मध्य प्रदेश में जबलपुर के बर्गी डैम पर हुए क्रूज हादसे में शनिवार को दो और बच्चों की लाशें मिलने के बाद मरने वालों की कुल संख्या 11 हो गई है। दो बच्चों की लाशें रिजर्वायर से निकाली गईं है। चार लोग अभी भी लापता हैं और तलाशी अभियान तीसरे दिन भी जारी है।
हादसे की जानकारी
30 अप्रैल को शाम के समय मध्य प्रदेश टूरिज्म का क्रूज बोट बर्गी डैम पर नर्मदा नदी के जलाशय में पलट गया। बोट पर कुल 43 लोग सवार थे-जिनमें 41 यात्री और दो क्रू सदस्य थे। CCTV फुटेज के अनुसार 43 लोगों ने एंट्री पॉइंट पर प्रवेश किया था। हादसे की रात 28 लोगों को बचाया गया। शुक्रवार तक चार लाशें पहले दिन, पांच दूसरे दिन और शनिवार को दो बच्चों की लाशें मिलीं। मरने वालों में आठ महिलाएं और तीन बच्चे शामिल हैं।
चेतावनियां नजरअंदाज की गईं
हादसे के बाद सबसे बड़ी चर्चा ये है कि तेज हवाओं की चेतावनी के बावजूद क्रूज चलाया गया। मौसम विभाग ने 50 किलोमीटर प्रति घंटा की हवाएं बताई थीं, जबकि पानी के खेल और क्रूज के लिए 25-30 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा हवा में ऑपरेशन नहीं करना चाहिए। बाद में हवाओं की रफ्तार 74 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। भोपाल के लोअर लेक पर उसी दिन हवाओं की चेतावनी के कारण वॉटर स्पोर्ट्स रोक दिए गए थे। नेशनल वॉटर स्पोर्ट्स कोच मयंक ठाकुर कहते हैं कि वे 20-22 किलोमीटर प्रति घंटा हवा में भी ऑपरेशन रोक देते हैं क्योंकि हर व्यक्ति की जान कीमती है। इंटरनेशनल कैनो फेडरेशन से जुड़े प्रशांत कुशवाहा भी कहते हैं कि मौसम विभाग की चेतावनी को कभी हल्के में नहीं लिया जाता।
टूरिज्म विभाग में लापरवाही की बात
टूरिज्म विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अक्सर मौसम की जानकारी चेक किए बिना ही बोट्स निकाल दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि क्रूज बोट्स सामान्यतः सुरक्षित होती हैं, लेकिन नियमों का पालन जरूरी है। वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिशों में कोई जवाब नहीं मिला।
200 से ज्यादा जवान तलाशी में लगे
बर्गी सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी अंजुल आयंक मिश्रा ने बच्चों की लाशों की पुष्टि की। पुलिस, SDRF, NDRF और आर्मी के 200 से ज्यादा जवान तलाशी में लगे हैं। तेज हवाएं और कम दृश्यता के कारण काम मुश्किल हो रहा है। तलाश तब तक जारी रहेगी जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता। बर्गी डैम जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।











