कान्हा में बाघिन और 4 शावकों की मौत की वजह पता चली, 'केनाइन डिस्टेंपर वायरस' बना कारण, जानिये यह कितना खतरनाक
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कान्हा में बाघिन और 4 शावकों की मौत की वजह पता चली, ‘केनाइन डिस्टेंपर वायरस’ बना कारण, जानिये यह कितना खतरनाक

कुछ ही दिनों में एक पूरे बाघ परिवार का खत्म हो जाना, जिसके चलते जंगल के संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर चिंता का विषय बन गया।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
May 6, 2026, 06:31 pm IST
inभारत, मध्य प्रदेश
जंगल का संतुलन बनाते हैं बाघ

जंगल का संतुलन बनाते हैं बाघ

भोपाल। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से हाल ही में आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे देश के वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर दिया। सरही परिक्षेत्र में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। कुछ ही दिनों में एक पूरे बाघ परिवार का खत्म हो जाना, जिसके चलते जंगल के संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर चिंता का विषय बन गया।

इस दुखद घटना के पीछे की असली वजह सामने आ चुकी है। कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रविंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार, मृत बाघों के सैंपल जबलपुर स्थित वेटरिनरी साइंस कॉलेज जबलपुर भेजे गए थे। विस्तृत जांच में यह पुष्टि हुई कि इन सभी की मौत “केनाइन डिस्टेंपर वायरस” नामक घातक संक्रामक बीमारी के कारण हुई।

बेहद खतरनाक है यह वायरस

यह वायरस बेहद खतरनाक माना है, खासकर मांसाहारी वन्यजीवों के लिए। संक्रमित होने पर जानवरों में भूख खत्म हो जाती है, शरीर कमजोर होने लगता है और अंततः निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जांच में यह भी सामने आया कि बाघिन के शावक कई दिनों से भूखे थे, उनके पेट में खाने का कोई अंश नहीं मिला। यह संकेत था कि वे वायरस के प्रभाव में धीरे-धीरे कमजोर हो रहे थे।

पहले तीन शावकों की मौत हुई, जिसके बाद बाघिन और एक अन्य शावक को तत्काल इलाज के लिए मुक्की रेंज ले जाया गया, लेकिन यहां भी तमाम इलाज और सुविधा के बाद भी जीवन ने साथ नहीं दिया। इलाज के दौरान पहले बाघिन की मौत हुई और उसी दिन शाम को उसके आखिरी शावक ने भी दम तोड़ दिया। इस तरह पूरा परिवार काल के गाल में समा गया।

वन विभाग ने उठाये कदम

इस खुलासे के बाद वन विभाग ने तुरंत सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जिन स्थानों से शावकों के शव मिले थे, वहां वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार डिसइन्फेक्शन किया गया है और उन क्षेत्रों को बैरिकेडिंग कर सील कर दिया गया है। इसके अलावा, घटनास्थल के आसपास पाँच किलोमीटर के दायरे में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके।

हाथी दल भी सक्रिय

वन विभाग ने हाथी दलों को भी सक्रिय कर दिया है, जोकि जंगल के भीतर लगातार गश्त कर रहे हैं। उनका काम यह सुनिश्चित करना है कि कोई अन्य वन्यजीव संक्रमित क्षेत्र के संपर्क में न आए। माना जा रहा है कि इस वायरस के जंगल में पहुंचने का सबसे बड़ा कारण घरेलू कुत्ते हो सकते हैं। केनाइन डिस्टेंपर वायरस आमतौर पर कुत्तों में पाया जाता है और उनसे अन्य जानवरों में फैल सकता है। संभावना ये भी जताई जा रही है कि जंगल के आसपास घूमने वाले कुत्तों ने किसी शिकार को संक्रमित किया होगा, जिसे खाने के बाद बाघ इस वायरस की चपेट में आ गए।

संक्रमण का रहता है खतरा

यह भी देखा गया है कि कई बार बाघ अपने क्षेत्र से बाहर निकलकर शिकार करते हैं, जिससे उनका संपर्क बाहरी संक्रमण से हो सकता है। यही कारण है कि अब वन विभाग ने आसपास के गांवों में रहने वाले मवेशियों और कुत्तों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। कुत्तों में वैक्सीनेशन के जरिए उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा रही है, ताकि वे इस वायरस के वाहक न बन सकें। इसके साथ ही ग्रामीणों, होटल और रिजॉर्ट संचालकों के साथ बैठकें आयोजित कर उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।

दिशार्निदेश किए गए लागू

कोविड काल की तरह सख्त गाइडलाइंस भी लागू की गई हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व के तीनों प्रवेश द्वारों पर पर्यटक वाहनों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां पानी से भरे गड्ढों में डिसइन्फेक्टेंट मिलाया गया है, जिससे होकर ही हर वाहन को गुजरना अनिवार्य कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि यह घटना एक चेतावनी है वन्यजीवों के साथ इंसानों के लिए भी। जंगल और मानव बस्तियों के बीच बढ़ती नजदीकियां कई बार ऐसे खतरनाक परिणाम लेकर आती हैं। अब जरूरत है सतर्कता, वैज्ञानिक प्रबंधन और सामूहिक प्रयास की, ताकि भविष्य में किसी और बाघ परिवार को इस तरह खत्म होते न देखना पड़े।

 

Topics: शावकों की मौतकेनाइन डिस्टेंपर वायरसवायरस से मौतबाघिन की मौतकान्हा टाइगर रिजर्व
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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