डॉग लवर्स की सभी याचिकाएं खारिज, आवारा कुत्तों पर SC के 'सुप्रीम' फैसले की 10 बड़ी बातें
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डॉग लवर्स की सभी याचिकाएं खारिज, आवारा कुत्तों पर SC के ‘सुप्रीम’ फैसले की 10 बड़ी बातें

शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि देश भर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
May 19, 2026, 02:22 pm IST
in भारत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामलों को लेकर डॉग लवर्स की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। साथ ही कोर्ट ने अपने पूर्व के सभी आदेशों को बरकरार रखा है। जिसमें खूंखार कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने, सरकारी संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और खुली जगह पर उन्हें खाना खिलाने से रोकने का आदेश शामिल है।

शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि देश भर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। अदालत इस बात को नहीं भूल सकती कि एबीसी रूल 2001 में लागू किया गया था। आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में शेल्टर होम और अन्य सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि पागल, लाइलाज बीमारी या खूंखार कुत्तों को कानूनी दायरे में मारा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार में कुत्ते के काटने से होने वाले नुकसान के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: रेबीज और गंभीर रूप से बीमार आवारा कुत्तों को मारने का निर्देश

दरअसल मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने 7 नवंबर, 2025 के अपने आदेश में बदलाव और उसे वापस लेने की सभी अर्जियों को खारिज करते हुए ये अहम फैसले सुनाए। कोर्ट ने आवारा पशुओं को लेकर भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं की वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लाइलाज बीमारी और रेबीज से पीड़ित खतरनाक आवारा कुत्तों को पशु जन्म नियंत्रण नियमों और अन्य लागू वैधानिक प्रोटोकॉल के अनुसार मारने पर विचार कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोर्ट के निर्देशों को लागू करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई एफआईआर या क्रिमिनल कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें

  1. आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण आवश्यक।
  2. कुत्तों को स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद वहां न छोड़ा जाए जहां से पकड़ा गया था।
  3. रेबीज संक्रमित कुत्ते वापस नहीं छोड़े जाएंगे उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा।
  4. खुले स्थानों, गली या सड़क पर आवारा कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जा सकता।
  5. आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए हर जगह फीडिंग जोन बनाया जाए।
  6. राज्य भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के नियमों को लागू करने के लिए उपाय करें।
  7. हर जिले में कम से कम एक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित करने के निर्देश।
  8. राज्यों में रेबीज रोधी टीकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश।
  9. रेबीज और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त कुत्तों को मारा जा सकता है।
  10. शैक्षणिक संस्थानों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों, अस्पतालों आदि जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश।
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Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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