भुवनेश्वर। पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के पवित्र रत्न भंडार की सूचीकरण एवं दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को 24 मई से अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय राज्य में जारी भीषण गर्मी, मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ तथा आगामी स्नान पूर्णिमा और विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम की स्थिति और व्यवस्थागत आवश्यकताओं की समीक्षा के बाद जून माह में इस प्रक्रिया को पुनः शुरू किया जाएगा।
श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में रत्न भंडार की गणना और दस्तावेजीकरण कार्य जारी रखने से मंदिर की नियमित नीतियों, अनुष्ठानों और प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती थीं। भीषण गर्मी के कारण कर्मचारियों और सेवायतों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, वहीं दूसरी ओर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

गौरतलब है कि चंदन यात्रा के दौरान अल्प विराम के बाद 11 मई से रत्न भंडार की सूचीकरण प्रक्रिया पुनः शुरू की गई थी। अब तक लगभग 20 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार रत्न भंडार के भीतरी कक्ष में रखे गए 120 से अधिक आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। इसके लिए लगभग 57 घंटे 8 मिनट तक गणना और निरीक्षण कार्य किया गया। रत्न भंडार की यह ऐतिहासिक सूचीकरण प्रक्रिया 25 मार्च से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई थी। इस महत्वपूर्ण कार्य में मंदिर सेवायतों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, जेमोलॉजिस्ट विशेषज्ञों तथा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। रत्न भंडार को भगवान श्रीजगन्नाथ का अत्यंत पवित्र और बहुमूल्य खजाना माना जाता है, जिसमें भगवानों के स्वर्ण आभूषण, रत्न तथा कई ऐतिहासिक धरोहरें सुरक्षित हैं।
स्नान पूर्णिमा और रथयात्रा की तैयारियों पर विशेष ध्यान
मंदिर प्रशासन ने कहा कि आगामी दिनों में पुरी में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए अब प्राथमिकता रथयात्रा और उससे जुड़े सभी प्रमुख अनुष्ठानों के सुचारु संचालन पर दी जा रही है। प्रशासन के अनुसार स्नान पूर्णिमा से लेकर रथयात्रा, आड़प मंडप बीजे, बाहुड़ा यात्रा, सुनाबेश, अधरपाना और नीलाद्रि बीजे तक सभी पर्वों के सफल आयोजन के लिए व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं।
अधिकारियों ने बताया कि रत्न भंडार सूचीकरण प्रक्रिया के अगले चरण की रूपरेखा त्योहारों की समय-सारिणी और व्यवस्थागत आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद तैयार की जाएगी। इसके लिए अगले सप्ताह से विभिन्न स्तरों पर बैठकों का दौर शुरू होगा।
अगले सप्ताह से शुरू होंगी समन्वय बैठकें
मंदिर प्रशासन ने जानकारी दी कि छत्तीस निजोग, मंदिर प्रबंधन समिति तथा अन्य संबंधित उप-समितियों के साथ अगले सप्ताह से कई महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में रथयात्रा और अन्य उत्सवों की व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ-साथ रत्न भंडार सूचीकरण प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की रणनीति तैयार की जाएगी।
रथयात्रा की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
इधर, ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने भुवनेश्वर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए आगामी रथयात्रा के शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ चर्चा की। राज्य अतिथि भवन में आयोजित इस बैठक में मंत्री ने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ से जुड़े प्रत्येक उत्सव और यात्रा का ओडिशा के लोगों और विश्वभर के जगन्नाथ भक्तों की भावनाओं से गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की रथयात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार के सभी विभागों, जिला प्रशासन, पुलिस, सेवायत समुदाय और श्रद्धालुओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
बैठक में समयबद्ध नीतिकांति, पहंडी व्यवस्था, रथ खींचने की प्रक्रिया, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा प्रबंधन, बैरिकेडिंग, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा अनुष्ठानों की पूर्व सूचना व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा सेवायतों, निजोग प्रतिनिधियों और ड्यूटी में तैनात पुलिस कर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
रथयात्रा के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पूरी
श्रीजगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी ने बैठक में बताया कि रथयात्रा के लिए आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि रथ निर्माण के लिए लकड़ी, रथ की रस्सियां, रथों के वस्त्र, धूप, चंदन लकड़ी तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त सामग्री का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए भीड़ प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत करने पर काम कर रहा है। साथ ही विभिन्न अनुष्ठानों की समय-सारिणी को पहले से सार्वजनिक करने की भी योजना बनाई जा रही है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में कानून विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. पवित्र मोहन सामल, पुरी जिलाधिकारी दिव्यज्योति परिड़ा, पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह, दैतापति निजोग के प्रतिनिधि तथा प्रशासन और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में अधिकारियों ने विश्वास जताया कि सभी पक्षों के सहयोग और समन्वित प्रयासों से इस वर्ष की रथयात्रा और उससे जुड़े सभी उत्सव शांतिपूर्ण, सुरक्षित और भव्य तरीके से संपन्न होंगे।











