पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म होने को लेकर इस्लामी मुल्क ने बड़ा बयान दिया है। ईरान ने दो टूक कह दिया है कि अमेरिका बेतुकी मांगे कर रहा था, इसलिए ये वार्ता फेल हो गई है। ईरान परमाणु बम बनाने के मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बता रहा है। वहीं अमेरिका ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकना चाहता है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे चली, लेकिन दोनों तरफ से कोई समझौता नहीं हो पाया। ये 47 साल बाद अमेरिका और ईरान के बीच इस स्तर की पहली हाई-लेवल बातचीत थी। इसमें अमेरिकी टीम की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वांस के साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल थे। वहीं ईरानी टीम में संसद स्पीकर मोहम्मद ग़ालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची थे।
जेडी वांस ने क्या कहा
वांस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बातचीत के दो पहलू हैं – अच्छी खबर और बुरी खबर। अच्छी खबर ये कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बुरी खबर ये कि बिना किसी समझौते के वो पाकिस्तान से वापस जा रहे हैं। उनका कहना था कि अमेरिका ने ईरान को अपना फाइनल और बेस्ट ऑफर दे दिया है। अब फैसला ईरान को करना है कि वो मानता है या नहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की शर्तों को ईरान ने मानने से साफ इनकार कर दिया। खासतौर पर परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाना अमेरिका का मुख्य लक्ष्य था, लेकिन ईरान इसे मानने को तैयार नहीं है।
वांस का दावा ये भी था कि बातचीत के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से करीब छह बार बात की। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए हम ईरान को समझाना चाहते थे, लेकिन वो समझने को तैयार नहीं दिखा। ये नाकामी सिर्फ ईरान के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी बुरी खबर है।
क्या कहता है ईरान
ईरान की तरफ से अलग बयान आया। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ने टेलीग्राम पर लिखा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपने राष्ट्र के हितों और लोगों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ 21 घंटे तक बात की। हमारी टीम ने सकारात्मक रुख अपनाया, लेकिन अमेरिका ने बेवजह की मांगें रखीं, जो मानना नामुमकिन था। इन्हीं मांगों की वजह से बातचीत में रुकावट आई और कोई नतीजा नहीं निकला। ईरान ने कहा अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियारों का विकास बंद कर दे, लेकिन ईरान इसे स्वीकार नहीं कर रहा।

















