ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी भी अरविन्द केजरीवाल के आम आदमी पार्टी के नक़्शे क़दम पर बढ़ रही है। अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी की राजनीति काफी मिलती जुलती है। दोनों अपने अपने प्रदेशों में लगातार तीन बार चुनाव हारे हैं। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने अपनी अपनी सीट पर भी चुनाव में मात खाया है। अरविन्द केजरीवाल ने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को चुनाव हराकर मुख्यमंत्री बनाने में सफल हुए थे। वहीं 2026 में ममता बनर्जी को चुनाव हराकर सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनने में सफल हुए है।
ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टियों को तानाशाही रवैये से चलाया है। ऐसे नेताओं के पास जब तक सत्ता होती है, तब तक ये नेता तानाशाही से पार्टी चलाते हैं, मगर इनके हाथ से सत्ता जाते ही इनकी पार्टियों के नेताओं में भगगड़ मच जाती है और नेतागण अन्य पार्टियों की तरफ रुख करने करने लगते हैं।
AAP के 7 सांसदों ने छोड़ा उसका साथ
केजरीवाल की पार्टी के दिल्ली चुनाव में हारने के साथ ही उनके पार्टी के सात राज्यसभा के सांसद पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए है। दिल्ली में भी आप के कई विधायक पार्टी छोड़ने की ओर अग्रसर हैं। पंजाब में भी 2027 के विधानसभा से पूर्व बड़ी संख्या में पार्टी के विधायक अन्य दलों भाजपा, कांग्रेस या शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो सकते हैं।
इसे भी पढ़ें: मध्य प्रदेश: रतलाम के पास राजधानी एक्सप्रेस के AC कोच में लगी आग, कोई हताहत नहीं
TMC में भी मचने वाली है भगदड़
ऐसी ही स्थिति ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस की भी होती दिख रही है। पार्टी के विधायकों की संख्या लगभग एक तिहाई ही बची है और यहाँ तक कि ममता बनर्जी लगातार दो बार विधानसभा का चुनाव हार चुकी हैं। अतएव अब पार्टी के विधायकों को अब ममता बनर्जी के नेतृत्व में थोड़ा भी विश्वास शेष नहीं बचा है। इस कारण बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के विधायक पाला बदलने के लिए अपनी भूमिका तलाश रहे हैं। इसका आभास ममता बनर्जी को भी है और उन्होंने लोकसभा में अपने संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से डॉ काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर फिर से यह जिम्मेदारी कल्याण बनर्जी को सौंपी है। कल्याण बनर्जी को कोई भी अन्य दल अपने में शामिल नहीं कर सकता है, क्योंकि उन पर कई नैतिक, राजनीतिक भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
ममता ने अपने हारे हुए लोगों को पार्टी छोड़ने की दी स्वतंत्रता
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर अपनी पार्टी के हारे हुए प्रत्याशियों की बैठक बुलाकर स्पष्ट तौर पर कहा है कि उनमें से जो भी पार्टी छोड़ना चाहते हैं वो स्वंतंत्र है। ममता बनर्जी को इसका भान है कि बड़े पैमाने पर उनकी पार्टी के विधायक और सांसदों के साथ ही नेतागण पार्टी छोड़ सकते हैं। अतएव अपनी बदनामी से बचने और इस घटना के बाद पार्टी के शेष बचे नेताओं को हिम्मत बढ़ाने के लिए ममता बनर्जी ने ऐसा वक्तव्य जारी किया है। ममता बनर्जी ने इस तरह का वक्तव्य देकर अभिषेक बनर्जी के पार्टी ने तानाशाही वाले रवैये पर पर्दा डालने का प्रयास किया है।

















