बंगाल में अब नहीं चलेगा खुलेआम पशु वध! सुवेंदु सरकार का बड़ा एक्शन
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बंगाल में अब नहीं चलेगा खुलेआम पशु वध! सुवेंदु सरकार का बड़ा एक्शन, गौहत्या और अवैध कटान पर सख्त कानून लागू

राज्य सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन में कहा गया है कि यह कदम कलकत्ता हाई कोर्ट के 2018 के आदेश और 2022 में जारी प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Mahak Singh
May 14, 2026, 02:19 pm IST
inभारत
Suvendu Adhikari

सुवेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल

लंबे समय से खुलेआम पशु वध, अवैध बूचड़खानों और कथित पशु तस्करी को लेकर सवालों में घिरे बंगाल में अब सुवेंदु अधिकारी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कलकत्ता हाई कोर्ट के पुराने आदेशों को आधार बनाते हुए राज्य सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ को सख्ती से लागू करने की घोषणा कर दी है। नई अधिसूचना के बाद अब बिना सरकारी अनुमति पशु वध, सार्वजनिक स्थानों पर कटान और अवैध बूचड़खानों का संचालन सीधे कानून के शिकंजे में आएगा। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब बंगाल में “जो चलता आया है” वाली व्यवस्था नहीं चलेगी। नियम तोड़ने वालों को जेल और जुर्माना दोनों झेलने पड़ सकते हैं।

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद हरकत में आई सरकार

राज्य सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन में कहा गया है कि यह कदम कलकत्ता हाई कोर्ट के 2018 के आदेश और 2022 में जारी प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। सरकार का मानना है कि वर्षों से कानून तो मौजूद था, लेकिन उसका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था। इसी लापरवाही के कारण कई इलाकों में खुले में पशु वध, अवैध बूचड़खाने और बिना अनुमति पशु व्यापार तेजी से बढ़ा। अब नई सरकार ने प्रशासन और पुलिस को साफ निर्देश दिए हैं कि अवैध कटान और पशु तस्करी के खिलाफ अभियान चलाया जाए।

बिना फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होगा वध

नई अधिसूचना के तहत अब किसी भी गाय, बैल, सांड, बछड़े, भैंस या भैंस के बछड़े का वध बिना आधिकारिक अनुमति नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए दो स्तर पर प्रमाणन जरूरी होगा। नगर पालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति के सभापति के साथ सरकारी पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करेंगे। यह अनुमति केवल उन्हीं पशुओं के लिए दी जाएगी जोकि 14 वर्ष से अधिक उम्र के हों, जो काम करने या प्रजनन के योग्य न हों, जो गंभीर बीमारी या स्थायी विकलांगता का शिकार हों। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को अपनी राय लिखित रूप में दर्ज करनी होगी ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित

नई गाइडलाइन के तहत अब सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में किसी भी प्रकार का पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार का कहना है कि इससे न केवल कानून व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि सार्वजनिक स्वच्छता और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। अब केवल उन्हीं बूचड़खानों में वध की अनुमति होगी जिन्हें प्रशासन या नगर पालिका ने अधिकृत किया हो।

निरीक्षण में बाधा डालना भी अपराध

सरकार ने अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को बूचड़खानों के निरीक्षण का अधिकार दिया है। यदि कोई व्यक्ति निरीक्षण में बाधा डालता है या जानकारी छिपाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नियम तोड़े तो जेल तय

नई अधिसूचना में दंडात्मक प्रावधानों को भी सख्ती से लागू करने की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को अधिकतम 6 महीने की जेल, 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा एक साथ भुगतनी पड़ सकती है। सरकार का कहना है कि अब केवल लाइसेंस प्राप्त पशु व्यापारियों और अधिकृत बूचड़खानों को ही संचालन की अनुमति दी जाएगी।भाजपा नेताओं का दावा है कि यह कदम पशु संरक्षण, कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी था।

भाजपा बोली-  “अब कानून का राज चलेगा”

भाजपा सरकार इस फैसले को “बंगाल में व्यवस्था सुधार” का बड़ा कदम बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पिछले कई वर्षों से खुले में पशु वध और अवैध बूचड़खानों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही थी। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद न केवल अवैध कटान पर रोक लगेगी, बल्कि शहरों और कस्बों में स्वच्छता और कानून व्यवस्था भी बेहतर होगी। दूसरी ओर विपक्षी दल इसे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल से जोड़ रहे हैं। वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह फैसला किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून लागू करने और पशु क्रूरता रोकने के लिए है।

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