बेंगलुरु | राष्ट्र निर्माण और महिला संगठन के क्षेत्र में अपनी पूरी ऊर्जा खपाने वाली राष्ट्र सेविका समिति की पूर्व अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका रुक्मिणी अक्का अब हमारे बीच नहीं रहीं। 98 वर्ष की आयु में बेंगलुरु में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से न केवल राष्ट्र सेविका समिति, बल्कि पूरे संघ परिवार और सामाजिक हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई है।
उनके निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे भारतीय समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
रुक्मिणी अक्का का जीवन अनुशासन, सेवा और अखंड राष्ट्रभक्ति का एक जीवंत उदाहरण था।उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र के उत्थान और महिलाओं को संगठित कर उनमें संस्कार जगाने के कार्य में समर्पित कर दिया।
संघ नेतृत्व ने रुक्मिणी अक्का के जीवन को राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित एक “प्राज्ज्वल्यमान उदाहरण” करार दिया है।
‘भाव विश्व में एक शून्य का निर्माण’: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने अपने शोक संदेश में रुक्मिणी अक्का के साथ अपने दशकों पुराने आत्मीय संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि उनका ज्ञानानुभव संपन्न जीवन समाज के लिए एक मार्गदर्शक की तरह था।
“मातृ समान रुक्मिणी अक्का के देहावसान ने हमारे भाव विश्व में एक शून्य का निर्माण कर दिया है। वृद्धावस्था में शरीर शांत होना स्वाभाविक ही है, किंतु दशकों के परिचय और आत्मीय संबंधों के कारण मन को असहनीय वेदना हो रही है।
उनकी सहज मातृवत् आत्मीयता और निरंतर सक्रियता सभी को प्रभावित करती थी। उनके निधन से सेविकाएं और समाज एक मातृ समान अभिभावक से वंचित हो गए हैं।”
मातृ समान रुक्मिणी अक्का के देहावसान ने हमारे भाव विश्व में एक शून्य का निर्माण कर दिया है। वृद्धावस्था में शरीर शांत होना स्वाभाविक ही है किंतु दशकों के परिचय, आत्मीय संबंध के कारण मन को असहनीय वेदना होती है। रुक्मिणी जी का ज्ञानानुभव संपन्न जीवन एवं व्यक्तित्व एक राष्ट्र… pic.twitter.com/sXZpxFczL2
— RSS (@RSSorg) May 22, 2026
राष्ट्रभक्त परिवार की गौरवशाली विरासत
रुक्मिणी अक्का एक ऐसे परिवार से आती थीं, जिसकी रग-रग में देश सेवा बसी थी। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भारतीय समाज की सेवा के लिए समर्पित रही है-
- वे पूर्व अखिल भारतीय सेवा प्रमुख स्व. सूर्य नारायण राव जी की सगी बहन थीं।
- वे आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और मार्गदर्शक स्व. नरहरि जी की भी बहन थीं।
इस महान परिवार ने संघ और समाज को अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया और रुक्मिणी अक्का ने उस गौरवशाली परंपरा को अंतिम सांस तक निभाया।
अनुशासन और सादगी का संगम
रुक्मिणी अक्का को उनकी कठोर अनुशासन प्रियता और साथ ही असीम ममता के लिए याद किया जाता रहेगा। अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका के रूप में उन्होंने देश के कोने-कोने का प्रवास किया। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे जटिल से जटिल संगठनात्मक समस्याओं को सहज मुस्कान और सादगी से सुलझा लेती थीं।
बेंगलुरु में उनके अंतिम दर्शन के लिए विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और सेविकाओं का तांता लगा हुआ है।
राष्ट्र सेवा और महिला संगठन में अतुलनीय योगदान
रुक्मिणी अक्का ने राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से हिंदू समाज के संगठन और महिलाओं को भारतीय संस्कारों से जोड़ने के उदात्त कार्य में अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया। एक कुशल संगठक के रूप में उनकी सक्रियता अंतिम समय तक बनी रही। वे न केवल समिति की बहनों के लिए प्रेरणा थीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए एक स्नेहमयी अभिभावक की तरह थीं।
समिति को दी वैचारिक और संगठनात्मक मजबूती
राष्ट्र सेविका समिति में अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका के रूप में उन्होंने देशभर का प्रवास किया और अनगिनत सेविकाओं का मार्गदर्शन किया। उनकी कार्यशैली में वह सादगी और दृढ़ता थी, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।
वे केवल एक पदाधिकारी नहीं थीं, बल्कि हजारों सेविकाओं के लिए एक स्नेहिल बड़ी बहन और मार्गदर्शक थीं। बेंगलुरु के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी उनका योगदान अमूल्य रहा।
“रुक्मिणी अक्का का जीवन एक खुली किताब की तरह था, जिसमें केवल सेवा, तपस्या और संगठन का अध्याय लिखा था। रुक्मिणी अक्का का जाना राष्ट्र सेविका समिति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उनका अनुशासित व्यक्तित्व और स्नेहमयी स्वभाव हमेशा हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।
ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके शोक संतप्त परिवार व समिति परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
ॐ शांतिः












