कर्नाटक के बेंगलुरू स्थित एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में 2008 के बम धमाके के मास्टरमाइंड तदियंदाविदे नसीर को जेल से छुड़ाने के लिए रची गई साजिशों के मामले में एनआईए अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में सुनाए गए अहम फैसले में विशेष अदालत ने सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रत्येक पर 48,000 रुपए का जुर्माना भी ठोंका है। इन दोषियों के पास से जिंदा ग्रेनेड बरामद हुए थे।
क्या हुआ कोर्ट में
वर्ष 2008 में एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में धमाका करने वाले इस्लामिक अपराधी तदियंदाविदे नसीर को जेल से छुड़ाने के लिए साजिशें रची गई थीं। इसको लेकर जांचकर्ताओं ने कोर्ट में साबित किया है कि परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में बंद रहने के दौरान कुछ आरोपी नसीर के संपर्क में आए थे। इसी दौरान इन सभी ने मिलकर उसे जेल से बाहर निकालने की साजिश रची। इसके तहत ये तय किया गया है, पुलिस की टीम नसीर को जब भी अस्पताल य़ा कोर्ट ले जा रही होगी तो पुलिस के काफिले पर हमला किया जाएगा। ताकि उसे छुड़ाकर भागा जा सके।
कर रखी थी पूरी तैयारी
एनआईए के स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर प्रसन्ना कुमार ने कोर्ट में ये दलीलें दी। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि इन आरोपियों ने नसीर को पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाने के लिए भारी मात्रा विस्फोटकों के साथ ही ग्रेनेड, गोला-बारूद, पिस्टल औऱ वॉकी टॉकी जैसे कई हाई टेक उपकरण जमा कर रखे थे। इसमें इनकी साजिश में जेल में तैनात एक एएसआई भी शामिल था। मामले की सुनवाई के बाद ही कोर्ट ने सातों को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी।
कब हुआ साजिश का खुलासा
शायद यह मामला एक सामान्य घटना ही मानी जाती, लेकिन वर्ष 2023 में सेंट्रल क्राइम ब्रांच की टीम एक दूसरे मामले की जांच के दौरान परप्पना अग्रहारा जेल के अंदर बंद कैदियों की बातचीत को इंटरसेप्ट कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें इसकी भनक लग गई। इसी के बाद पुलिस ने जानकारियों के आधार पर आरटी नगर में एक घर में छापा मारकर बड़ी मात्रा में गोला बारूद और नक्शे बरामद किए थे। इसके बाद ही इस मामले की जांच को एनआईए को सौंप दिया गया था।

















