भुवनेश्वर: भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत ओडिशा के इंफो वैली, भुवनेश्वर में देश की पहली उन्नत 3डी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट की आधारशिला रखी गई। यह परियोजना भारत को उच्च स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन पैकेजिंग सॉल्यूशंस परियोजना, जिसे 3D ग्लास सॉल्यूशंस द्वारा विकसित किया जा रहा है, का शुभारंभ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में किया गया। इस परियोजना के माध्यम से ओडिशा विश्व की सबसे उन्नत चिप पैकेजिंग तकनीकों में से एक का केंद्र बनने जा रहा है, जिससे राज्य का भविष्य-उन्मुख तकनीकी हब के रूप में उदय और मजबूत होगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस परियोजना को राज्य और देश दोनों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार इस स्तर की उन्नत 3डी ग्लास सब्सट्रेट आधारित सेमीकंडक्टर पैकेजिंग सुविधा स्थापित की जा रही है, जो ओडिशा के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि Intel, Lockheed Martin और Applied Materials जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियां अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीकों से जुड़ी हैं, और उनका ओडिशा में बढ़ता रुचि दिखाना राज्य के औद्योगिक वातावरण पर बढ़ते वैश्विक विश्वास का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस इकाई में निर्मित उत्पाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और उन्नत डिजिटल प्रणालियों जैसे अगली पीढ़ी के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने दोहराया कि ओडिशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” विजन को साकार करने मंभ महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है। परियोजना के निवेश संबंधी विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसमें लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। संचालन शुरू होने के बाद यह इकाई प्रतिवर्ष करीब 70,000 ग्लास पैनल, 50 मिलियन असेंबल्ड यूनिट और लगभग 13,000 उन्नत 3डी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन (3DHI) मॉड्यूल का उत्पादन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ओडिशा देश का ऐसा अनूठा राज्य बन गया है, जहां एक साथ भारत की पहली कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और पहली 3डी ग्लास सब्सट्रेट पैकेजिंग सुविधा स्थापित की जा रही है।
आर्थिक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तेजी से विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र इंजीनियरिंग स्नातकों, डिप्लोमा धारकों और आईटीआई छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेगा। इससे ओडिशा की अर्थव्यवस्था संसाधन-आधारित मॉडल से तकनीक-आधारित विकास केंद्र में परिवर्तित होने की दिशा में आगे बढ़ेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर ओडिशा के लोगों को बधाई देते हुए राज्य सरकार के सक्रिय सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहा है और इस परिवर्तन में ओडिशा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा, जो पहले खनिज, धातु और ऊर्जा संसाधनों के लिए जाना जाता था, अब इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जैसे उन्नत क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने इस परियोजना को देश की सबसे उन्नत विनिर्माण पहलों में से एक बताते हुए कहा कि इससे भारत की सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में इस क्षेत्र का उत्पादन छह गुना बढ़ा है। उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है और 2025 में मोबाइल फोन का प्रमुख निर्यातक भी बनकर उभरा है।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत ओडिशा के लिए दो परियोजनाओं को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि तीन और प्रस्ताव विचाराधीन हैं। उन्होंने यह भी बताया कि Intel जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ भविष्य के निवेश को लेकर बातचीत जारी है, जो राज्य में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र के अलावा, केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा में रेलवे अवसंरचना के विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राज्य में ₹90,000 करोड़ से अधिक के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जो रेल संपर्क के बड़े विस्तार को दर्शाता है। ओडिशा को ₹10,928 करोड़ का रिकॉर्ड रेल बजट आवंटित किया गया है, जबकि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 59 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य के सभी 30 जिलों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रमुख परियोजनाओं में बालासोर से ब्रह्मपुर तक प्रस्तावित चार-लाइन तटीय रेल कॉरिडोर शामिल है, जिससे माल और यात्री परिवहन दोनों को बढ़ावा मिलेगा। वैष्णव ने जोर दिया कि ये अवसंरचना परियोजनाएं क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेंगी, आर्थिक विकास को गति देंगी और ओडिशा को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से और अधिक मजबूती से जोड़ेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे विकास में गति, सुरक्षा और यात्री सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री डॉ. मुकेश महालिंग ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ओडिशा तेजी से सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की आईटी, एआई, जीसीसी और सेमीकंडक्टर नीति 2025 निवेश आकर्षित करने और नवाचार को बढ़ावा देने में सहायक होगी। कौशल विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग छात्रों को स्टाइपेंड सहायता दी जा रही है, जिससे उद्योग के लिए तैयार कार्यबल तैयार किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि ब्लैकस्वान समिट 2026 जैसे कार्यक्रम और एआई में बढ़ते निवेश ओडिशा को भविष्य की तकनीकों में अग्रणी बनाएंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।
यह परियोजना 3D ग्लास सॉल्यूशंस इंक., अमेरिका द्वारा उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन पैकेजिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से खोरधा जिले के इंफो वैली में स्थापित की जा रही है। यह एक ग्रीनफील्ड, वर्टिकली इंटीग्रेटेड एडवांस्ड पैकेजिंग और एंबेडेड ग्लास सब्सट्रेट असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) सुविधा होगी। इस परियोजना की कुल लागत ₹1,943.53 करोड़ आंकी गई है, जिसमें केंद्र सरकार की ₹799 करोड़ की वित्तीय सहायता और राज्य सरकार की लगभग ₹399.5 करोड़ की अतिरिक्त सहायता शामिल है। यह इकाई डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, 5G और 6G संचार, ऑटोमोटिव रडार, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और फोटोनिक्स जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगी। इस इकाई में वाणिज्यिक उत्पादन अगस्त 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूर्ण पैमाने पर उत्पादन अगस्त 2030 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।











