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46 वर्ष बाद बना गंगा दशहरा और नौतपा का दुर्लभ संयोग 

ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव वृषभ राशि में गोचर करते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं,तो वहां से अगले 9 दिनों की काल को नौतपा कहा जाता है। इस वर्ष नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा। इस बार नौतपा में दो मंगलवार का भी संयोग बनेगा।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
May 25, 2026, 07:49 pm IST
in भारत
गंगा दशहरा और नौतपा का अद्भुत संयोग (फोटो-एआई द्वारा निर्मित)

गंगा दशहरा और नौतपा का अद्भुत संयोग (फोटो-एआई द्वारा निर्मित)

सनातन परंपरा में जब ज्येष्ठ अधिमास ( पुरुषोत्तम मास /मलमास) शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा और नौतपा का एक साथ दुर्लभ संयोग बनता है तो यह संपूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी होता है और सकारात्मक ऊर्जा चक्र का निर्माण करता है। यह दुर्लभ संयोग सन् 1980 के 46 वर्ष सन् 2026 में बना है। इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 25 मई 2026 को सुबह 04 बजकर 30 मिनट पर हुई है, वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन अर्थात् 26 मई 2026 को सुबह 05 बजकर 10 मिनट पर होगा।

ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव वृषभ राशि में गोचर करते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं,तो वहां से अगले 9 दिनों की काल को नौतपा कहा जाता है। इस वर्ष नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा। इस बार नौतपा में दो मंगलवार का भी संयोग बनेगा। गंगा दशहरा और नौतपा की प्रथम तिथि का एक साथ होना अत्यंत दुर्लभ संयोग है, जिसे मणि कांचन योग कहा जा सकता है।वेंसे इस तिथि को रवि योग और श्रीवत्स योग भी बने हैं, जो अत्यंत कल्याणकारी होंगे।

गंगा दशहरा का महात्म्य

गंगा दशहरा के दिन भगवान शिव की जटाओं से माँ गंगा का धरती पर अवतरण होता है। गंगा दशहरा के दिन गंगा जी में स्नान करने दान पुण्य करने और कथा सुनने या पढ़ने से 10 प्रकार पाप क्रमशः 3 कायिक 4 वाचिक और 3 मानसिक पापों का निवारण होता है। गंगा दशहरा में 10 की संख्या का विशेष महत्व है, जैंसे कि 10 फल, 10 दीपक।

नौतपा और गंगा दशहरा का संयोग प्रकृति में अग्नि और जल के संतुलन का प्रतीक है, जो इन दो तत्वों से सृष्टि के संचालन के महत्व को रेखांकित करता है। जहाँ नौतपा में सूर्य की तपिश और प्रचंड तेज,अग्नि तत्व का प्रतीक है,तो वहीं गंगा दशहरा शीतलता जल और मोक्ष, जल तत्व का प्रतीक है।

नौतपा क्यों है महत्वपूर्ण

भारतीय विज्ञान,ज्योतिष और खगोल विज्ञान में ‘नौतपा’ सीधा संबंध मानसून के चक्र, कृषि पारिस्थितिकी और प्राकृतिक तापमान संतुलन से है। यह कोई अंधविश्वास नहीं, वरन् पर्यावरण को शुद्ध करने और आने वाली अच्छी बारिश की भविष्यवाणी करने का एक वैज्ञानिक पैमाना है।

मौसम विज्ञान के अनुसार, नौतपा के समय जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, धरती उतनी ही गर्म होती है। इससे जमीन पर कम दबाव का क्षेत्र बनता है,जो समुद्र की नम हवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता है और वाष्पीकरण तीव्र होता है। यही चक्र आगे चलकर अच्छे मानसून का कारण बनता है।

नौतपा प्राकृतिक कीटनाशक के रुप में एक वरदान है। प्रचंड गर्मी और उच्च तापमान के कारण खेतों की मिट्टी में छिपे हानिकारक बैक्टीरिया, फंगस और कीड़े प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
नौतपा की उष्ण धूप ही वह प्राकृतिक ऊर्जा है,जो आम, जामुन और तरबूज जैसे मौसमी फलों को पूरी तरह पकाती है और उनमें मिठास लाती है।

किसानों का एक प्राकृतिक थर्मामीटर

नौतपा भारतीय उप महाद्वीप के किसानों का एक प्राकृतिक थर्मामीटर और ज्योतिष विज्ञानी भी है। नौतपा के अनुसार किसान कृषि संबंधी योजनाओं की रुपरेखा और भविष्य तय करते हैं।यदि इन 9 दिनों में तीव्र गर्मी पड़े, तो मानसून बहुत अच्छा रहता है; वहीं यदि इन दिनों बारिश हो जाए,तो मानसून कमजोर होने की आशंका बढ़ जाती है। वस्तुतः नौतपा आने वाले मानसून का भविष्य वक्ता है।

राजस्थान सहित लगभग समूचे उत्तर भारत में नौतपा के वैज्ञानिक,पर्यावरणीय और मौसम सम्बन्धी महत्व को केवल दो पंक्तियों में अभिव्यक्त किया गया है,जो कि अद्भुत और अद्वितीय है तथा भारतीय ज्ञान विज्ञान की परंपरा को समृद्ध करता है।ये पंक्तियाँ हैं –

“दोए मूसा, दोए कातरा,
दोए टिड्डी, दोए ताव।
दोयां रा बादी जळ हरै,
दोए बिसर, दोए बाव।।”
अर्थात् पहले दो दिन हवा ना चले,तो चूहे अधिक होंगे,दूसरे दो दिन हवा ना चले तो कातरे (एक कीड़ा जो धन को चट कर जाता है )का प्रभाव बढ़ेगा,तीसरे दो दिन हवा ना चले तो टिड्डी आने का अंदेशा,चौथे दिन हवा ना चले तो,नजला बुखार का प्रकोप रहता है,पांचवें दो दिन हवा ना चले तो वर्षा का अभाव, छठे दो दिन हवा ना चले तो जहरीले जंतुओं की बहुतायत और सातवें दो दिन हवा ना चले तो आंधी चलने का अंदेशा रहेगा।

यह केवल कहावत नहीं है,वरन् भारतीय श्रुति परम्परा में निहित ज्ञान – विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक देन है।

Topics: गंगा दशहरामानसूननौतपानौतपा क्या हैभारतीय मौसम
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
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