सनातन परंपरा में जब ज्येष्ठ अधिमास ( पुरुषोत्तम मास /मलमास) शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा और नौतपा का एक साथ दुर्लभ संयोग बनता है तो यह संपूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी होता है और सकारात्मक ऊर्जा चक्र का निर्माण करता है। यह दुर्लभ संयोग सन् 1980 के 46 वर्ष सन् 2026 में बना है। इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 25 मई 2026 को सुबह 04 बजकर 30 मिनट पर हुई है, वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन अर्थात् 26 मई 2026 को सुबह 05 बजकर 10 मिनट पर होगा।
ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव वृषभ राशि में गोचर करते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं,तो वहां से अगले 9 दिनों की काल को नौतपा कहा जाता है। इस वर्ष नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा। इस बार नौतपा में दो मंगलवार का भी संयोग बनेगा। गंगा दशहरा और नौतपा की प्रथम तिथि का एक साथ होना अत्यंत दुर्लभ संयोग है, जिसे मणि कांचन योग कहा जा सकता है।वेंसे इस तिथि को रवि योग और श्रीवत्स योग भी बने हैं, जो अत्यंत कल्याणकारी होंगे।
गंगा दशहरा का महात्म्य
गंगा दशहरा के दिन भगवान शिव की जटाओं से माँ गंगा का धरती पर अवतरण होता है। गंगा दशहरा के दिन गंगा जी में स्नान करने दान पुण्य करने और कथा सुनने या पढ़ने से 10 प्रकार पाप क्रमशः 3 कायिक 4 वाचिक और 3 मानसिक पापों का निवारण होता है। गंगा दशहरा में 10 की संख्या का विशेष महत्व है, जैंसे कि 10 फल, 10 दीपक।
नौतपा और गंगा दशहरा का संयोग प्रकृति में अग्नि और जल के संतुलन का प्रतीक है, जो इन दो तत्वों से सृष्टि के संचालन के महत्व को रेखांकित करता है। जहाँ नौतपा में सूर्य की तपिश और प्रचंड तेज,अग्नि तत्व का प्रतीक है,तो वहीं गंगा दशहरा शीतलता जल और मोक्ष, जल तत्व का प्रतीक है।
नौतपा क्यों है महत्वपूर्ण
भारतीय विज्ञान,ज्योतिष और खगोल विज्ञान में ‘नौतपा’ सीधा संबंध मानसून के चक्र, कृषि पारिस्थितिकी और प्राकृतिक तापमान संतुलन से है। यह कोई अंधविश्वास नहीं, वरन् पर्यावरण को शुद्ध करने और आने वाली अच्छी बारिश की भविष्यवाणी करने का एक वैज्ञानिक पैमाना है।
मौसम विज्ञान के अनुसार, नौतपा के समय जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, धरती उतनी ही गर्म होती है। इससे जमीन पर कम दबाव का क्षेत्र बनता है,जो समुद्र की नम हवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता है और वाष्पीकरण तीव्र होता है। यही चक्र आगे चलकर अच्छे मानसून का कारण बनता है।
नौतपा प्राकृतिक कीटनाशक के रुप में एक वरदान है। प्रचंड गर्मी और उच्च तापमान के कारण खेतों की मिट्टी में छिपे हानिकारक बैक्टीरिया, फंगस और कीड़े प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
नौतपा की उष्ण धूप ही वह प्राकृतिक ऊर्जा है,जो आम, जामुन और तरबूज जैसे मौसमी फलों को पूरी तरह पकाती है और उनमें मिठास लाती है।
किसानों का एक प्राकृतिक थर्मामीटर
नौतपा भारतीय उप महाद्वीप के किसानों का एक प्राकृतिक थर्मामीटर और ज्योतिष विज्ञानी भी है। नौतपा के अनुसार किसान कृषि संबंधी योजनाओं की रुपरेखा और भविष्य तय करते हैं।यदि इन 9 दिनों में तीव्र गर्मी पड़े, तो मानसून बहुत अच्छा रहता है; वहीं यदि इन दिनों बारिश हो जाए,तो मानसून कमजोर होने की आशंका बढ़ जाती है। वस्तुतः नौतपा आने वाले मानसून का भविष्य वक्ता है।
राजस्थान सहित लगभग समूचे उत्तर भारत में नौतपा के वैज्ञानिक,पर्यावरणीय और मौसम सम्बन्धी महत्व को केवल दो पंक्तियों में अभिव्यक्त किया गया है,जो कि अद्भुत और अद्वितीय है तथा भारतीय ज्ञान विज्ञान की परंपरा को समृद्ध करता है।ये पंक्तियाँ हैं –
“दोए मूसा, दोए कातरा,
दोए टिड्डी, दोए ताव।
दोयां रा बादी जळ हरै,
दोए बिसर, दोए बाव।।”
अर्थात् पहले दो दिन हवा ना चले,तो चूहे अधिक होंगे,दूसरे दो दिन हवा ना चले तो कातरे (एक कीड़ा जो धन को चट कर जाता है )का प्रभाव बढ़ेगा,तीसरे दो दिन हवा ना चले तो टिड्डी आने का अंदेशा,चौथे दिन हवा ना चले तो,नजला बुखार का प्रकोप रहता है,पांचवें दो दिन हवा ना चले तो वर्षा का अभाव, छठे दो दिन हवा ना चले तो जहरीले जंतुओं की बहुतायत और सातवें दो दिन हवा ना चले तो आंधी चलने का अंदेशा रहेगा।
यह केवल कहावत नहीं है,वरन् भारतीय श्रुति परम्परा में निहित ज्ञान – विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक देन है।

















