हरियाणा नगर निगम चुनावों में राज्य की जनता ने एक बार फिर से भाजपा पर अपना भरोसा जताया है। यह भाजपा के विकास उन्मुख कार्यो, अच्छे प्रशासन पर जनता की एक बार फिर से मुहर लगी है। भाजपा ने सभी तीनों नगर निगमों पंचकूला, अंबाला और सोनीपत में मेयर के चुनाव में शानदार जीत हासिल की है।
वहीं रेवाड़ी नगर परिषद के अध्यक्ष के पद पर भी भाजपा ने जीत दर्ज़ की है। जबकि तीन नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में दो पर भाजपा ने जीत हासिल की है। कुल 110 वार्डों में भाजपा ने 68 वार्डों में जीत हासिल की है। वहीं भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी महज 10 सीट ही जीत सकी है।
हरियाणा स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन

कांग्रेस की मंशा पर फिरा पानी
कांग्रेस पार्टी जिसने 2024 में लोकसभा में पांच सीट और विधानसभा में 37 सीट जीतकर पार्टी के लिए अच्छी उम्मीद जगाई थी उसकी सारी संभावना धराशायी हो गई है। पार्टी 2024 के राज्य विधानसभा के चुनाव में अपने लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बल पर बहुत ही अधिक उम्मीद जगाई थी।
भाजपा 2014 के लोकसभा के चुनाव के समय से ही राज्य में अपनी मजबूती को पूर्ववत बरकरार रखे हुए है। भाजपा 2014 से पूर्व राज्य में दोयम और छोटे दर्ज़े की पार्टी हुआ करती थी। मगर 2014 के लोकसभा चुनाव और 2014 के ही विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अपनी स्थिति ना सिर्फ मजबूत किया, बल्कि उसको अभी भी बनाए हुए है। 2009 में महज 4 सीट जीतने वाली भाजपा 2014 में 47 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाने में सफल हुई थी। भाजपा वर्तमान में लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता में काबिज है। 2019 में भाजपा 40 सीटों जीतकर स्पष्ट बहुमत से दूर हो गई थी, मगर 2024 में फिर से 47 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत के साथ बनाने में सफल रही है।
दो खेमों में बंटी कांग्रेस
वहीं कांग्रेस पार्टी राज्य में भूपेंदर सिंह हूडा और कुमारी शैलजा के खेमो में विभाजित है। हरियाणा में इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में 99 सीट जीतकर विपक्ष के नेता की हैसियत अवश्य प्राप्त कर ली है, उसके बाद राज्य दर राज्य पार्टी का जनाधार समाप्त होता जा रहा है। महाराष्ट्र, केंद्र शाषित प्रदेश जम्मू कश्मीर, बिहार, हरियाणा, असम सहित अन्य राज्यों के विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने अपना जनाधार खोया है। पार्टी के विधायक और सांसद पार्टी का दामन छोड़ रहे है। असम के नौगांव लोकसभा सीट से लगातार दो बार से निर्वाचित प्रद्युत बोरदोलोई ने हाल में ही पार्टी छोड़ दिया है। ऐसा ही हाल बिहार में भी है, जहां कई विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है।

















