वेलकम कलेक्शन लंदन जैन पांडुलिपियां वापस करेगा: 2000+ दुर्लभ ग्रंथ जैन समुदाय को सौंपे जाएंगे
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वेलकम कलेक्शन लंदन जैन पांडुलिपियां वापस करेगा: 2000+ दुर्लभ ग्रंथ जैन समुदाय को सौंपे जाएंगे

लंदन के वेलकम कलेक्शन ने 2000 से अधिक दुर्लभ जैन पांडुलिपियां वापस करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। 15वीं से 19वीं सदी की कल्पसूत्र, वैद्यमनोत्सव और गांधी से जुड़े नैतिक दस्तावेज सहित समृद्ध संग्रह अब जैन समुदाय को लौटाया जाएगा।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
May 16, 2026, 09:36 am IST
inभारत
Londons welcome musium Jain pandulipi

प्रतीकात्मक तस्वीर

ब्रिटेन के लंदन स्थित वेलकम कलेक्शन म्यूजियम ने बड़ा फैसला करते हुए फैसला किया है कि वो जैन समुदाय को 2,000 से ज्यादा पांडुलिपियां वापस कर देगा। ये दक्षिण एशिया के बाहर जैन पांडुलिपियों का सबसे बड़ा संग्रह माना जाता है। ये पांडुलिपियां 15वीं सदी से लेकर 19वीं सदी तक की हैं। म्यूजियम ने इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी के साथ बातचीत और सहयोग के बाद ये कदम उठाया है।

क्या है इन पांडुलिपियों की खासियतें

ये संग्रह बहुत समृद्ध है। इसमें धर्म, साहित्य, चिकित्सा और संस्कृति से जुड़े ग्रंथ शामिल हैं। भाषाएं प्राकृत, संस्कृत, गुजराती, राजस्थानी और शुरुआती हिंदी में हैं। इन खास पांडुलिपियों में 16वीं सदी की शुरुआत की रंगीन कल्पसूत्र की एक दुर्लभ प्रति। 1688 की एक पतली और नाजुक पांडुलिपि, जो शायद नैनसुख की वैद्यमनोत्सव (1592) की सबसे पुरानी बची हुई प्रति है। ये शुरुआती हिंदी में पहला चिकित्सा ग्रंथ माना जाता है।

एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नैतिक सिद्धांतों का शुरुआती उदाहरण है। महात्मा गांधी ने इसी तरह के सिद्धांतों को अपनाया और प्रसिद्ध किया। ये दस्तावेज़ ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नींव पर सवाल उठाता है।

इसे भी पढ़ें: भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद CM मोहन यादव बोले- लंदन से वापस लाएंगे मां वाग्देवी की प्रतिमा 

कैसे आई ये पांडुलिपियां म्यूजियम में

म्यूजियम के अनुसार, आधे से ज्यादा सामग्री औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश उद्यमी सर हेनरी वेलकम के लिए खरीदी गई थी। ये पंजाब के एक जैन मंदिर से ली गईं, जो अब मौजूद नहीं है। उन्हें कम कीमत पर खरीदा गया था, जो मूल मालिकों के हित में नहीं था।

क्या है वापसी की योजना

एक समझौते के तहत ये संग्रह पहले यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के धर्मनाथ नेटवर्क इन जैन स्टडीज में जाएगा। वहां इसे शोधकर्ताओं और जैन समुदाय के लोगों के लिए खोला जाएगा, ताकि वे इन्हें पढ़ सकें, समझ सकें और अनुवाद कर सकें। इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी के मैनेजिंग ट्रस्टी मेहुल संघराजका ने कहा कि ये कदम जैन विद्वता को नई दिशा देगा और समुदाय को अपनी सांस्कृतिक विरासत तक पहुंच मिलेगी। उन्होंने म्यूजियम का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने इन ग्रंथों की अच्छी देखभाल की।

डैनियल मार्टिन, वेलकम कलेक्शन के एसोसिएट डायरेक्टर ने कहा कि इस सहयोग से दोनों पक्षों के बीच मजबूत रिश्ता बना है। उन्होंने इसे नैतिक तरीके से विरासत संभालने का अच्छा उदाहरण बताया।

कैटलॉगिंग और आगे का काम

2000 के शुरुआती सालों में डॉ. कन्हैयालाल विरजी शेठ और डॉ. कल्पना शेठ ने इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी की मदद से इन पांडुलिपियों का कैटलॉग तैयार किया था। समझौते के तहत ये नोट्स म्यूजियम की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम की डॉ. मैरी-हेलेन गोरिस ने कहा कि सब मिलकर काम करेंगे ताकि ये पांडुलिपियां छात्रों, शोधकर्ताओं और आम लोगों तक ज्यादा से ज्यादा पहुंच सकें।

Topics: वेलकम कलेक्शन जैन पांडुलिपियांजैन पांडुलिपियां वापसीजैन पांडुलिपि
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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