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पश्चिम बंगाल में अधिक मतदान और तृणमूल के खिलाफ लहर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 152 सीटों पर 92% से अधिक रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। महिलाओं का 92.69% वोटिंग और सत्ता विरोधी लहर के संकेत। जानिए इस रिकॉर्ड टर्नआउट के मायने।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Apr 24, 2026, 02:30 pm IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल
मतदान के लिए कतार में मतदाता

मतदान के लिए कतार में मतदाता

पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को सलाम करना चाहिए कि उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में निकलकर धूप और गर्मी के बावजूद भी लोकतंत्र के इस सबसे बड़े महापर्व में हिस्सा लिया और लोकतंत्र को मजबूत किया। पश्चिम बंगाल से अत्यधिक मतदान का संदेश पूरे देश में जाएगा और अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी अधिक मतदान को प्रेरित करेगा। पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 सीटों पर रिकॉर्ड मतदान दर्ज़ किया गया। पहले चरण के 16 जिलों में 92% मतदान हुआ। यह मतदान अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा है।

पिछले चुनाव 2021 में पश्चिम बंगाल में कुल वोटिंग 82.30% मतदान दर्ज़ किया गया था। वर्ष 2011 में जब ममता बनर्जी पहली बार वाम दलों को हराकर चुनाव जीती थी तब केवल 84% मतदान हुआ था। दूसरे शब्दों में जब पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा बदलाव हुआ था तब भी मतदान प्रतिशत केवल 84% ही था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पश्चिम बंगाल में जब भी सत्ता परिवर्तन हुआ है तो अत्यधिक मतदान या रिकॉर्ड मतदान से ही हुआ है।

पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ा मतदान प्रतिशत

अगर पश्चिम बंगाल में 1977 से लेकर वर्तमान तक का मतदान प्रतिशत पर बात करें तो 1977 में 56%, 1982 में 76% , 1987 में 75%, 1991 में 82% में मतदान यह बताता है कि जब एक पार्टी सत्ता में आ जाती है तो मतदाता उतना भी अधिक मतदान नहीं करते है। 2011 में जब 84% वोटिंग हुई थी। 2011 में जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ था और लेफ्ट पार्टी की सरकार को हटाकर ममता बनर्जी सत्ता में आई थीं और इसका मतलब यह है कि उस समय अगर 84% वोटिंग हुई तो इतनी बड़ी तादाद में लोगों ने वोट डाला था परिवर्तन के लिए।

पश्चिम बंगाल में 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत 82% रहा और ममता बनर्जी की सरकार बनी रही। इस बार पश्चिम बंगाल के मतदाता वर्ग में ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार विगत विधानसभा चुनाव की तुलना में लगभग 10% मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। अब असल सवाल है कि क्या अधिक मतदान प्रतिशत  ममता बनर्जी प्रतिशत को सत्ता से हटाने के लिए हुआ है?  या ममता बनर्जी को सत्ता में बनाये रखने के लिए हुआ है?

रिकॉर्ड मतदान के मायने कई

पश्चिम बंगाल में इस रिकॉर्ड मतदान के कई मायने हो सकते हैं। पहला एसआईआर में लगभग 91 लाख लोगों के नाम हटाए गए है। इससे मतदाताओं की संख्या कम हुई है और मतदान प्रतिशत बढ़ गया है। यह सिर्फ आंकड़ों का खेल है क्योंकि पूर्व की तरह ही उतने ही लोगों ने मतदान किया है। अब कुल मतदाताओं की संख्या कम हो गई है। इस कारण प्रतिशत बदल गया है। दूसरा इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से 2% ज्यादा है। महिलाओं ने जबरदस्त तरीके से बाहर निकलकर मतदान किया है।

92 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने किया मतदान

महिलाओं का मतदान 92.69% रहा। वहीं पुरुषों का मतदान 90.92% रहा है। मतदान के इस दौर में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने महिलाओं को लेकर कई बड़े-बड़े वादे किए हैं। खासतौर पर भाजपा ने तो कई बड़े वादे किए हैं, जैसे महिलाओं को हर महीने ₹3000 रुपए का प्रावधान.राज्य की सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की घोषणा। जिससे कि महिलाओं में जबरदस्त उत्साह बढ़ गया है। इस बार संसद में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया और इसका विरोध कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस और इसके सहयोगी दलों ने किया है।

इस कारण भी महिलाओं में यह जागृति आ गई हो और इन्हीं पार्टियों का विरोध करते हुए महिलाओं ने इनके खिलाफ जाकर ज्यादा मतदान किया हो इसकी भी पूरी संभावना है। हालांकि, पिछली बार भी महिलाओं का पुरुषों के मुकाबले मतदान प्रतिशत ज्यादा था। लेकिन इस बार दिलचस्प यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के नाम ज्यादा कटे थे और उसके बाद भी उनका मतदान अधिक हुआ है। तीसरी बात हमारे देश का एक चुनावी ट्रेंड रहा है कि जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ता है तो मौजूदा सरकार बदल जाती है क्योंकि सत्ता विरोधी लहर यानी सरकार से नाराजगी की वजह से ही मतदाता बड़ी संख्या में बाहर निकलकर मतदान करते हैं। अतएव यह समझा जाता है कि अगर मतदान प्रतिशत ज्यादा हो रही है तो वह बदलाव के लिए है। ऐसा भी कहा जाता है कि ज्यादा वोटिंग होती है उस सरकार को बचाने के लिए अगर मतदाता को लगता है कि हमारी सरकार खतरे में है तो भी अधिक मतदान करते हैं। इस तरह की ऐसे अधिकांश स्थितियों में देखा जाता है कि जब वो बदलाव चाहते हैं तब ज्यादा वोटिंग होती है।

क्या अधिक मतदान टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए हुआ

क्या इस चुनाव में  92% का मतदान  ममता बनर्जी  की सरकार को  बदलने के लिए हुई है? क्योंकि ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से सत्ता में हैं और इस बार उन्हें सत्ता विरोधी लहर की वजह से बड़ा नुकसान हो सकता है। चौथी बात मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के अलावा जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे हिंदू बाहुल्य इलाकों में भी रिकॉर्ड वोटिंग हुई है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि हिंदू वोटर्स ने भी बाहर निकलकर इस बार जमकर वोटिंग की है और पश्चिम बंगाल में पूरी तरीके से ध्रुवीकरण हो चुका है और हिंदू वोट एक तरफ और मुसलमान वोट दूसरी तरफ। पांचवी बात यह कि इस बार चुनाव में लगभग ढाई लाख सुरक्षा बल के जवानों की तैनाती की गई थी अतएव  इस बार हिंसा कम हुई है और मतदाता  बिना डर के अपने घरों से बाहर निकलकर वोट डाल पाए हैं।

Topics: 92% Voter Turnout BengalWomen Voting Bengaltmcटीएमसीपश्चिम बंगाल चुनाव 2026West Bengal Elections 2026mamata banerjee vs bjpबंगाल 92% मतदानममता बनर्जी vs भाजपामहिलाओं का मतदान बंगाल
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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