भुवनेश्वर में पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन-2026 में पांच राज्यों ने साझा कृषि रोडमैप पर किया मंथन
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भुवनेश्वर में पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन-2026 में पांच राज्यों ने साझा कृषि रोडमैप पर किया मंथन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पूर्वी भारत में देश की कृषि व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की अपार क्षमता मौजूद है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
May 20, 2026, 01:33 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पूर्वी भारत में देश की कृषि व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की अपार क्षमता मौजूद है। उर्वरा भूमि, पर्याप्त जल संसाधन, विविध जलवायु और मेहनतकश किसानों के कारण यह क्षेत्र भविष्य में भारत के कृषि विकास का सबसे बड़ा “ग्रोथ इंजन” बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि योजनाबद्ध तरीके से आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाए, तो पूर्वी भारत न केवल देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि किसानों की आय में भी ऐतिहासिक वृद्धि संभव होगी।

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित “पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन-2026” में ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पूर्वी भारत की कृषि चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा कर साझा रणनीति तैयार करना था। इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी , विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक, आईसीएआर के अधिकारी, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

कृषि को नई दिशा देने का मंच
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन को केवल औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि कृषि परिवर्तन का मंच बताते हुए कहा कि “टीम एग्रीकल्चर” का यह प्रयास पूर्वी भारत की खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ की पावन भूमि पर आयोजित यह सम्मेलन किसानों की समृद्धि और कृषि विकास के लिए सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा इस विकास यात्रा की सबसे मजबूत नींव कृषि क्षेत्र है।

कृषि के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र के सामने तीन प्रमुख लक्ष्यों को रेखांकित किया। पहला, देश की 140 करोड़ आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। दूसरा, लोगों को पोषणयुक्त और गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराना। तीसरा, किसानों की आय और आजीविका को बेहतर बनाना। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि लागत कम करना, किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाना, प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना और कृषि का विविधीकरण करना भी जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि केवल धान और गेहूं पर आधारित खेती अब पर्याप्त नहीं है। पूर्वी भारत में दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर विशेष जोर
सम्मेलन में छोटी जोत वाले किसानों की समस्या पर विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत में अधिकांश किसानों के पास सीमित भूमि है, इसलिए “इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल” को व्यवहारिक रूप में लागू करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि खेती को केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। यदि किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, कृषि वानिकी और बागवानी जैसी गतिविधियों को जोड़ें, तो उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है।

उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे ऐसे सफल मॉडल किसानों तक पहुंचाएं जो छोटे किसानों के लिए लाभकारी और प्रेरणादायक हों।

मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती पर फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने टिकाऊ कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रहा है और किसानों की लागत भी बढ़ा रहा है। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग करने की अपील की। साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में प्राकृतिक खेती प्रमुख है और किसानों को अपनी जमीन के एक हिस्से में जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

“खेत बचाओ अभियान” की घोषणा
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 1 जून से देशभर में “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत किसानों को संतुलित खाद उपयोग, मिट्टी की सेहत, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने उर्वरकों के डायवर्जन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सब्सिडी वाला खाद केवल खेती के उपयोग में ही आए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इसके साथ ही उन्होंने नकली खाद, घटिया बीज और नकली कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्यों से सख्त कानून लागू करने और दोषियों के खिलाफ अभियान चलाने का आह्वान किया।

दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
सम्मेलन में दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत देश को दाल और खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि किसानों को तभी इन फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा सकता है जब उन्हें अपनी उपज की खरीद का भरोसा मिले। इसके लिए पीएम-आशा योजना, नैफेड, एनसीसीएफ और राज्य एजेंसियों की भूमिका को और मजबूत करना होगा।

वैज्ञानिक तकनीक खेत तक पहुंचाने पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्रों और वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यों से विशेष अभियान चलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और योजनाओं की जानकारी समयबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचे, तभी कृषि क्षेत्र में वास्तविक परिवर्तन संभव होगा।

फार्मर आईडी बनेगी किसानों के लिए सुविधा का माध्यम
केंद्रीय मंत्री ने “फार्मर आईडी” को किसानों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे किसान की जमीन, परिवार और अन्य जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि इससे ऋण वितरण, उर्वरक आपूर्ति और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं तेज तरीके से किसानों तक पहुंच सकेगा। राज्यों से इसे तेजी से लागू करने का आग्रह भी किया गया।

बागवानी और निर्यात क्षमता पर जोर
सम्मेलन में बागवानी, आम और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन तथा निर्यात क्षमता पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत के कई राज्यों में फल और सब्जियों की खेती किसानों को अधिक आय दिला सकती है। उन्होंने स्वच्छ पौध सामग्री, आधुनिक नर्सरी व्यवस्था और बाजार आधारित कृषि प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

ओडिशा सरकार की कृषि योजनाएं
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि यह सम्मेलन पूर्वी भारत के कृषि भविष्य का साझा रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन “पूर्वोदय” की अवधारणा को मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा मूल रूप से कृषि प्रधान राज्य है और यहां की अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका है। राज्य सरकार कृषि को अधिक समावेशी, जलवायु अनुकूल और किसान-केंद्रित बनाने के लिए कई कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य में दाल उत्पादन, खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता, फसल विविधीकरण और कृषि विस्तार पर विशेष कार्य किया जा रहा है। साथ ही धान उत्पादन और खरीद में वृद्धि के कारण भंडारण और विपणन संबंधी चुनौतियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

मिलेट्स और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मिलेट्स को “सुपर फूड” बताते हुए कहा कि यह कम पानी और कम लागत में उगने वाली फसल है, जो विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों के लिए उपयोगी है। उन्होंने जैविक खेती, पारंपरिक खाद्यान्न संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को इन क्षेत्रों में और अधिक अनुसंधान करने की आवश्यकता है।

एफपीओ और कृषि उद्यमिता पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि ओडिशा सरकार एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन), कोल्ड स्टोरेज, कृषि उद्यमिता, कॉफी उत्पादन और स्थानीय कृषि उत्पादों के विपणन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत के राज्यों के बीच श्रेष्ठ कृषि पद्धतियों और नवाचारों का आदान-प्रदान इस सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि साबित होगा।

अनेक राज्यों के मंत्री और विशेषज्ञ रहे उपस्थित
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी एवं श्री रामनाथ ठाकुर, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव, बिहार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधि-मंत्री श्री अशोक कीर्तनिया, केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट तथा केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान प्रतिनिधि, केवीके, एफपीओ, स्टार्टअप्स, नाबार्ड और बैंकों से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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