ईरान ने अमेरिका को एक प्रस्ताव दिया है जिसमें कहा गया है कि अगर कुछ शर्तें मान ली जाएं तो होर्मुज का जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का बहुत बड़ा हिस्सा ले जाता है, इसलिए इसकी बंदी से तेल की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी भी जारी है। दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुए करीब दो महीने हो चुके हैं। पहले दौर की बातचीत नाकाम हो गई और दूसरे दौर की बातचीत अभी शुरू भी नहीं हुई है। इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद अमेरिका ने ईरान पर नाकेबंदी लगा दी थी, जिससे ईरान का निर्यात काफी कम हो गया है। ईरान इस स्थिति से निकलना चाहता है, लेकिन ट्रंप के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है।
ईरान की तीन शर्तें क्या हैं?
ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं:
नाकेबंदी हटाई जाए: होर्मुज के आसपास अमेरिका अपने युद्धपोत हटा ले और ईरान के जहाजों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की इजाजत दे।
पोर्ट पर नाकेबंदी खत्म: ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी पूरी तरह हटा दी जाए।
परमाणु वार्ता टाल दी जाए: अभी परमाणु कार्यक्रम पर बात न की जाए। पहले होर्मुज में स्थिति सामान्य होने दी जाए, उसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।
ईरान का कहना है कि इन शर्तों को मान लिया जाए तो होर्मुज को खोलने पर विचार किया जा सकता है। प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है।
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ट्रंप की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव पर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल के साथ बैठक की। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने कहा कि बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई, लेकिन अभी कोई नतीजा बताने से उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति खुद जल्द ही इस पर जानकारी देंगे।
ट्रंप अभी इन शर्तों को मानने को तैयार नहीं दिख रहे। एक दिन पहले उन्होंने धमकी दी थी कि अगर तीन दिन के अंदर ईरान समझौता करने को तैयार नहीं हुआ तो उसकी पाइपलाइनों को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ईरानी वार्ताकार समझौते को लेकर गंभीर तो हैं, लेकिन वे समय खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। इसकी बंदी से वैश्विक स्तर पर तेल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई हैं। ईरान कह रहा है कि वह स्थायी युद्धविराम चाहता है, लेकिन बिना अपनी शर्तों के आगे नहीं बढ़ेगा। दोनों तरफ से बातचीत के प्रयास जारी हैं, मगर अभी कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा।

















