भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों के लिए आठ सूत्रीय निर्देश जारी किए हैं, जिनका लक्ष्य सरकारी स्तर पर ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी लाना है। यह पहल पश्चिम एशिया की वर्तमान परिस्थितियों, बढ़ती वैश्विक ईंधन चुनौतियों तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशव्यापी ईंधन बचत के आह्वान के मद्देनज़र की गई है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री माझी अपने सरकारी काफिले को आधा करने और जनता से ईंधन संरक्षण की अपील कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि इन फैसलों को राज्य सचिवालय से लेकर ब्लॉक, तहसील, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी संस्थानों तक सख्ती से लागू किया जाए।
वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता
सरकार के नए निर्देशों के अनुसार अब विभागीय बैठकें, समीक्षा बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं अधिकतर ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जाएंगी। केवल आवश्यक अधिकारियों और कर्मचारियों की ही भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, जबकि अन्य लोग वर्चुअली शामिल होंगे।
सरकार का मानना है कि इससे सरकारी वाहनों के उपयोग में कमी आएगी और ईंधन की बचत होगी।
1 जून 2026 से सरकारी विभागों में केवल इलेक्ट्रिक वाहन
मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि 1 जून 2026 से सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहन इलेक्ट्रिक वाहन (EV) होंगे। विशेष परिस्थितियों में ही इस नियम से छूट दी जाएगी। साथ ही, सरकारी कार्यालयों द्वारा किराए पर लिए जाने वाले चारपहिया वाहनों पर भी यह नियम लागू होगा। सरकार का उद्देश्य धीरे-धीरे सरकारी परिवहन प्रणाली को पूर्णतः इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाना है।
वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कारपूलिंग अनिवार्य
सरकारी वाहनों का उपयोग करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को अब कारपूलिंग अपनानी होगी। आधिकारिक यात्रा के दौरान एक ही वाहन का सामूहिक उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही वाहन उपयोग के लिए स्वीकृत खर्च को भी अनुपातिक रूप से कम किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से अनावश्यक वाहन उपयोग और ईंधन खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी।
सरकारी वाहन उपयोग पर नई गाइडलाइन
वित्त विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह 15 दिनों के भीतर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन वरिष्ठ अधिकारियों को निजी उपयोग के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध होंगे और उनकी पात्रता क्या होगी।
बस और रेल यात्रा को बढ़ावा
दूरस्थ स्थानों की आधिकारिक यात्राओं के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन, विशेष रूप से बस और रेल सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ने से ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की नीति
वित्त विभाग को यह भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नीति तैयार करे, जो सरकारी कार्यों के लिए अपने निजी इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करते हैं। इस नीति के तहत उन्हें मिलने वाली सुविधाओं और प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया तय की जाएगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा
राज्य सरकार ने कर्मचारियों के आवागमन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बस और मिनीबस सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया है। जिन इलाकों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी रहते हैं, वहां से उनके कार्यालयों तक विशेष ई-बस सेवाएं संचालित की जाएंगी।
हर विभाग को 10 प्रतिशत ईंधन बचत का लक्ष्य
सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे योजनाबद्ध तरीके से काम करते हुए हर महीने कम से कम 10 प्रतिशत पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उत्कल विश्वविद्यालय में शनिवार को पेट्रोल-डीजल वाहनों पर रोक
इसी बीच उत्कल विश्वविद्यालय ने भी प्रदूषण मुक्त परिसर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रत्येक शनिवार को परिसर में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह निर्णय ओडिशा के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा हरि बाबु कंभमपाटी की सलाह के बाद लागू किया गया। हर शनिवार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक पेट्रोल और डीजल से चलने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। नियम के पालन को सुनिश्चित करने के लिए मुख्य द्वार पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।
ओएसआरटीसी बसों को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा इलेक्ट्रिक
राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन को भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से ले जा रही है। ओडिशा के परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना ने घोषणा की है कि ओडिशा स्टेट रोड ट्रान्सपोर्टच कार्पोरेशन की सभी बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा। मंत्री ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन माझी के हरित परिवहन विजन के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना के विकास पर भी तेजी से काम चल रहा है।
प्रस्तावित 100 ईवी चार्जिंग स्टेशनों में से 30 का निर्माण पूरा हो चुका है, जिनमें 15 चार्जिंग स्टेशन भुवनेश्वर में स्थापित किए गए हैं। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए निर्माताओं को हर संभव सहायता, प्रोत्साहन और सुविधाएं देने का भी आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा सरकार की यह पहल न केवल ईंधन बचत में मदद करेगी बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और सतत परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।











