कवर्धा (छत्तीसगढ़) | छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया में आज एक बड़ा धार्मिक और सामाजिक पुनर्जागरण देखने को मिला। यहाँ वनवासी समुदाय के 200 लोगों ने, जिनमें एक पादरी भी शामिल हैं, अन्य मत को छोड़कर अपनी मूल आस्था और स्वधर्म में वापसी की है। इस पूरे आयोजन को बेहद परंपरागत रीति-रिवाजों और पवित्र धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न किया गया।
इस अवसर पर क्षेत्रीय भाजपा विधायक भावना बोहरा ने अपने मूल धर्म में लौटने वाले वनवासियों का न केवल भव्य स्वागत किया, बल्कि अटूट श्रद्धा भाव के साथ उनके पैर पखारकर (धोकर) उन्हें सम्मानित भी किया।
परंपरागत संस्कारों से हुआ स्वागत
पंडरिया में आयोजित इस ‘घर वापसी’ कार्यक्रम में विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच सभी घरवापसी करने वाले सदस्यों को तिलक लगाकर और रक्षा सूत्र बांधकर उनका अभिनंदन किया गया। विधायक भावना बोहरा ने इस पूरे कार्यक्रम को जनजातीय समाज की जागरूकता और एकजुटता का प्रतीक बताया है।
“यह अपने परिवार के बिछड़े हुए सदस्यों का घर लौटने जैसा अनुभव है। वनवासी समाज हमारी संस्कृति की असली जड़ है। आज इन सभी ने अपनी जड़ों की ओर लौटने का जो साहसिक निर्णय लिया है, वह पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण है। इनके सम्मान में इनके पैर धोना मेरे लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है”
– भावना बोहरा, विधायक (पंडरिया)
अब तक 700 से अधिक वनवासियों की हुई घर वापसी
कवर्धा और आसपास के वनांचल क्षेत्रों में मूल सनातन धर्म में लौटने का यह सिलसिला पिछले कुछ समय से लगातार तेज हुआ है। सामाजिक चेतना के कारण अब तक इस अभियान के तहत 700 से अधिक लोग अपनी पुरानी आस्था में लौट चुके हैं।
| क्षेत्र / ग्राम | वापसी करने वाले वनवासियों की संख्या |
|---|---|
| नेऊर (वन क्षेत्र के पास के गांव) | 115 |
| कुई-कुकदूर क्षेत्र | 70 |
| ग्राम दमगढ़ | 50 |
| ग्राम कुलहीडोंगरी | 140 |
| पंडरिया (आज का अभियान) | 200 |
| कुल योग | 700 से अधिक |
वनवासी संस्कृति का संरक्षण
वहीं स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि वनांचल क्षेत्रों में अब लोग अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। नेऊर और कुई-कुकदूर जैसे सुदूर क्षेत्रों से इतनी बड़ी संख्या में वनवासियों का स्वधर्म में लौटना इस बात का प्रमाण है कि जनजातियों क्षेत्रों में बाहरी प्रभाव अब कम हो रहे हैं।
मुख्य आकर्षण: आज के इस विशेष आयोजन में एक पादरी का भी सपरिवार मूल धर्म में वापस आना क्षेत्र में गहन चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जन प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।
जानकारों की माने तो, इस प्रकार के आयोजनों से वनांचल क्षेत्रों में कन्वर्जन की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग रही है और वनवासी समाज में अपनी गौरवशाली विरासत के प्रति स्वाभिमान का भाव जागा है।











