गाजियाबाद के संतपुरा कॉलोनी का एक निजी स्कूल इन दिनों विवाद में है। सेंट टेरेसा एकेडमी की एक शिक्षिका द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह मामला काफी चर्चा में आ गया है। मंगलवार को इस विवाद ने तूल पकड़ लिया, जब कुछ संगठनों के लोग स्कूल के बाहर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने लगे। नारेबाजी और धार्मिक कार्यक्रमों के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसे बाद में पुलिस ने संभाला।
मतांतरण का दबाव
शिक्षिका अरुणा रानी, जो साल 2012 से स्कूल में पीटीआई के रूप में काम कर रही हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन उन पर और छात्रों पर मतांतरण का दबाव बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल के लोग बच्चों और शिक्षकों को गैर-हिंदू धार्मिक जगहों पर ले जाते हैं और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। उनका यह भी कहना है कि खासकर गरीब वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जाता है। शिक्षिका ने यह भी बताया कि उन्हें टीका और कलावा पहनने से रोका गया और उनके हाथ पर बने भगवान राम और शिव के टैटू हटाने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें नौकरी से निकालने और उनके बेटे का स्कूल से नाम काटने की धमकी दी गई।
हनुमान चालीसा का पाठ
इन आरोपों के सामने आने के बाद बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच और हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता स्कूल के बाहर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने नारे लगाए और हनुमान चालीसा का पाठ किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बात की और मामला संभालने की कोशिश की। वहीं, स्कूल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है। प्रधानाचार्य का कहना है कि शिक्षिका पर पहले भी अनुशासनहीनता के आरोप लग चुके हैं और यह सब उन्होंने कार्रवाई से बचने के लिए कहा है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। सभी पक्षों से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

















