मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर ही था। इस बात के सबूत एएसआई के सर्वे में मिल चुके हैं। लेकिन अब मुस्लिमों की तरफ से ओछी हरकतें किए जाने का मामला प्रकाश में आ रहा है। भोजशाला मामले में हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट ने गंभीर आरोप लगाया है कि भोजशाला ही बाग्देवी मंदिर है, इसके सबूतों को मिटाने के लिए पत्थरों को छेनी से काटा गया है और मूर्तियों पर प्लास्टर भी चढ़ाया गया है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सुनवाई जारी है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की तरफ से वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में दलीलें दीं हैं। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि भोजशाला मूल रूप से सरस्वती माता का मंदिर था। ASI सर्वे के हवाले से बताया कि वहाँ की मूर्तियाँ और दीवारें पारंपरिक हिंदू मंदिर शैली से मैच करती हैं।
मंदिर को छुपाने की कोशिश
सुनवाई में जैन ने आरोप लगाया कि मंदिर के पुराने प्रमाण मिटाए गए हैं। पत्थरों को छेनी से काटा गया, मूर्तियों पर प्लास्टर चढ़ाया गया, उनके आकार बदले गए। कुछ जगहों पर प्राकृतिक घिसाव का बहाना बनाकर असल आकार छुपाया गया। शिलालेख और मूर्तियाँ जानबूझकर क्षतिग्रस्त की गईं ताकि सबूत कमजोर हो जाएँ। उन्होंने कहा कि आक्रमणकारियों ने पहले भी मंदिर की शक्ल बदलने की कोशिश की थी। कोर्ट में इन बातों के सबूत पेश किए गए।
सुनवाई 6 अप्रैल से शुरू हुई और लगातार पाँच दिन चली। हिंदू पक्ष ने कहा कि सिर्फ नमाज पढ़ने से जगह मस्जिद नहीं बन जाती और यह वक्फ प्रॉपर्टी भी नहीं है। कोलोनियल समय में वहाँ दो हिंदू मूर्तियाँ (वाग्देवी और अंबा) मिली थीं, जो अब लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में हैं।
एएसआई की रिपोर्ट
ASI सर्वे रिपोर्ट में भी पुरानी मंदिर संरचनाओं के हिस्से इस्तेमाल होने की बात सामने आई थी। सुनवाई में हिंदू पक्ष इसी रिपोर्ट और अन्य ऐतिहासिक तथ्यों पर जोर दे रहा है। अभी तक मुस्लिम पक्ष की दलीलों का विस्तार से जिक्र नहीं आया। बेंच जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।

















