पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण में भाजपा के लिए अपार संभावनाएं हैं। विगत 2021 के विधानसभा के चुनाव में भाजपा दूसरे चरण के 142 सीटों मर महज 18 सीट ही जीत सकी थी। भाजपा के 2021 में इन सीटों पर कमजोर प्रदर्शन का कारण पार्टी की कमजोरी से अधिक जनता के मन में भाजपा के प्रति जीत का संदेह था। मगर दूसरे चरण के चुनाव में भाजपा आम आदमी पार्टी के 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली जीत के आधार पर ही अपना झंडा बुलंद करती दिख रही है। 2013 में दिल्ली के मतदाताओं के मन में आप उम्मीदवारों के जीत के प्रति संदेह था अतएव उन्होंने अपने वोट का जोखिम नहीं लेते हुए अन्य दलों का समर्थन किया।
लेकिन 2015 में आप के जीत के बाद मतदाताओं के मन से आप के जीत का द्वन्द समाप्त हो गया और लोगों ने खुल कर आप के पक्ष में मतदान किया। क्योंकि आप ने 2013 में अपनी जीत की क्षमता दिखाई थी और 2013 में केजरीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया था। भाजपा ने 2021 में ममता बनर्जी को ठीक उसी तरह से हराया है। जैसे 2013 में आप ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया था। इसके अलावा भाजपा 77 सीटें जीतकर अपनी क्षमता दिखाई और साथ ही 278 सीटों पर सीधे मुकाबले में रही थी।
पहले चरण के मतदान ने टीएमसी को मुश्किल में डाला
प्रथम चरण के चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ में उम्मीद से अधिक मतदान के कारण तृणमूल कांग्रेस की सांसे फूली हुई है। तृणमूल कांग्रेस पार्टी अत्यधिक मतदान से अंदर ही अंदर परेशान हैं, मगर ऊपर से अपने को मजबूत दिखाने का प्रयास कर रही है। तृणमूल कांग्रेस को अहसास है कि सरकार बनाने के लिए दोनों चरणों में पार्टी को अच्छा प्रदर्शन करना पड़ेगा। किसी एक चरण के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन उन्हें सत्ता की दहलीज तक पहुचाने के लिए काफी नहीं है।
दूसरी तरफ भाजपा दूसरे चरण के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करके अपने आलोचकों को यह बताना चाहती है कि अब भाजपा सम्पूर्ण बंगाल की पार्टी बन गई है न कि राज्य के किसी ख़ास हिस्से की दूसरे चरण के 142 सीटों में भाजपा विगत तीन चुनाव जिसमें दो लोकसभा और एक विधानसभा का चुनाव शामिल है, उसमें 39 सीटों पर कम से कम एक बार जीत दर्ज़ कर चुकी है या लोकसभा के चुनाव में बढ़त बना चुकी है। अतएव भाजपा इस चरण में अपनी शुरुआत ही 39 सीटों से कर रही है। इसके अलावा भाजपा को अपनी सीटों की संख्या बढ़ने के कई कारण उपलब्ध है।
प्रथम की भाजपा 2021 के विधानसभा चुनाव में 14 सीटों पर दस हज़ार से कम मतों के अंतर से चुनाव हारी थी। अतएव भाजपा की नज़र अपनी 18 सीटों को बरकरार रखने के साथ ही इन सीटों पर जीत दर्ज़ करने की भी है। भाजपा 17 सीटों पर 2021 के विधानसभा चुनाव में दस हज़ार से अधिक मगर बीस हज़ार से कम मतों से हारी थी। वहीं 20 हज़ार से पचीस हज़ार के बीच भाजपा 19 सीटों पर हारी थी। भाजपा 2021 के विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के 142 सीटों पर 25 हज़ार से कम मतों से 50 सीटों पर चुनाव हारी थी। दूसरे चरण के छह सीटों पर भाजपा 2021 में 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करके जीत दर्ज़ किया था। इसमें चार सीट नदिया जिले और एक सीट हुगली और उत्तर 24 परगना जिले की है। भाजपा कम मतों से हारे हुए सीटों को चिन्हित करके उनको जीतने के लिए बहुत पहले से योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।
भाजपा के लिए है सुनहरा अवसर
भाजपा के लिए 2026 का विधानसभा चुनाव सुनहरा अवसर लेकर आया है। भाजपा ने 2019 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में सबसे उम्दा प्रदर्शन किया था जब पार्टी ने 18 लोकसभा की सीटों पर जीत दर्ज़ किया था और 121 विधानसभा सीटों पर प्रथम पायदान पर थी। 2019 में वाम दल, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी अलग अलग चुनाव लड़ी थी। भाजपा 2019 से बेहतर प्रदर्शन का उम्मीद इन सभी दलों के अलग-अलग लड़ने के कारण उसी प्रकार के प्रदर्शन का इस बार भी उम्मीद कर रही है। भाजपा अपने 2019 के लोकसभा चुनाव में थोड़ा सुधार करके आसानी से सरकार बनाने की और बढ़ सकती है। भाजपा ने 2021 में नंदीग्राम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव हराकर और राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन बढाकर इस बार सरकार बनाने की कगार पर खड़ी है।

















