Falata Assembly Bypoll Mamata Banerjee Suvendu Adhikari । क्या भवानीपुर में मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी का बचा-खुचा राजनीतिक किला भी ढहने वाला है? 2024 के लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड 89 प्रतिशत वोट बटोरने वाली और विधानसभा चुनाव 2026 मे भाजपा को मिले अपार जनमत के बाद उपचुनाव में फल्टा सीट अब बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा कुरुक्षेत्र बन चुकी है..
टीएमसी के 89% वोट बैंक की जमीनी हकीकत
फल्टा विधानसभा सीट का चुनाव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए नाक की लड़ाई हो गई है। सुवेंदु अधिकारी इस सीट पर जीत दर्ज करके ममता बनर्जी को आखिरी चोट देने का प्रयास करेंगे, वहीं ममता बनर्जी इस सीट को जीतकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने का प्रयास करेंगी। 2024 के लोकसभा के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस पार्टी को प्रतिशत में सबसे अधिक मत इसी सीट पर 89 प्रतिशत से अधिक मिला था। वहीं कुल मतों के हिसाब से कैनिंग पूरब सीट के बाद दूसरे नंबर पर इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी को मत मिला था।
फल्टा विधानसभा सीट पर चुनावी आंकड़े
| पार्टी | 2014 | 2016 | 2019 | 2021 | 2024 |
|---|---|---|---|---|---|
| तृणमूल कांग्रेस | 41.26 | 50.15 | 59.02 | 56.35 | 89.35 |
| भाजपा | 17.17 | 8.38 | 36.49 | 36.75 | 7.43 |
| माकपा | 36.3 | 37.62 | 2.81 | 1.13 | |
| % मतदान | 83.56 | 88.62 | 86.04 | 87.82 | 83.79 |
| कुल मतदाता | 205063 | 212340 | 225867 | 236768 | 245284 |
भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की रणनीति: कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने और बचाने की जंग
भाजपा इस सीट पर चुनाव जीतकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी के पूरे राज्य के कार्यकर्ताओं का मनोबल और भी तोड़ना चाहेगी। वहीं तृणमूल कांग्रेस पार्टी के पूरे राज्य के कार्यकर्ताओं पर इसका गहरा असर देखने को मिलेगा और वे पार्टी के साथ अपने संबंध को बनाए रखने पर पुनर्विचार कर सकते हैं। वहीं भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज करके राज्य के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा करने के साथ ही अपनी जीत को और भी बड़ा आकार देने का प्रयास करेगी।
तृणमूल कांग्रेस की अंतिम उम्मीद
2026 के विधानसभा के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस अपने सभी मजबूत स्तंभों को खो चुकी है, मगर इस सीट पर जीत प्राप्त करके अपनी आखिरी उम्मीद को बचाए रखना चाहेगी। तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए इस सीट का महत्व सांकेतिक ही है।
संभावित राजनीतिक टूट और असर
मीडिया के सूत्रों के अनुसार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की तरह तृणमूल कांग्रेस पार्टी में भी टूट की संभावना दिख रही है। अगर तृणमूल कांग्रेस पार्टी यह सीट हार जाती है, तो इसकी आशंका और भी बलवती हो जाएगी।
अन्य दलों की भूमिका और मतदाताओं का रुझान
इस सीट पर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के अलावा कांग्रेस पार्टी और माकपा का भी उम्मीदवार है। मगर 2026 के विधानसभा के चुनाव परिणाम के बाद अब इस सीट पर केवल तृणमूल कांग्रेस पार्टी और भाजपा के बीच ही चुनाव होगा। विधानसभा चुनाव के बाद माकपा और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिस प्रकार तृणमूल कांग्रेस पार्टी की हार और भाजपा की जीत का खुलकर या परोक्ष रूप से जश्न मनाया है, उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इन दोनों दलों के मतदाता भी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के खिलाफ भाजपा के पक्ष में ही मतदान करेंगे।
ममता बनर्जी की व्यक्तिगत राजनीतिक स्थिति
ममता बनर्जी व्यक्तिगत तौर पर भी भबानीपुर सीट से चुनाव हारने के कारण काफी दुखी और क्षुब्ध हैं। 2021 में उनकी नंदीग्राम की हार को राज्य में पार्टी की बड़ी जीत ने मरहम लगा दिया था, मगर इस बार वे अपनी सीट के साथ उनकी पार्टी का विधानसभा चुनाव में बुरी पराजय भी उन्हें मानसिक तौर पर काफी आघात पहुँचा रही है। मगर अभी तक के उनके व्यवहार से यही लगता है कि वे इस सीट पर भी अपनी पार्टी की हार ही मानकर चल रही हैं।















