गत दिनो आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा की जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का नया उपनेता नियुक्त किया था। इसके बाद से पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरियां बढ़ गई थीं, जो आज पार्टी में टूट के तौर पर सामने आई। आम आदमी पार्टी और उसके युवा चेहरे राघव चड्ढा के रास्ते अलग हो गए हैं।
राघव ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया है। उनके साथ पंजाब के सांसद अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और हरभजन सिंह के भी भाजपा में जाने की खबर आई है। राघव चड्ढा ने अपने आप को दरिया बताते हुए कहा था कि वह लौट कर आएंगे। आज वे न केवल लौट कर आए बल्कि आप की झाड़ू को बहा कर ले गए।
अपने आप को पद से हटाने पर राघव चड्ढा ने सीधे तौर पर पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इशारों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो तरह की तस्वीर सामने आ रही है। एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे सामान्य बदलाव बता रही है, वहीं दूसरी तरफ राघव चड्ढा के इशारे इसे आवाज दबाने की कार्रवाई के तौर पर पेश कर रहे हैं।
कुछ दिन पहले राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से चड्ढा को हटाकर उनकी जगह डॉ. अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया गया था। इस फैसले ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए थे। पार्टी ने नेतृत्व में बदलाव करने के बाद राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया था कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। इसके बाद से पार्टी और चड्ढा के बीच दूरियों की चर्चा शुरू हो गई थी। जो आज पार्टी में टूट के तौर पर सामने आ गई।
कौन हैं राघव चड्ढा
राघव चड्ढा अरविंद केजरीवाल के काफी नजदीकी माने जाते थे। आंदोलन के समय से दोनों साथ थे। चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से अपनी राजनीति शुरू की थी। 2015 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे 2019 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2020 में राजेंद्र नगर से दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
इसके बाद उन्हें आम आदमी पार्टी का पंजाब प्रभारी बनाया गया। 21 मार्च, 2022 को आम आदमी पार्टी की तरफ से उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य हैं। वे पूर्व दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष और दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से 2022 तक विधायक रह चुके हैं।
कैसे बिगड़ी थी बात
दरअसल केजरीवाल और राघव चड्ढा में दूरियां उसी दिन से नजर आने लगी थी जब केजरीवाल जेल में थे और राघव अपनी पत्नी परणीति के साथ लंदन में थे। राघव को लोकसभा चुनाव में भी पंजाब से दूर रखा गया। औपचारिक तौर पर वे श्री आनंदपुर साहब सीट पर नजर आए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे थे।
विपक्ष जहां इसे आप के अंदरूनी मतभेद का संकेत बता रहा था। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने इसे एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया करार दिया है, जिसका मकसद अन्य सांसदों को भी जिम्मेदारी देना है।
पार्टी की छवि पर असर
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह विवाद बढ़ता है, तो इसका असर पार्टी की छवि और आंतरिक संतुलन दोनों पर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय स्तर पर आप अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
पंजाब में पार्टी को करारा झटका
दिल्ली हाथ से छिनने के बाद पंजाब ही आम आदमी पार्टी का आशियाना रहा है, जो अब दरकता दिख रहा है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और चार साल के अपने कार्यकाल के दौरान नशे, खराब कानून व्यवस्था, कर्जा, विकास की कमी, गैंगस्टरवाद आदि समस्याएं झेल रही आम आदमी पार्टी की सरकार अब अपने आप को संभालने का प्रयास कर रही थी कि अब राघव चड्ढा रूपी दरिया में उसकी किश्ती भंवर में फंसी नजर आने लगी है।











