब क्यों लिखी
शिवराज का कहना है कि ये अनुभव सिर्फ उनके पास क्यों रहें। यह राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों, प्रोफेशनल्स, उद्योगपतियों, समाज सुधारकों, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण से जुड़े लोगों के लिए भी उपयोगी है। इसलिए इन्हें किताब के रूप में देशवासियों को समर्पित किया।
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युवाओं के लिए प्रेरणा
किताब में अनुशासन, तपस्या, समर्पण और अपनापन से बड़े लक्ष्य हासिल करने की बात है। मोदी जी के नेतृत्व, सुशासन, राष्ट्रसेवा और नीति-निर्माण के व्यक्तिगत पहलुओं को इसमें खास जगह दी गई है।
टेक्नोलॉजी को पहले पहचाना
केंद्रीय मंत्री ने शिवराज ने किताब में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि मोदी जी ने बहुत पहले ही ईमेल, कंप्यूटर और सोशल मीडिया का महत्व समझ लिया था। जब लोग मोबाइल को ‘फाइव स्टार संस्कृति’ कहते थे, तब भी वे भविष्य की टेक्नोलॉजी को अपनाने की बात करते थे। उन्होंने सुझाव दिया था कि जनता से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया जरूरी है।











