राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. केशव बालिराम हेडगेवार के पैतृक गांव कंदकुरथी में ‘श्री केशव स्मृति मंदिर’ का उद्घाटन होने जा रहा है। 11 अप्रैल को आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी इसका उद्घान करेंगे। यह मंदिर डॉ. हेडगेवार के जीवन, उनके विचार और उनके योगदान को याद रखने और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने के लिए बनाया गया है।
श्री केशव स्मृति मंदिर की विशेषताएं
मंदिर के भूतल पर डॉ. हेडगेवार की एक मूर्ति लगाई गई है। इसके साथ उनके जीवन के अलग-अलग दौर की तस्वीरों की एक अच्छी गैलरी भी बनाई गई है, जो उनकी राष्ट्र निर्माण की सोच को दिखाती है। पहली मंजिल पर भारत माता की मूर्ति स्थापित की गई है। इस फ्लोर पर एक वीडियो प्रेजेंटेशन हॉल है, जहां डॉ. हेडगेवार के जीवन और उनके विचार यात्रा की वीडियो दिखाई जाएगी। साथ ही एक संग्रहालय (संग्रहालय) भी है, जिसमें उनके इस्तेमाल किए गए निजी सामान, हाथ से लिखे पत्रों की कॉपी और उनके जीवन से जुड़ी दुर्लभ किताबें रखी गई हैं।
डॉ. हेडगेवार और भारत माता की दोनों मूर्तियों को मैसूर के प्रसिद्ध शिल्पकार अरुण योगीराज ने निर्मित किया है। इन्हीं शिल्पकार ने अयोध्या में रामलला की मूर्ति भी बनाई थी। यह मंदिर आरएसएस के स्वयंसेवकों और आम लोगों के लिए एक श्रद्धा केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
उद्घाटन के मौके पर डॉ. मोहन भागवत गांव के केशव मूर्ति, रुक्मिणी समेता विठ्ठलेश्वर और स्कंद मंदिरों का भी दौरा करेंगे। बहुत ज्यादा भीड़ को रोकने के लिए उद्घाटन में सिर्फ चुने हुए आमंत्रित लोगों और वरिष्ठ स्वयंसेवकों को ही आने की अनुमति दी गई है।
केशव सेवा समिति की गतिविधियां
इस मंदिर को संभालने वाली केशव सेवा समिति पिछले 30 साल से गांव में कई सामाजिक काम कर रही है। इनमें सबसे मुख्य है शिशु मंदिर स्कूल, जहां बच्चों को सस्ती फीस पर मूल्य आधारित शिक्षा दी जाती है। समिति ने महारानी अहिल्याबाई होलकर के नाम पर घाट भी बनवाए हैं और गोदावरी नदी पर हर रोज हरारती का आयोजन करती है। इसके अलावा गांव में तरह-तरह के सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं।
अभी मंदिर के साथ-साथ और विकास कार्य भी चल रहे हैं। इनमें एक नया स्कूल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, महिलाओं के लिए स्वरोजगार ट्रेनिंग, युवाओं के लिए स्किल प्रोग्राम, किसानों के लिए प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग और आने वाले लोगों के लिए ठहरने की जगह बनाने का काम शामिल है।
कंदकुरथी का इतिहास
कंदकुरथी गांव गोदावरी, मंजीरा और हरिद्रा नदियों के संगम पर बसा है। यह जगह ऐतिहासिक और पौराणिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यह गांव अब तेलंगाना के नजीमाबाद जिले में आता है। हैदराबाद से करीब 210 किलोमीटर और नागपुर से करीब 380 किलोमीटर दूर है। पहले इसे स्कंदपुरी कहा जाता था। मान्यता है कि यहां भगवान स्कंद (सुब्रह्मण्य) का अवतार हुआ था। बाद में नाम कंदकुरथी हो गया।
कहा जाता है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम ने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। छत्रपति शिवाजी महाराज भी कई बार यहां आए थे। गांव में डॉ. हेडगेवार के कुल देवता केशव मूर्ति का मंदिर है। हाल ही में यहां प्राचीन स्कंद मंदिर का भी पुनर्निर्माण किया गया है। अप्रैल 2025 में केशव सेवा समिति ने गांव में श्री विघ्नेश्वर मंदिर, श्री सुब्रमण्या स्वामी मंदिर, श्री रुक्मिणी समेता विठ्ठलेश्वर मंदिर और श्री केशव स्वामी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी।

















