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अग्रसर होतीं नारियां: इतिहास से वर्तमान तक नारी शक्ति की गौरवगाथा

समय का जब जन्म हुआ, दिन-रात के पगों से, वेग पकड़कर चलता रहा। अतीत से वर्तमान तक कई भारतीय स्त्रियों की चर्चा करें तो...वो स्त्रियां जिनके कोमल मन पर दृढ़ विश्वास का संकल्प था।

Written byइली मिश्राइली मिश्रा — edited by Mahak Singh
May 10, 2026, 06:25 pm IST
in भारत
Women power in Indian history

Women power in Indian history

समय का जब जन्म हुआ, दिन-रात के पगों से, वेग पकड़कर चलता रहा। अतीत से वर्तमान तक कई भारतीय स्त्रियों की चर्चा करें तो…वो स्त्रियां जिनके कोमल मन पर दृढ़ विश्वास का संकल्प था। वह स्त्रियां जिन्होंने भारत में अग्रिम भूमिका निभाई तो सर्वप्रथम नाम आता है, जो सशक्त और ज्ञान से भी समृद्धि थी, वो थीं भारत की पहली महिला शासक नागवंशीय कन्या नागनिका। जिनका शासन प्रथम सदी ईसा से पूर्व में था। महाराष्ट्र में मिले चांदी के सिक्कों के ठीक बीचों-बीच रानी नागनिका का नाम लिखा है। इसकी लिपि ब्राह्मी और भाषा प्राकृत है। समय के साथ चलने का प्रण लिया और इतिहास के पन्नों पर अपने पदचिह्न छोड़तीं गईं थीं। नागनिका अंगीय कुल की पुत्री थीं और अंगीय कुल मूलतः नागवंशीय था।

भारत की वीरांगनाएँ

महारठी उपाधि धारक अंगीयकुल की बेटी नाग कन्या का विवाह सातवाहन वंश के सिरी सातकरणि से हुआ। सिरी सातकरणि की मृत्यु के बाद नागनिका ने सातवाहन साम्राज्य का शासक संचालन किया और इस प्रकार उन्हें भारत की पहली महिला शासक होने का श्रेय मिला। 16वीं शताब्दी की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी… रानी अबक्का चौका कर्नाटक के उल्लास की जैन वीर रानी थी, जिन्होंने पुर्तगालियों को चार दशकों तक परास्त किया। वह अपनी निडरता के कारण “अभया रानी” के रूप में प्रसिद्ध थीं और अपनी प्रजा के बीच बेहद लोकप्रिय। कर्नाटक में हर वर्ष उनकी याद में “वीर रानी अबक्का उत्सव”मनाया जाता है और साहसी महिलाओं को “अबक्का महादेवी पुरस्कार” से सम्मानित किया जाता है।

लोकमाता अहिल्याबाई: नारी शक्ति और जनकल्याण की प्रतीक

देवी अहिल्याबाई होल्कर जिन्हें उनकी न्यायप्रियता, धर्मपरायणता और कुशल प्रशासन के लिए “लोकमाता” के रूप में जाना जाता है।1767 से 1795 तक शासन करते हुए उन्होंने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनरुद्धार कराया और देशभर में जनकल्याणकारी कार्य किए। परिवर्तन भी समय के साथ हो लिया। समाज से दर्शायी गई स्त्रियां चेतना के प्रवाह में अग्रसर होती गईं। एक गाड़ी के दो पहियों की तरह दुनिया की हिस्सेदारी में अपनी सक्षमता दिखाई। यह कोई तिलिस्म नहीं रहा। ये तो अतीत की कथा थी।

समाज में स्त्री-पुरुष सहयोग और समता का स्वरूप

शताब्दियां की शताब्दियां आती-जाती रहीं, समरसता भी बढ़ती गई। स्मृतिकार, शास्त्रकार ने जीवन की समता पर ध्यान दिया। नवीन परिस्थितियों में भी नवीन कठिनाइयां भी रहीं हैं। समाज में पूर्ण स्वतंत्र तो कोई नहीं हो सकता क्योंकि अवस्था या भाव सामाजिक सम्बन्ध का मूल है। प्रत्येक व्यक्ति उसी मात्रा में एक दूसरे पर निर्भर है। सारी राजनीतिक,सामाजिक तथा अन्य व्यवस्थाओं की रूपरेखा शक्ति द्वारा ही निर्धारित होती रही। स्त्रियां किसी भी क्षेत्र में कुशल थीं। यदि पुरुष उदार नहीं होते प्रत्येक कार्य को संकीर्ण और संदिग्ध दृष्टि से देखा गया होता तो ऐसी स्थिति में स्त्री जीवन असह्य और विषम हो जाता। पुरुष की सहायता के बिना जीवन पथ,आगे नहीं बढ़ पाता।

