खाड़ी युद्ध के बीच अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ईरान के खिलाफ युद्ध में उतर चुका है। इसी क्रम में यूएई ने आरोप लगाया है कि उनके बाराकाह परमाणु पावर प्लांट के पास जो आग लगी, वो ईरान या उसके किसी सहयोगी गुट द्वारा लॉन्च किए गए ड्रोन से हुई। अमीरात ने इसे “खतरनाक” बताया है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब ईरान के साथ युद्धविराम के छठे हफ्ते चल रहे हैं और शांति बातचीत अटकी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
मामला कुछ यूं है कि बाराकाह प्लांट अबू धाबी के पश्चिमी अल धाफरा इलाके में है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, तीन ड्रोन देश की पश्चिमी सीमा की तरफ से आए। उनमें से एक ने प्लांट के अंदरूनी घेरे के बाहर बिजली जनरेटर को निशाना बनाया और आग लग गई। प्लांट के न्यूक्लियर रेगुलेटर ने साफ कहा कि किसी को चोट नहीं आई, कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ और आम लोगों को कोई खतरा नहीं है। आग प्लांट के मुख्य हिस्से से बाहर लगी थी। जांच चल रही है कि हमला कहां से हुआ, इसके बारे में आगे जानकारी दी जाएगी।
UAE का रुख
UAE के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गाश ने साफ कहा कि यह हमला चाहे सीधे ईरान ने किया हो या उसके किसी एजेंट ने, यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। उन्होंने इसे आतंकवादी कार्रवाई बताया और कहा कि इसमें आम लोगों की जान की परवाह नहीं की गई। विदेश मंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन जायद अल नाहयान ने इलाके के दूसरे देशों से बात की, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल है।
सऊदी अरब ने इस हमले की निंदा की। मंत्री ने IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी को भी पूरी डिटेल बताई और कहा कि ऐसे हमलों का जवाब देने का पूरा अधिकार उनके देश को है। IAEA ने भी चिंता जताई। राफेल ग्रॉसी ने कहा कि न्यूक्लियर सेफ्टी को खतरे में डालने वाली कोई भी सैन्य गतिविधि स्वीकार्य नहीं है।
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मौजूदा माहौल
यह घटना ईरान युद्ध के युद्धविराम के दौरान हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान को जल्दी फैसला लेना चाहिए, वरना कुछ बचेगा नहीं। ट्रंप ने अपने सलाहकारों से मुलाकात की और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से भी बात की।
UAE ने पहले भी ईरान के तेल सुविधाओं पर हमलों का जवाब दिया था। इस युद्ध के दौरान UAE ने इजरायल के साथ अपने संबंध और मजबूत किए हैं और खाड़ी देशों में ईरान के खिलाफ सबसे सख्त रुख रखने वाले देशों में शामिल रहा है। बाराकाह प्लांट UAE की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। यह साफ ऊर्जा का जरिया माना जाता है। इस हमले से इलाके में तनाव और बढ़ गया है, हालांकि अभी तक किसी ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।












