स्कूल निष्कासन, 3 डिग्री टॉर्चर और गुप्त पत्र: आपातकाल सेनानियों ने सुनाई वो दर्दनाक दास्तां, रोंगटे खड़े कर देगा ये सच
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स्कूल निष्कासन, 3 डिग्री टॉर्चर और गुप्त पत्र: आपातकाल सेनानियों ने सुनाई वो दर्दनाक दास्तां, रोंगटे खड़े कर देगा ये सच

केशव कुंज में आयोजित संगोष्ठी में लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल के दौरान झेली गई प्रताड़नाओं को याद किया। संगठन ने दिल्ली सरकार से इस काले अध्याय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Apr 24, 2026, 05:20 pm IST
in भारत, विश्लेषण, दिल्ली, संविधान
Loktantra Senani Sangh event on Emergency memories at Keshav Kunj Delhi

नई दिल्ली । विचार विनिमय न्यास के तत्वाधान में बुधवार को केशव कुंज में ‘आपातकाल का सच – आपातकाल सेनानियों के संस्मरण’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में लोकतंत्र सेनानी संघ के कार्यकर्ताओं ने अपने संस्मरण साझा किए।

आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों ने लोकतंत्र सेनानी संघ का गठन किया है।

गोष्ठी में सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार जी, अजय कुमार जी का सान्निध्य कार्यकर्ताओं को मिला।

आपातकाल के दौरान लोगों को तृतीय-श्रेणी (थर्ड डिग्री) की यातनाएं दी गईं, उनकी नौकरियां चली गईं, उन्हें पीटा गया और उन पर अत्याचार किए गए।

आपातकाल के दर्दनाक अनुभव

ओ. पी. बब्बर जी ने बताया कि वह 19 महीने बहुत कष्टकारी रूप से जेल में रहे, उन्होंने तीन पुस्तकें भी इस विषय पर लिखी हैं, जिसमें से दो प्रकाशित हो गई हैं।

राजकुमार सपरा जी के अनुसार, वह कुछ साथियों के साथ सिनेमा हॉल में सबसे पीछे बैठते थे, और फिल्म के समापन पर आपातकाल के खिलाफ पत्रक फेंक कर वहां से निकल जाते थे।

सुधीर मदन जी ने बताया कि वह दसवीं कक्षा में पढ़ते थे और उनके जिम्मे भी पत्रक बांटने का काम लगा था। इन गतिविधियों के कारण स्कूल से निष्कासित भी कर दिया गया था। इस कारण से आगे की पढ़ाई में बहुत दिक्कत आई, संघ के कार्यकर्ताओं की मदद से वह अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर पाए।

गुप्त गतिविधियों से चला विरोध अभियान

अशोक महाजन जी के अनुसार, उन्होंने पंजाब में रहकर कार्य किया, मोमबत्ती की रोशनी में साइक्लोस्टाइल मशीन पर पत्रक छापते थे, फिर उसको पंजाब के अन्य क्षेत्रों में लेकर जाते थे और वहां जाकर उनको बांटते।

जीतराम सोलंकी जी दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र में रहते थे, उनके परिवार में शादी थी, किंतु उनको पकड़ने पुलिस वहां पहुंच गई। वह पुलिस से बचने के लिए लगभग दो माह तक दूसरे गांव में रहे। जब पकड़े गए तो पुलिस ने उनको बहुत सारे गांवों में घुमाया और अन्य लोगों को डराया, जिससे आपातकाल के खिलाफ आवाज न उठा सकें।

संस्मरणों के दस्तावेजीकरण पर दिया गया जोर

नरेंद्र कुमार जी ने कहा कि सभी सेनानियों को अपने अनुभव, संस्मरण का संकलन, लिखकर या वीडियो रिकॉर्ड करके करना चाहिए। इससे ओरल हिस्ट्री की वैधता बढ़ती है। इसके साथ साथ संबंधित सामग्री या साक्ष्यों का संकलन भी जरूरी है, जिससे उनके संस्मरणों एवं गाथाओं का साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सके।

साक्ष्यों के लिए संकलन योग्य सामग्री, अनेक प्रकार की हो सकती है, जैसे संबंधित FIR की कॉपी, वारंट, जेल रजिस्टर की एंट्री, उस समय के समाचार पत्रों या किसी साप्ताहिक मासिक मैग्जीन की कटिंग, डायरी, सूचना पत्रक, फोटो, या कोई रिपोर्ट, नौकरी या स्कूल से निष्कासन का पत्र जिसमें इमरजेंसी में सहभाग, सजा का कारण बताया गया हो।

व्यक्तिगत के साथ ही समाज के सामूहिक प्रयासों का भी समग्रता से संकलन करना चाहिए। जिससे आने वाली पीढ़ी भी आपातकाल के संघर्ष से परिचित हो सके।

लोकतंत्र सेनानी संघ की आगामी योजनाएं

लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष राजन ढींगरा जी ने बताया कि दिल्ली में 277 सेनानियों की पूरी जानकारी के साथ सूची बन गई है, शेष की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को अखिल भारतीय कार्यक्रम होता है और 26 जून को प्रान्तशः बैठक/ कार्यक्रम होते हैं। शीघ्र ही एक पुस्तक भी प्रकाशित होने वाली है।

आपातकाल को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग

संगठन ने दिल्ली सरकार से आपातकाल से जुड़ी जानकारी को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने का आग्रह करने वाले हैं। जिसमें 5 जून को हस्ताक्षर के साथ दिल्ली सरकार को निवेदन करेंगे।

लोकतंत्र सेनानी संघ ने अपने कुछ प्रमुख कार्यकर्ताओं का इंटरव्यू यूट्यूब पर भी अपलोड किया है।

Topics: Emergency 1975Loktantra Senani SanghKeshav Kunj DelhiEmergency MemoriesIndian Democracy Histor
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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