तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी ने टूट के डर के कारण अपने पुराने सहयोगी द्रमुक से पुराना गठबंधन तोड़ते हुए जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम को तुरंत ही अपना समर्थन दे दिया। कांग्रेस राज्य दर राज्य अपने विधायकों को खोती जा रही है। क्या तमिलनाडु में कांग्रेस ने मेघालय वाली घटना दोहराने के डर से पहले ही टीवीके को अपना समर्थन दिया है?
पांच प्रदेशों में एक भी विधायक नहीं
कांग्रेस का वर्तमान में पांच प्रदेशों में कोई भी विधायक नहीं है। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ऐसे प्रदेशों की संख्या छह थी। मेघालय में भी कांग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु के 2026 के विधानसभा चुनाव की तरह पांच सीट जीतने में सफल हुई थी। मगर मेघालय में एक विधायक के सांसद बनने और शेष चार विधायकों के सत्तारूढ़ दल नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल होने के कारण शून्य पर आ गई।
मेघालय वाला डर
कांग्रेस को भय था कि तमिलनाडु के विधायक भी मेघालय की तरह पाला बदलकर टीवीके में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस के तमिलनाडु में पिछले विधानसभा चुनाव में 18 विधायकों से घटकर इस बार महज पांच विधायक ही जीत सके हैं। पार्टी के खोते जनाधार के मद्देनज़र पांच विधायक पाला बदलकर टीवीके में शामिल हो सकते थे। इसकी भनक कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व को थी, इस कारण कांग्रेस ने बिना समय गंवाए और विधायकों को पाला बदलने का मौका देने से पूर्व ही टीवीके को समर्थन जारी कर दिया। ना सिर्फ मेघालय में बल्कि गोवा में 15 सितम्बर 2022 को कांग्रेस के आठ विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ग्यारह विधायक निर्वाचित हुए थे।
12 प्रदेशों से लोकसभा में भी प्रतिनिधित्व नहीं
वर्तमान में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, नागालैंड, सिक्किम और मेघालय में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। इसके अलावा ग्यारह प्रदेशों में इकाई संख्या में विधायक हैं। दो राज्यों के विधान परिषदों आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं है। उसका वर्तमान में 12 प्रदेशों से लोकसभा में भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
















