नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने जा रही है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढहने वाला है। TMC को करारी हार मिल रही है। इस विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी बात रही कि इस बार न तो मुस्लिम कार्ड चला और न ही मुस्लिम महारथी चुनाव में कुछ खास कर पाए। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के जब नतीजे आ रहे हैं तो ‘मुस्लिम महारथी’ धूल चाटते हुए दिख रहे हैं।
नहीं चल पाया ‘मुस्लिम कार्ड’…हुमायूं कबीर को खानी पड़ी मुंह की
असम में बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ (AIUDF), बंगाल में हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी, पीरजादा अब्बास सिद्दीकी का इंडियन सेकुलर फ्रंट और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) कोई कमाल नहीं कर पाई। बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर की पार्टी कुछ खास नहीं कर पाई। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) को इस चुनाव में मुंह की खानी पड़ी है। हुमायूं कबीर ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उनका मुस्लिम कार्ड नहीं चल पाया।
पीरजादा नौशाद से लेकर बदरुद्दीन अजमल.. सबकी टांय टांय फिस्स..
खुद हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजीनगर और नोआदा से मैदान में थे। लेकिन अभी तक के रुझानों में दोनों ही सीटों पर वो काफी पिछे हैं। उनकी पार्टी भी किसी सीट पर आगे नहीं है। वहीं दूसरी तरफ पीरजादा नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाला इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) ने भी बंगाल विधानसभा चुनावों में कुल 120 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने लेफ्ट के साथ गठबंधन किया था। लेकिन इस पार्टी को भी धूल चाटनी पड़ी।
असम में कभी खास रुतबा रखने वाले बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF का बुरा हाल है। इस पार्टी ने 27 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस बार पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं था। लेकिन यह पार्टी भी मुस्लिम तुष्टिकरण नहीं कर पाई और टांय टांय फिस्स साबित हुई है। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को भी मुंह की खानी पड़ी। इस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में 8 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे लेकिन सभी टांय टांय फिस्स साबित हुए।











