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होम भारत पश्चिम बंगाल

अमेरिका, पाकिस्तान और बांग्लादेश की मीडिया की नजर में बंगाल चुनाव

बंगाल और असम में BJP की भारी जीत ने विदेशी मीडिया को हतोत्साहित कर दिया। NYT, Guardian, BBC और Al Jazeera के हिन्दू राष्ट्रवाद पर हमले और उनकी निराशा का सच्चा विश्लेषण।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
May 7, 2026, 01:08 pm IST
in पश्चिम बंगाल
West Bengal Election forign media

प्रतीकात्मक तस्वीर

कहने के लिए बंगाल और असम के चुनाव भारत के केवल दो प्रांतों के चुनाव थे, मगर इन पर पूरे विश्व की नजर थी। ये चुनाव केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए चर्चा और विश्लेषण का केंद्र थे। कई शक्तियां ऐसी थीं, जो भाजपा को हारते हुए देखना चाहती थीं। कई मीडिया हाउस ऐसे थे जो चाहते थे कि भाजपा हार जाए और फिर वे लिखें कि “मोदी मैजिक समाप्त हो गया है।“

कुछ ऐसे थे जो यह चाहते थे कि लिख सकें कि हिन्दू राष्ट्रवाद अब समाप्त हो गया है, जनता ने नकार दिया है। मगर ऐसा कुछ हो नहीं सका और इन दोनों ही सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की जीत से विदेशी मीडिया हतोत्साहित है और एक बार फिर से झूठ का साम्राज्य लेकर वह आ गया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने हिन्दू राष्ट्रवाद का विस्तार कहा

इन चुनाव परिणामों में भाजपा की विजय को भाजपा की हिन्दू प्रथम की नीति का विस्तार कहा। इसने अपने लेख में लिखा कि कैसे ये चुनाव परिणाम हिन्दू राष्ट्रवाद का विस्तार हैं। इसके साथ ही इसने भी एसआईआर को लेकर झूठ फैलाया। france24 ने लिखा कि “ये नतीजे मोदी को एक मज़बूत स्थिति में ला देंगे, जबकि वे 2029 के आम चुनावों से पहले, बेरोज़गारी की उच्च दर और अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौते जैसी आर्थिक और विदेश नीति से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।“

वहीं ब्रिटिश प्रकाशन गार्डीअन ने इस जीत को लेकर लिखा कि इससे भारत की राजनीति पर बहुत प्रभाव पड़ेगा और पहले से ही कमजोर विपक्ष पर और भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसका शीर्षक था “”Narendra Modi’s BJP wins election in West Bengal for the first time”,”। यह इस बात से चिंतित है कि कहीं विपक्ष बिल्कुल ही सिमट न जाए। और इससे उसकी कुंठा और निराशा भए समझ मे आती है। गार्डीअन की छवि काफी लंबे समय से हिन्दू विरोधी रही है। और उसने यहाँ पर भी निराश नहीं किया है। और इसने भी भारत के विपक्ष के झूठ को दोहराते हुए एसआईआर प्रक्रिया के विषय में झूठ लिखा है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि जैसे भाजपा सरकार के सामने विपक्ष केवल भारत के विपक्षी दलों के रूप में ही नहीं है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक मीडिया के रूप में भी है।

बीबीसी ने 12 साल के शासन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया

आम तौर पर भारत और भाजपा के विरोध मे रहने वाले बीबीसी ने अपने सुर बदल लिए। बीबीसी ने अपने शीर्षक ‘Modi’s BJP conquers Bengal, one of India’s toughest political frontiers वाले लेख में दावा किया कि इस पूर्वी राज्य में BJP की ज़बरदस्त जीत “मोदी के 12 साल के राज की सबसे बड़ी कामयाबी में से एक होगी।” “यह सिर्फ़ तीन टर्म के मौजूदा नेता की हार नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत में पार्टी के लंबे सफ़र का पूरा होना है।” दरअसल, विदेशी औपनिवेशिक मीडिया भी इस बात को समझ नहीं पा रहा है कि इस सीमा तक उसके द्वारा भी नकारात्मक रिपोर्टिंग के बाद भाजपा न केवल इन दोनों बड़े राज्यों में विजयी हुई है, बल्कि भारी मार्जिन से जीती है। विपक्ष लगभग साफ ही हो गया है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जैसे ईरान में औपनिवेशिक मीडिया को महिलाओं पर कट्टरपंथी सरकार के अत्याचार नहीं दिख रहे हैं, वैसे ही बंगाल में भी महिलाओं पर हो रहे अत्याचार मीडिया को दिख ही नहीं रहे थे। संदेशखाली से जो संदेश वहाँ की जनता देने का प्रयास कर रही थी, वह मीडिया ने भी अनसुना कर दिया था। मीडिया ने ममता बनर्जी से क्यों नहीं पूछा कि आखिर महिलाओं के साथ इस सीमा तक अत्याचार क्यों हैं? वाशिंगटन पोस्ट ने अपने कवरेज में लिखा कि इन चुनाव परिणामों से प्रधानमंत्री मोदी को अपनी स्थिति मजबूत रखने में सहायता मिलेगी। पाकिस्तान के Dawn के कवरेज में भी यही बात काही कि इन परिणामों से भारत के घरेलू और विदेशी नीति में परिवर्तन आएगा। बांग्लादेश में ढाका ट्रिब्यून में भी यही कहा गया कि इससे राजनीति में प्रभाव पड़ेगा।

Reuters ने इन चुनाव परिणामों को लेकर लिखा कि मोदी की हिंदुओं से अपील करने की नीति अब चुनाव जिताने वाली नीति बन गई है। हालांकि विदेशी मीडिया कभी भी कथित सेक्युलर दलों को मुस्लिमों का तुष्टीकरण करने वाले दल नहीं कहता है और न ही वह भारत में हिंदुओं पर मुस्लिम कट्टरपंथियों के अत्याचारों को कवर करता है, मगर जहां पर भी उसे अवसर मिलता है हिंदुओं को अपशब्द कहने का, वह उसे छोड़ता नहीं है।

प्रोपोगैंडा अलजज़ीरा की भी झलकी निराशा

भारत के खिलाफ प्रोपोगैंडा चलाने वाले अल जजीरा की भी निराशा और कुंठा झलक उठी। उसने बंगाल की विजय को धार्मिक ध्रुवीकरण का परिणाम बताया। जहां पर वह इसे ध्रुवीकरण का परिणाम कह रहा है, वहीं वह यह नहीं पूछ पाएगा कि कॉंग्रेस के असम में जीते हुए विधायकों में से केवल एक ही हिन्दू क्यों है? जो भी हो, भारत सरकार के विरोध में खबरें चलाने के लिए कुख्यात इन मीडिया चैनलों ने अपनी पहचान के अनुसार ही कार्य किया और वही कवरेज दिया, जैसी इनसे अपेक्षा की जा रही थी।

Topics: पश्चिम बंगालबंगाल चुनावविदेशी मीडियाहिन्दू राष्ट्रवादबंगाल BJP जीत
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