ब्रिटेन की पुलिस ने एक बहुत ही चौंकाने वाले कदम के रूप में अहमदी रिलीजन ऑफ पीस एंड लाइट के मुख्यालय पर छापा मारा। यह कार्यवाही गंभीर यौन उत्पीड़न, आधुनिक गुलामी और जबरन निकाह के आरोपों को लेकर की गई थी।
गार्डियन के अनुसार, पूरे नॉर्थ वेस्ट इंग्लैंड से लगभग 500 पुलिस अधिकारी बुधवार सुबह इस कार्यवाही के लिए साथ आए। पुलिस के अनुसार कुल 9 लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। इस समूह का मुख्यालय Crewe, Cheshire में एक ऐसी जगह पर है, जहां पर पहले एक अनाथालय हुआ करता था। दरअसल, एक महिला ने मार्च में यहाँ की पुलिस से इस समूह पर कार्यवाही करने के लिए कहा था। वह वर्तमान में आयरलैंड में शिफ्ट हो चुकी है, परंतु उसने अहमदी रीलिजन ऑफ पीस एंड लाइट के मुख्यालय में बलात्कार और यौन शोषण की शिकायत की थी। पुलिस के अनुसार, यह अपराध 2023 में हुआ था और वह महिला तब इस समूह का हिस्सा थी।
क्या कहती है पुलिस
हालांकि, पुलिस ने यह साफ कर दिया कि उसकी कार्यवाही किसी मजहबी समूह के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल और केवल यौन शिकायतों को लेकर हैं। इस कार्यवाही में विशेष अधिकारी शामिल थे, जिन्होनें वहाँ पर मौजूद बच्चों और महिलाओं से भी बात की।
डेली मेल ने गार्डियन के हवाले से बताया कि इस समुदाय के एक पूर्व सदस्य ने बताया था कि कैसे उसे इस बात के लिए बढ़ी किया गया कि वह बाहरी संसार से नाता तोड़ दे और अपना घर आदि सब बेचकर इसकी गतिविधियों को पैसा देने के लिए मजबूर किया गया। एक और महिला ने बताया कि उसने अपनी शादी के लिए रखा सारा पैसा दे दिया था, जबकि एक और का कहना था कि उसने 33,000 डॉलर दिए थे। यह अनुमान है कि इस इमारत में इस विचार को मानने वाले 150 लोग रहते हैं, और इनमे उन बच्चों के परिवार भी हैं, जिनकी यहाँ पर होम स्कूलिंग होती है।
पहले इसका मुख्यालय स्वीडन में हुआ करता था, मगर वर्ष 2021 में स्वीडन से यूके में उसका मुख्यालय शिफ्ट हो गया था। इससे पहले मिस्र और जर्मनी मे भी यह समूह था। स्वीडन में इनकी जांच इममिग्रेंट फोर्स ने की थी और इनके 69 सदस्यों की नागरिकता चली गई थी। उसके बाद यह समूह ब्रिटेन में चला आया।
इमिग्रेशन कोर्ट का फैसला
वर्ष 2022 में इनके खिलाफ कई फैसले स्वीडन में आए थे। और एक इमिग्रेशन कोर्ट ने इस समूह के दर्जनों सदस्यों को देश से निकालने का आदेश दिया। हालाँकि, ये फैसले सुनाए जाने तक उनमें से ज़्यादातर लोग UK जा चुके थे। हालांकि, अहमदी रिलीजन ऑफ पीस एंड लाइट का कहना था कि यह कार्यवाही नस्लीय कार्यवाही थी। गार्डियन के अनुसार, उसने पहले भी यह रिपोर्ट की है कि इस समूह की जांच यूके के होम ऑफिस द्वारा स्किल्ड वर्कर वीसा के प्रयोग के कारण भी हो रही है।
हालांकि पुलिस की वर्तमान कार्यवाही पर अहमदी रीलिजन ऑफ पीस एंड लाइट के वकील का कहना है कि उनके क्लाइंट ने किसी भी तरह का कोई गलत काम नहीं किया है और वे हर प्रकार से कानूनी कार्यवाही में सहायता करेंगे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में दो अमेरिकी पुरुष और एक महिला, दो मैक्सिकन पुरुष, एक इतालवी महिला, एक स्पेनिश पुरुष, एक स्वीडिश महिला और एक मिस्र का पुरुष शामिल हैं।
पुलिस ने अपने जारी किये गए बयान में कहा कि हम यौन उत्पीड़न की सभी रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हैं, और न्याय सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्या है अहमदी रिलीजन ऑफ पीस एंड लाइट
यह एक ऐसा मजहबी आंदोलन है, जो अपने आप को शिया मुस्लिमों के साथ जोड़ता है, मगर इसे मुस्लिमों द्वारा इसे इस्लाम नहीँ माना जाता है। aol.com की रिपोर्ट के अनुसार रिलीजन मीडिया सेंटर बताता है कि ‘अहमदी रिलीजन ऑफ़ पीस एंड लाइट’ की शुरुआत इराक में हुई थी और अब यह 40 देशों में सक्रिय है; अनुमान है कि लगभग 7,000 लोग इस आंदोलन से जुड़े हुए हैं।
इसकी स्थापना सदी की शुरुआत में शिया इस्लाम के अनुयायियों द्वारा की गई थी। इसके अनुयायियों का मानना है कि यह एकमात्र सच्चा और सार्वभौमिक धर्म है, और इसके सदस्य ईश्वर द्वारा चुने हुए लोग हैं। यह कई कॉन्सिपिरेसी थ्योरी पर विश्वास करता है, जैसे कि अमेरिकी राष्ट्रपति एलियंस के नियंत्रण में हैं, और ऐसे एलियन-मानव संकरों का अस्तित्व है जो अपना रूप बदल सकते हैं। गार्डियन के अनुसार इस पंथ के अनुयायी काली बीनी टोपी पहनते हैं और उनका मानना है कि पंथ का नेता बीमारों को ठीक कर सकता है और चाँद को गायब कर सकता है।
सदस्यों का यह भी मानना है कि जॉर्ज वॉशिंगटन असल में एडम वेइशॉप्ट थे जिन्हें इल्युमिनाती का संस्थापक माना जाता है और यह कि इस संप्रदाय का नेता, जो उनके साथ ‘वेब हाउस’ में रहता है, बीमारों को ठीक कर सकता है और चाँद को गायब कर सकता है, हालांकि, इसके नाम से अहमदिया समुदाय का भी भ्रम होता है, परंतु ये दोनों अलग-अलग हैं। अहमदिया आंदोलन (स्थापना 1889, कादियान) मिर्ज़ा गुलाम अहमद द्वारा शुरू किया गया एक सुन्नी-आधारित आंदोलन है तो वहीं दूसरी ओर, अहमदी रिलीजन ऑफ पीस एण्ड लाइट की स्थापना ईराक में वर्ष 2015 में हुई थी और वह शिया मूल का एक नया, छोटा समूह है, जो अहमद अल-हसन को मसीहा मानता है।