शिक्षा, साहित्य और नारी जागरण की प्रेरणाएँ

महाराष्ट्र की महिला जो इस देश की पहली महिला शिक्षिका बनीं…वो थीं सावित्रीबाई फुले। उन्होंने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर पुणे में लड़कियों के लिए भारत का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। वह न केवल एक शिक्षिका थीं,बल्कि एक कवयित्री और समाज सुधारक भी थीं।उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, सामाजिक सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उन्हें भारतीय नारीवादी आंदोलन की अग्रणी और आधुनिक “शिक्षा की माता” के रूप में याद किया जाता है। महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य में,चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती रही हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में एक होने के कारण उन्हें आधुनिक “मीरा” के नाम से भी जाना जाता है। कवि निराला ने उन्हें “हिन्दी के विशाल मंदिर की सरस्वती”भी कहा है। सुभद्रा कुमारी चौहान भी हिन्दी की प्रसिद्ध कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी थी जिन्हें मुख्य रूप से उनकी ओजस्वी कविता “झांसी की रानी” के लिए जाना जाता है।

विभिन्न क्षेत्रों में नारी की अद्भुत उपलब्धियाँ और योगदान

स्त्री बिना विश्राम किये, असीमता नाप लेने की शक्ति रखती है, इसके कई उदाहरण हैं। फिल्म जगत, खेल जगत, गायिका, कवयित्री, वैज्ञानिक, राजनीति हर क्षेत्र में स्त्री कार्यरत हैं। वह किसी भी तपस्या और साधना से पीछे नहीं रहतीं। अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना चावला नासा में अंतरिक्ष यात्री एयरोनॉटिकल इंजीनियर थीं। लता मंगेशकर भारत की सबसे प्रतिष्ठित पार्श्व गायिका थीं जिन्हें “स्वर कोकिला “और “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 36 भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाये और 8 दशकों तक भारतीय संगीत पर राज किया। आशा भोसले भारतीय सिनेमा की एक दिग्गज पार्श्व गायिका थीं, जिन्होंने 8 दशकों से अधिक 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाये। शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप और ग़ज़ल तक हर विधा में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा। उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पद्म विभूषण और कई फिल्मफेयर पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।

सिनेमा और खेल जगत में नारी शक्ति की उपलब्धियाँ

हिन्दी सिनेमा की प्रथम महिला देविका रानी मुख्य अभिनेत्री और पहली सुपरस्टार थीं। दुर्गाबाई कामत, मीना कुमारी, नूतन, बैजयंती माला आदि अपनी अपनी भूमिकाओं के लिए बेहद प्रसिद्ध थीं। आज की भी कई अभिनेत्रियां बेहद प्रसिद्ध हैं। खेल जगत की चर्चा करें तो… सानिया मिर्जा भारत की अब तक की सबसे सफल महिला टेनिस खिलाड़ी जिन्होंने युगल में विश्व नंबर-1रैंकिंग हासिल की और 3 मिश्रित युगल और 3 महिला युगल..छह ग्रैंड स्लैम खिताब जीते। साइना नेहवाल भारत की प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वह बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। 2015 में दुनिया की नंबर-1खिलाड़ी बनी थीं।उन्होंने अपने करियर में कई अंतरराष्ट्रीय सुपर सीरीज खिताब जीते हैं। मैरीकॉम भारत की दिग्गज मुक्केबाज। 6 बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता हैं।  स्मृति मंदाना भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक प्रमुख बाएं हाथ की बल्लेबाज और उप-कप्तान हैं। उन्होंने 2013 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और कई रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत की सबसे सफल ओपनर बनीं।

भारतीय राजनीति में भी स्त्रियों का बढ़ चढ़ कर योगदान रहा है। भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर श्रीमती प्रतिभा पाटिल को… स्वतंत्र भारत के 60 वर्ष के इतिहास में पहली महिला राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य मिला।  द्रौपदी मुर्मू जी, भारत की 15 वीं और वर्तमान राष्ट्रपति हैं। यह सर्वोच्च पद संभालने वाली जनजातीय समाज की पहली महिला हैं। झारखंड की पहली महिला राज्यपाल एक शिक्षिका पार्षद और विधायक भी रहीं हैं। स्त्री के व्यक्तित्व के लिए सुभद्रा कुमारी चौहान ने कहा था “हर मनुष्य की आत्मा स्वतंत्र” है। चाहे वह स्त्री शरीर के अन्दर निवास हो या पुरुष शरीर के अन्दर। सभ्यता के विकास के साथ-साथ स्त्री की स्थिति के भारत के हृदय और आत्मा में कई चित्र मिलते रहे हैं।

Topics: President Draupadi MurmuIndian womenभारतीय नारीभारत की वीरांगनाएंभारतीय इतिहास में नारी शक्तिWomen power in Indian history
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