नई दिल्ली । केंद्र सरकार संसद की आगामी तीन दिवसीय विशेष बैठक में बड़े संवैधानिक बदलावों की दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। इस दौरान सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर उन्हें पारित कराने की तैयारी में है। सांसदों को इन विधेयकों की प्रतियां भेज दी गई हैं, जिनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026, परिसीमन विधेयक-2026 और केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक-2026 शामिल हैं।
यह पहल संसद विशेष सत्र और संवैधानिक संशोधन 2026 के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
लोकसभा सीटों में बड़ा विस्तार, 543 से बढ़कर 830 तक प्रस्ताव
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 के तहत लोकसभा सीटों में बड़ा इजाफा करने का प्रस्ताव है। इसके अनुसार, राज्यों से अधिकतम 815 और केंद्रशासित प्रदेशों से 35 सीटें मिलाकर कुल 830 सीटें हो सकती हैं। इसके साथ ही जनसंख्या की परिभाषा में बदलाव का प्रावधान भी किया गया है, जिससे नई जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण संभव होगा।
बता दें कि यह कदम लोकसभा सीट वृद्धि और परिसीमन 2026 के संदर्भ में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
परिसीमन आयोग करेगा नई सीमाओं और सीटों का निर्धारण
परिसीमन विधेयक-2026 के तहत एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्वितरण करेगा। साथ ही निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाएं तय करने का मसौदा भी तैयार करेगा। इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश करेंगे, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। यह व्यवस्था परिसीमन आयोग गठन और निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण को मजबूत बनाएगी।
महिला आरक्षण को मिलेगा संवैधानिक आधार
इन विधेयकों के जरिए संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रावधान भी शामिल है। इससे महिला आरक्षण विधेयक और 33 प्रतिशत आरक्षण को व्यावहारिक रूप से लागू करने का रास्ता साफ होगा। यह कदम लंबे समय से लंबित महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
केंद्रशासित प्रदेशों में भी लागू होंगे नए नियम
बता दें कि केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक-2026 के माध्यम से दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में बदलाव किया जाएगा। इन संशोधनों का उद्देश्य इन क्षेत्रों को नए परिसीमन नियमों और महिला आरक्षण प्रावधानों के अनुरूप बनाना है। यह पहल केंद्र शासित प्रदेश संशोधन और दिल्ली जम्मू कश्मीर कानून बदलाव के रूप में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
देश की राजनीति पर पड़ेगा व्यापक प्रभाव
इन तीनों विधेयकों के पारित होने से देश की चुनावी और राजनीतिक संरचना में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और महिला भागीदारी में बड़ा सुधार होगा। अब सभी की नजरें संसद के विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां भारत राजनीतिक सुधार की दिशा में बड़ा फैसला लिया जा सकता है।











