शंभू-अंबाला रेलवे मार्ग पर धमाके में पाकिस्तान का हाथ है। विस्फोट की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए पटियाला पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार, हैंड ग्रेनेड और आईईडी बनाने का सामान बरामद किया है। पुलिस का मानना है कि ये सभी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस के इशारे पर काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार आरोपी पंजाब के मुख्य रेल मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर बड़े धमाके करने की साजिश रच रहे थे। यही आरोपी सोमवार देर रात शंभू-अंबाला रेलवे मार्ग पर हुए विस्फोट में भी शामिल थे। इस घटना में रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचा था।
डीआईजी कुलदीप सिंह चहल और एसएसपी वरुण शर्मा ने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया था। टीमों ने कार्रवाई करते हुए प्रदीप सिंह खालसा, कुलविंदर सिंह बग्गा (दोनो निवासी मानसा), सतनाम सिंह सत्ता निवासी और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी (दोनो निवासी तरनतारन) को गिरफ्तार किया है।
डीआईजी ने बताया कि आरोपियों के पास से एक हैंड ग्रेनेड, दो पिस्तौल, कारतूस, आईईडी बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान और लैपटॉप बरामद किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हथियार और विस्फोटक उन्हें सीमा पार बैठे हैंडलरों की मदद से मिले थे।
खालिस्तानी विचारों से संक्रमित प्रदीप खालसा पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में था
जांच में यह भी सामने आया है कि मॉड्यूल का सरगना प्रदीप सिंह खालसा है जो खालिस्तानी विचारधारा से संक्रमित है। वह विदेश में बैठे उग्रवादी समूहों और पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क में था। मलयेशिया के जरिए संपर्क बनाए रखने के लिए आरोपी तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे थे।
पंजाब में दहशत फैलाना था उद्देश्य
पुलिस के अनुसार आरोपियों का मकसद पंजाब में दहशत फैलाना और उग्रवाद को दोबारा हवा देना था। इसके लिए वे रेलवे ट्रैक और भीड़भाड़ वाले स्थानों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।
पूछताछ में सामने आया कि सोमवार रात 8.55 बजे आरोपियों ने शंभू-अंबाला रेलवे मार्ग पर विस्फोट किया। इस संबंध में जीआरपी थाना पटियाला में मामला दर्ज किया गया था। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने मंगलवार को पटियाला में छापे मारकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
रेलवे ट्रैक आतंकियों के निशाने पर।
सोमवार रात पटियाला के शंभू में डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) के ट्रैक पर हुए ब्लास्ट ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है। पंजाब में रेलवे ट्रैक आतंकियों के निशान पर हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़े पैटर्न के तौर पर देख रही हैं, जिसमें रेलवे नेटवर्क को लगातार निशाना बनाने की कोशिशें सामने आ रही हैं।
सोलर सीसीटीवी कैमरे भी पकड़े गए
इससे पहले रेलवे ट्रैक के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरे कैमरे लगाए जाने के मामले सामने आए थे। पांच कैमरे पंजाब में लगे थे। एक पठानकोट व एक कपूरथला में बरामद किया था, लेकिन जालंधर मोगा व पटियाला में लगे तीन कैमरों का पता नहीं। जांच में पता चला था कि इनका इस्तेमाल जासूसी और ट्रैक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। हाल ही में लखनऊ एटीएस की ओर से भी एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया गया, जो अलग-अलग इलाकों में रेलवे ट्रैक के आसपास आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बड़े हमलों की तैयारी का हिस्सा हो सकती हैं।
पिछले दो वर्षों के दौरान कई घटनाएं आई सामने
पंजाब में पिछले दो वर्षों के दौरान भी कई घटनाएं सामने आई हैं। 23 जनवरी 2026 में सरहिंद के पास डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ था, जिसमें करीब 60 फीट पटरी क्षतिग्रस्त हुई थी। वहीं, 2024 और 2025 में कई बार रेलवे ट्रैक पर लोहे की सरिया या अन्य वस्तुएं रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिशें हुईं थीं।
आर्थिक गतिविधियां बाधित करना उद्देश्य
विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक, खासकर मालगाडिय़ों के रूट, देश की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। कोयला, खाद, अनाज और औद्योगिक सामान की ढुलाई इन्हीं रास्तों से होती है। ऐसे में इनको नुकसान पहुंचाने की कोशिश सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ी
फिलहाल रेलवे, आरपीएफ और राज्य पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। निगरानी के लिए तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। फिर भी ऐसे षड्यंत्रों को समय रहते नाकाम करना बड़ी चुनौती है। पंजाब में रेलवे ट्रैक को उड़ाने की लगातार धमकियां मिल रही थीं। गत 24 अप्रैल को भी पटियाला, बठिंडा, लुधियाना व अमृतसर में ईमेल पर बम से रेलवे ट्रैक उड़ाने की धमकी मिली थी। तीन दिन बाद शंभू में ब्लास्ट की घटना हो गई।











