भुवनेश्वर: झारसुगुड़ा जिले के कोलाबिरा तहसील अंतर्गत बड़बाहाल क्षेत्र में प्रस्तावित मस्जिद और मदरसा निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में विभिन्न गांवों के लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए इस परियोजना को रोकने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में संबंधित समुदाय की जनसंख्या कम होने के कारण ऐसे संस्थान की आवश्यकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक ट्रस्ट द्वारा बड़बाहाल इलाके में मदरसा और मस्जिद निर्माण के लिए प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में मुस्लिम समुदाय की संख्या सीमित है, ऐसे में इस प्रकार के धार्मिक और शैक्षणिक संस्थान की आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है।
इस मुद्दे को लेकर 2 मई को बड़बाहाल क्षेत्र के ग्रामीणों ने कोलाबिरा तहसीलदार के नाम एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि एक ट्रस्ट द्वारा धार्मिक शिक्षण संस्थान के रूप में मदरसा स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इसकी जरूरत नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि इस परियोजना से जुड़े कुछ व्यक्तियों की पृष्ठभूमि संदिग्ध हो सकती है, जिससे क्षेत्र की शांति और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की संभावना है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय लोगों की इच्छा के विरुद्ध इस योजना को आगे बढ़ाया गया, तो भविष्य में कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। समासिंहा प्रगति संघ की ओर से सौंपे गए इस ज्ञापन को तहसीलदार की अनुपस्थिति में अतिरिक्त तहसीलदार कौशिक मेहेर को प्रदान किया गया। इस दौरान संगठन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज कालो, सचिव प्रकाश साहू, पूर्व सरपंच दुलाराम सेनापति, करुणाकर सेट, समाजसेवी वीरेन्द्र महापात्र, द्विवेंदु दास, योगेश्वर सेनापति, रितेश साहू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
विरोध का स्वर यहीं तक सीमित नहीं रहा। 4 मई को कोलाबिरा ब्लॉक के विभिन्न गांवों के सैकड़ों ग्रामीण एकत्र होकर तहसीलदार को एक और ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि कोलाबिरा ग्राम के वार्ड नंबर 10 में स्थित भूमि (खाता नंबर 480 एवं प्लॉट नंबर 639/1108) पर मस्जिद और मदरसा निर्माण की प्रक्रिया जारी है, जिसका स्थानीय स्तर पर व्यापक विरोध हो रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच आपसी सौहार्द बना हुआ है, लेकिन बाहरी हस्तक्षेप से यह संतुलन बिगड़ सकता है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आशंका व्यक्त की कि मदरसा के माध्यम से अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों को प्रभावित कर धर्मांतरण की कोशिशें हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, स्थानीय लोगों ने परियोजना में इस्तेमाल हो रहे धन के स्रोत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस निर्माण के पीछे आर्थिक स्रोत स्पष्ट नहीं हैं, जिससे संदेह की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक शांतिपूर्ण क्षेत्र में अनावश्यक तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि प्रस्तावित स्थल के निकट जगन्नाथ मंदिर, हनुमान मंदिर और समलेश्वरी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल स्थित हैं। ऐसे में यहां मस्जिद निर्माण से क्षेत्र का धार्मिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि परियोजना से जुड़े फंड के स्रोत, ट्रस्ट के सदस्यों की पृष्ठभूमि तथा इस निर्माण की वास्तविक आवश्यकता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, उन्होंने जांच पूरी होने तक सभी प्रकार की अनुमति प्रक्रियाओं को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने का अनुरोध किया है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान झिर्लापाली सरपंच तिलोतमा छंचाण, परमाणुपुर सरपंच जाह्नवी प्रधान, विनोद पटेल, लतिका साहू, गजेन्द्र किसान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। फिलहाल, इस पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।










