विदेशी तकनीकों के अंधानुकरण से तबाह हो जाएगी खेती! भारतीय किसान संघ ने किया CRISPR का विरोध, सरकार से की ये बड़ी मांगें
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विदेशी तकनीकों के अंधानुकरण से तबाह हो जाएगी खेती! भारतीय किसान संघ ने किया CRISPR का विरोध, सरकार से की ये बड़ी मांगें

भारतीय किसान संघ ने माउंट आबू की दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक में चर्चा व चिंतन के बाद देश को दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 100% सरकारी खरीद की गारंटी और एकल फसल पद्धति के विकल्प के रूप में 'गौ कृषि वाणिज्यम' को बढ़ावा देने की मांग की है। संघ ने संसदीय समिति की 'जीन एडिटिंग' रिपोर्ट का भी कड़ा विरोध किया।

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 19, 2026, 04:56 pm IST
inभारत, स्वदेशी, पर्यावरण, राजस्थान, काम की खबरें
Bhartiya Kisan Sangh Mount Abu Meeting CRISPR Oppose

Bhartiya Kisan Sangh Mount Abu Meeting CRISPR Oppose । भारतीय किसान संघ ने राजस्थान के माउंट आबू में दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक में चर्चा व चिंतन के बाद केंद्र सरकार से देश में दलहन, तिलहन और खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक समग्र और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। वर्तमान में देश की आजादी के 78 वर्षों के बाद भी दलहन और खाद्य तेलों के लिए विदेशों पर निर्भरता एक गंभीर चिंता का विषय है, जो सीधे देश की खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़ा हुआ है।

महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि वर्तमान में प्रचलित ‘एकल फसल पद्धति’ जैव-विविधता, भोजन की विविधता और जलवायु के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त और शोषणकारी साबित हो रही है। इसके विकल्प के रूप में मजबूत फसल विविधीकरण (अंतर्वर्ती खेती, मिश्रित खेती, फसल चक्र) और ‘गौ कृषि वाणिज्यम’ (गाय आधारित कृषि) को अपनाना अनिवार्य है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और किसानों की लागत कम हो सके। दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक में अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष, संगठन विस्तार, आगामी सदस्यता अभियान, वैश्विक कृषि व्यापार, किसान व कृषि क्षेत्र की समस्याएं, स्वर्ण जयंती वर्ष आयोजन की तैयारी आदि विषयों पर भी चर्चा की गई।

किसान संघ ने रखी प्रमुख मांगें और सुझाव —

100% खरीद की सुनिश्चितता: सरकार दलहन और तिलहन खाद्य तेल से संबंधित फसलों की 100% प्रतिशत खरीद की गारंटी दे। वर्ष 2016 में केवल दलहन की सीमित खरीद के कारण उत्पादन में भारी वृद्धि दर्ज की गई थी, जो इसका जीवंत उदाहरण है।

सीधे आर्थिक प्रोत्साहन: जीवंत मृदा, जलवायु परिवर्तन सहनशीलता और फसल विविधीकरण को अपनाने वाले किसानों के लिए सीधे आर्थिक प्रोत्साहन का प्रावधान उनके खातों में किया जाए।

पारंपरिक बीजों का संरक्षण: किसानों को हर वर्ष महंगे बीज खरीदने के कुचक्र से बचाने के लिए सामान्य प्रचलित प्रजनन विधि से विकसित उन्नत किस्मों और स्वदेशी बीजों के संवर्धन और संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए।

पशुपालन को विशेष प्रोत्साहन: छोटे और मंझोले किसानों के लिए पशुपालन को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाए। इससे देसी घी के रूप में खाद्य तेल का विकल्प मिलेगा और पशुओं के गोबर व मूत्र से प्राकृतिक व जैविक खेती को मजबूती मिलेगी।

जीन एडिटिंग (CRISPR) तकनीक का विरोध

भारतीय किसान संघ ने पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी (संसदीय स्थायी समिति) द्वारा फसल सुधार उपायों में प्रस्तावित जीन एडिटिंग (CRISPR) आधारित प्रणाली का कड़ा विरोध किया है और इसे रिपोर्ट से बाहर रखने का आग्रह किया है।

किसान संघ ने चेतावनी देते हुए कहा-

“CRISPR जैसी तकनीक से फसलों के प्राकृतिक संसाधनों में ऐसा बदलाव हो सकता है, जिसे वापस सुधारना असंभव होगा। आनुवंशिक छेड़छाड़ से पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने का खतरा है, जैसा पूर्व में पंजाब के मुक्तसर में बीटी कपास के प्रयोग के दौरान देखा जा चुका है, जिसने पूरी मंडी व्यवस्था और किसान की किसानी को अस्त-व्यस्त कर दिया था।”

किसान संघ ने कहा कि देश को किसी भी विदेशी संस्था या असुरक्षित तकनीक के अंधानुकरण के बजाय अपनी परिस्थिति तंत्र और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के अनुसार समाधान खोजने चाहिए। समय बचाने के बहाने जीन एडिटिंग द्वारा आनुवंशिक और जलवायु पारिस्थितिकी खेती के उपयोग से दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।

Topics: Bhartiya Kisan SanghMount Abu Kisan Sangh MeetingCRISPR Gene Editing IndiaFarmer Self RelianceMohini Mohan Mishracow based farmingCrop Diversification
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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