किताबों के भी नहीं थे पैसे, आज वही पद्मश्री डॉ. एचसी वर्मा दे रहे AI को चुनौती
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कभी हर विषय में फेल, किताबों के भी नहीं थे पैसे, आज वही पद्मश्री डॉ. एचसी वर्मा दे रहे AI को चुनौती

डॉ. वर्मा की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। बिहार के दरभंगा से निकलकर IIT कानपुर के प्रोफेसर बनने तक का उनका सफर आसान नहीं था। बचपन में वे 9 साल की उम्र तक स्कूल नहीं जा पाए। जब उन्होंने सीधे छठी कक्षा में दाखिला लिया, तो उन्हें परीक्षा के बारे में कुछ भी पता नहीं था।

Written byMahak SinghMahak Singh
Apr 30, 2026, 02:35 pm IST
inभारत
Prof. HC Verma

Prof. HC Verma

आज की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारी पढ़ाई, काम और सोचने के तरीकों को काफी प्रभावित किया है। ऐसे समय में डॉ. एचसी वर्मा का यह कहना कि “इंसानी दिमाग का कोई मुकाबला नहीं है” हमें एक महत्वपूर्ण सीख देता है। उनकी जिंदगी खुद इस बात का उदाहरण है कि अगर इंसान में सीखने की चाह हो, तो वह किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है।

संघर्ष से सीखने का सफर- डॉ. वर्मा की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। बिहार के दरभंगा से निकलकर IIT कानपुर के प्रोफेसर बनने तक का उनका सफर आसान नहीं था। बचपन में वे 9 साल की उम्र तक स्कूल नहीं जा पाए। जब उन्होंने सीधे छठी कक्षा में दाखिला लिया, तो उन्हें परीक्षा के बारे में कुछ भी पता नहीं था। इस कारण वे सभी विषयों में फेल हो गए, कई में तो उन्हें शून्य अंक मिले। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। वे कभी उन्हें डांटते नहीं थे, बल्कि कहते थे कि शायद स्कूल अच्छा नहीं है, और उनका दाखिला दूसरे स्कूल में करा देते थे। उनकी मां ने भी पढ़ाई में रुचि जगाने का एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने ठेकुए देकर उन्हें रोज कुछ समय पढ़ने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे पढ़ाई उनके लिए बोझ नहीं, बल्कि आनंद बन गई।

मेहनत, सही मार्गदर्शन की जीत- नौवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते वे सभी विषयों में पास हो गए। आर्थिक परेशानी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। वे कक्षा में ध्यान से सुनते थे, जिससे उन्हें घर पर ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती थी। यह आदत आज के छात्रों के लिए बहुत बड़ी सीख है। शुरुआत में वे गणित के प्रोफेसर बनना चाहते थे, लेकिन एक शिक्षक की सलाह पर उन्होंने फिजिक्स चुना। यही फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बना और वे एक महान शिक्षक बन गए। आज जब छात्र AI पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, डॉ. वर्मा चेतावनी देते हैं कि इससे सोचने की क्षमता कम हो सकती है। उनका कहना है कि AI हमारी मदद कर सकता है, लेकिन हमारी जगह नहीं ले सकता। इतनी सफलता और ‘पद्मश्री’ सम्मान मिलने के बाद भी उनका जीवन बहुत सादा है। वे बिना दिखावे के जीते हैं और शिक्षा के प्रति समर्पित हैं।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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