भारत का इतिहास अनेक वीरों से भरा हुआ है, जिन्होंने देश की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दिशा को आकार दिया। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर विश्व इतिहास से जुड़े प्रमुख प्रसंगों तक, हर घटना अपने समय की परिस्थितियों और संघर्षों की कहानी बताती है। इनमें कई ऐसी ऐतिहासिक घटनाएँ हैं जिन्होंने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया पर गहरा प्रभाव डाला।
1657 – संभाजी महाराज का जन्म- छत्रपति शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र व उत्तराधिकारी।
संभाजी महाराज का जन्म 14 मई 1657 को हुआ था। वे मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र थे। संभाजी बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि, साहसी और युद्धकला में निपुण थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने मुगलों के खिलाफ मराठा स्वराज्य की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण लड़ाइयाँ लड़ीं। संभाजी महाराज का शासनकाल संघर्षों से भरा रहा और उन्होंने औरंगज़ेब जैसे आक्रांताओं का डटकर सामना किया।
1710 – वीर बंदा बहादुर सिंह ने सरहिंद को जीता।
भारत भूमि के वीर योद्धाओं ने अत्याचारी और क्रूर मुगलों से डटकर मुकाबला किया। इन्हीं वीर योद्धाओं में से एक थे बंदा वीर वैरागी। उन्होंने मुगलों के अजेय होने का भ्रम तोड़ा। साहिबज़ादों के बलिदान का बदला लिया और गुरु गोबिंद सिंह द्वारा संकल्पित प्रभुसत्ता सम्पन्न लोक राज्य की राजधानी के रूप में लोहगढ़ में स्वराज की नींव रखी। यही नहीं, गुरु नानक देव और गुरु गोबिंद सिंह के नाम से सिक्का और मोहरें जारी करके निम्न वर्ग के लोगों को उच्च पद दिलाया और हल वाहक किसान-मज़दूरों को ज़मीन का मालिक बनाया।
इस वीर योद्धा का जन्म जम्मू-कश्मीर के राजौरी के गाँव तच्छल किला में एक हिंदू गरीब परिवार में किसान राम देव के घर में 27 अक्टूबर 1670 को हुआ था। इनका बचपन का नाम लक्ष्मणदास था। यह बचपन से ही बहुत बहादुर थे। युवावस्था में शिकार खेलते समय एक गर्भवती हिरणी पर तीर चलाने से उससे उसके पेट से एक शिशु निकला और तड़पकर वहीं मर गया। यह देखकर इनका मन विचलित हो गया और वैराग ले लिया और माधो दास बैरागी के नाम से प्रसिद्ध हुए। तप के बाद इन्होंने गोदावरी नदी के तट पर नांदेड़ में एक मठ की स्थापना की। यहीं पर 1708 में दशम पातशाही गुरु गोबिंद सिंह जी ने इनसे मुलाकात कर अत्याचारी और क्रूर मुगलों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। इस समय उनके चारों पुत्र बलिदान हो चुके थे। उन्होंने माधो दास से वैराग्य छोड़कर देश में व्याप्त इस्लामिक आतंक से जूझने और उसके अंत के लिए कमर कसने को कहा। गुरुजी ने उन्हें बंदा बहादुर नाम दिया। फिर पाँच तीर, एक निशान साहिब, एक नगाड़ा और एक हुक्मनामा देकर दोनों छोटे पुत्रों को दीवार में चिनवाने वाले सरहिन्द के नवाब से बदला लेने को कहा।
1732 – बड़ौदा के महाराज पिलाजीराव गायकवाड़ का निधन।
1879 – 463 भारतीय मजदूरों का पहला दल फिजी पहुंचा।
1934 – गया (बिहार), क्रांतिवीर बैकुंठ शुक्ल को फांसी।
1954 – राज्य सरकार की सहमति से जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान लागू।
1960 – एयर इंडिया की मुंबई से न्यू यॉर्क तक पहली उड़ान।
1963 – कानपुर, भाषाशास्त्री व भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष डॉ. रघुवीर का देहांत।
ये हिंदी भाषा के अध्ययन और विकास के लिए लंबे समय तक कार्यरत रहे। डॉ. रघुवीर को भारतीय भाषाविज्ञान और संस्कृत आधारित हिंदी शब्दावली के निर्माण में उनके योगदान के लिए जाना जाता है।
1948 – इजराइल देश का जन्म।
1948 में इज़राइल देश का जन्म हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहूदी समुदाय के लंबे समय से चले आ रहे “राष्ट्रीय गृहभूमि” के आंदोलन के परिणामस्वरूप 14 मई 1948 को इज़राइल ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। इसके बाद तुरंत ही अरब देशों और इज़राइल के बीच संघर्ष शुरू हो गया, जिसे प्रथम अरब-इज़राइल युद्ध कहा जाता है। इस घटना ने पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया और आज तक इसका प्रभाव क्षेत्रीय राजनीति में देखा जाता है।

















