खाड़ी संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता दिख रहा है। इन हालातों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुधारों को नई रफ्तार देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसका मकसद अनुपालन बोझ कम करना, नियमों को आसान बनाना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और अधिक आसाना बनाना है। ताकि संकट के इस वक्त में आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाया जा सके।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मई को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। इसमें करीब दर्जन भर विभागों के सचिव प्रस्तुतियां देंगे। इन विभागों में DPIIT, कृषि, वाणिज्य, स्वास्थ्य, पावर, पर्यावरण और वन, श्रम, सड़क परिवहन और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।
सुधारों पर फोकस
बैठक में तीसरे कार्यकाल में मोदी सरकार की विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए गए लोगों-केंद्रित सुधारों पर चर्चा होगी। ये सुधार कानूनों, नीतियों, नोटिफिकेशन्स, नियमों और रेगुलेशन्स में किए गए हैं। अधिकारी बताते हैं कि सरलीकरण और अविनियमन इस बैठक का मुख्य विषय रहेगा। आखिरी बार मंत्रिमंडल की बैठक 4 जून 2025 को हुई थी। उस समय पीएम ने कहा था कि सरकार “सुधारों” पर चल रही है। उन्होंने विभागों को इस दिशा में तेजी से काम करने को कहा था। बजट में भी इसकी झलक दिखी थी। लेकिन पश्चिम एशिया का युद्ध शुरू होने के बाद कई मंत्रालय संकट से निपटने में जुट गए।
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पिछले दो साल के सुधारों की समीक्षा
जानकारों के मुताबिक, प्रस्तुतियों का उद्देश्य मंत्रिमंडल को पिछले दो साल में किए गए सुधारों से अवगत कराना और आगे का रास्ता तय करना है। NITI आयोग के सदस्य राजीव गौबा की अगुवाई वाली दो उच्च स्तरीय समितियों द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
इससे पहले हर मंत्रालय ने जून 2024 से अपने द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों, उनके फायदों और असर की जानकारी जमा की थी। इसका मकसद सरकार के सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाना था।
संकट के बीच सुधारों की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट से चुनौतियों का सामना करते हुए सुधारों को भी जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कोविड के समय सरकार ने जरूरी सुधार किए थे, वैसे ही इस मौके को भी नहीं गंवाना चाहिए। सरकार का मानना है कि नियम आसान करने और अनावश्यक बोझ हटाने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, भले ही वैश्विक स्तर पर तनाव हो। बैठक में इसी दिशा में ठोस चर्चा होने की उम्मीद है।

















