अमेरिका को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बात करने का हमेशा मन होता है, वहाँ पर तमाम संस्थान हैं, जो लगातार भारत पर हमलावर रहते हैं कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है और भारत में पुस्तकों आदि का गला घोंटा जाता है। भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होते हैं आदि-आदि! परंतु अमेरिका में खुद क्या होता है, वह ऐसा देखने का साहस नहीं करता। वहाँ पर आए दिन हिंदुओं को लेकर दुष्प्रचार होता है, वहाँ पर आए दिन हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार होता है और हिंदुओं के मंदिरों पर झूठी रिपोर्ट्स भी आती हैं, मगर फिर भी वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ठेकेदार है।
हाल ही में ऐसी ही एक घटना हुई है, जो अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। जो यह बताती है कि हिंदुओं के साथ दरअसल अमेरिका में हो क्या रहा है? जो हिन्दू धर्म से जुड़ी पुस्तकों को भी सहन नहीं कर सकता है।
क्या है मामला?
अमेरिका में मैरीलैंड में यूएस पब्लिक लाइबरेरीज़ के एक समूह को अपना एक हिन्दी भाषा का आयोजन रद्द करना पड़ा। यह आयोजन रविवार 12 अप्रेल को जर्मनटाउन में आयोजित होने जा रहा था। इस आयोजन को हिन्दी की शक्ति का उत्सव मनाने के रूप में आयोजित किया जा रहा था। इस समारोह को “Many Languages, One Library: Celebrating Hindi,” शीर्षक के तले किया जा रहा था।
क्या था उद्देश्य:
इस आयोजन का उद्देश्य था कि लाइब्रेरी की पुस्तकों के संकलन में हिन्दी भाषा की 160 पुस्तकों को सम्मिलित किया जाए।
क्यों हुआ विवाद?
जब इस आयोजन का उद्देश्य हिन्दी भाषा की पुस्तकों को जोड़ना था तो फिर प्रश्न उठता है कि आखिर विवाद क्यों हुआ था और क्यों अभी तक मुख्य धारा की मीडिया में यह समाचार नदारद है। क्यों चार दिन बीतने के बाद भी यह समाचार कहीं भी किसी समाचार पोर्टल तक का हिस्सा नहीं बन सका है? क्यों लोग चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। क्यों ऐसा दिखाया जा रहा है कि जैसे कुछ हुआ ही न हो! मगर हुआ तो है, और जो हुआ है, वह न ही सहज है और न ही स्वाभाविक, क्योंकि यह एक विचार से घृणा की घटना है। दरअसल इस आयोजन में वालवीर हिन्दी स्कूल ने भी धन दिया था, जो विश्व हिन्दू परिषद ऑफ अमेरिका के साथ संबंद्ध है।
और केवल इसी कारण कई मजहबी और वामपंथी समूहों के साथ कट्टरपंथी समूह भी सामने आ गए, जिन्हें हिन्दुओं और हिन्दुत्व से घृणा है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC), हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स, सिख कोएलिशन और दलित सॉलिडेरिटी फोरम यूएसए आदि समूहों ने इस आयोजन का विरोध किया और यह इस आधार पर विरोध किया कि इससे हिन्दुत्व को बढ़ावा मिलेगा। वहीं वीएचपीए ने इस विरोध को “हिंदू-विरोधी समूहों” द्वारा चलाया गया एक “गलत सूचना अभियान” करार दिया। विश्व हिन्दू परिषद ऑफ अमेरिका, भारत के संगठन विश्व हिन्दू परिषद की ही एक शाखा है। और इसके अनुसार यह अमेरिका में सबसे बड़ा हिन्दू संगठन है।
वाशिंगटन, D.C. के ठीक बाहर स्थित मॉन्टगोमरी काउंटी, मैरीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका का ऐसा क्षेत्र है जहां पर विविधता सबसे जीवंत रूप में है। यहाँ पर भारतीय-अमेरिकी और व्यापक दक्षिण एशियाई-अमेरिकी आबादी बड़ी संख्या में और अपने तमाम रीति रिवाजों का पालन करते हुए रहती है। मॉन्टगोमरी काउंटी पब्लिक लाइब्रेरीज (MCPL) प्रणाली 22 शाखाओं के नेटवर्क के माध्यम से इस विविध और जीवंत समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। ऐसी ही एक शाखा है जर्मनटाउन लाइब्रेरी जो काउंटी के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है। इस प्रणाली में लोग पुस्तकें एकत्र करती है और लोग वहाँ से पढ़ने के लिए ले जाते हैं।
मगर यहाँ पर विविधता का सम्मान नहीं किया गया। और महज कुछ संगठनों के कारण इस आयोजन को निरस्त कर दिया गया, जबकि उन संगठनों की अपनी विश्वनीयता ही संदिग्ध है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल, जो केवल मुस्लिमों की बात करती है, वह विश्व हिन्दू परिषद ऑफ अमेरिका का विरोध कर सकती है? जबकि उसकी अपना संगठन मजहबी पहचान पर बना हुआ है और वह हमेशा ही भड़काऊ और एकतरफा संवाद और पोस्ट करता है।
हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स पर भी लगातार सवाल उठते हैं। यह हिंदुओं के नाम पर बना हुआ संगठन है, परंतु यह लगातार ही पश्चिमी देशों में लगातार बढ़ रहे हिंदूफोबिया को पहचानने से ही इनकार करता है। इसके साथ ही ऐसा बहुत कम हुआ है कि हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने बांग्लादेश या पाकिस्तान जैसे इस्लामी मुल्कों में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का विरोध किया हो।
उसका पूरा ध्यान भारत सरकार का विरोध या कहें मोदी सरकार का विरोध रहता है। यह बहुत ही हास्यास्पद है कि ऐसे संगठनों के विरोध के कारण एकतरफा निर्णय लेते हुए इस आयोजन को रद्द कर दिया गया है। इसका कोई खास कारण नहीं बताया गया। बस यही लिखा गया कि रविवार का हिन्दी भाषा का आयोजन नहेन हो रहा है। कम्यूनिटी की ओर से जताई गई चिंताओं के बाद, Montgomery County Public Libraries यह दोबारा से कल्पना कर रही है कि वह कैसे हिन्दी भाषी समुदाय का उत्सव मनाए और साथ ही समावेशी और कम्यूनिटी केंद्रित दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करें।










