'Religion' नहीं 'धर्म' कहिए : संविधान की व्याख्या पर नई बहस, सुप्रीम कोर्ट में उठी बड़ी मांग
September 24, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

‘Religion’ नहीं ‘धर्म’ कहिए : संविधान की व्याख्या पर नई बहस, सुप्रीम कोर्ट में उठी बड़ी मांग

सुप्रीम कोर्ट में संविधान के हिंदी और अंग्रेजी पाठ को लेकर नई बहस छिड़ी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अनुच्छेद 394A के तहत हिंदी पाठ को भी प्रामाणिक मानने की दी गई दलील।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Apr 9, 2026, 07:00 pm IST
inभारत, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सबरीमाला पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान बेहद महत्वपूर्ण बहस छिड़ गई है। धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान की व्याख्या को लेकर यह बहस छिड़ी है। मामले में यह तर्क दिया गया है कि संविधान का हिंदी पाठ केवल अनुवाद नहीं, बल्कि अंग्रेजी पाठ के समान ही प्रामाणिक और निर्णायक है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की ओर से दाखिल लिखित दलीलों में कहा गया है कि अनुच्छेद 394A के तहत हिंदी में प्रकाशित संविधान को आधिकारिक दर्जा प्राप्त है।

अनुच्छेद 394A : हिंदी पाठ को मिला वैधानिक अधिकार

दलीलों में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 1987 में किए गए संशोधन के बाद अनुच्छेद 394A जोड़ा गया, जिसके तहत हिंदी में प्रकाशित संविधान और उसके सभी संशोधन “सभी उद्देश्यों के लिए प्रामाणिक” माने जाते हैं। इसका सीधा अर्थ है कि भारतीय संविधान हिंदी पाठ न्यायिक प्रक्रिया में उतना ही प्रभावी है जितना अंग्रेजी पाठ।

‘Religious Denomination’ बनाम ‘संप्रदाय’ की बहस

मामले का एक प्रमुख पहलू अनुच्छेद 26 में प्रयुक्त “religious denomination” शब्द की व्याख्या है। दलीलों में कहा गया है कि हिंदी पाठ में इसके लिए “संप्रदाय” शब्द का उपयोग किया गया है, जिसका अर्थ पश्चिमी अवधारणा से कहीं अधिक व्यापक है। तर्क यह दिया गया कि संप्रदाय की परिभाषा केवल एक संगठित समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गुरु-शिष्य परंपरा, आस्था, विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान भी शामिल होती है।

स्वदेशी दृष्टिकोण से संविधान की व्याख्या पर जोर

सुप्रीम कोर्ट के हालिया संदर्भों का हवाला देते हुए कहा गया कि संविधान की व्याख्या भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए। इस दृष्टिकोण को स्वदेशी संवैधानिक व्याख्या के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो विदेशी कानूनी अवधारणाओं पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

‘Morality’ का अर्थ ‘सदाचार’ से जोड़ने की मांग

दलीलों में यह भी कहा गया कि अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त “morality” शब्द का सही अर्थ हिंदी में “सदाचार” है। यह केवल सैद्धांतिक नैतिकता नहीं, बल्कि समाज द्वारा स्वीकृत आचरण, परंपराएं और व्यवहार हैं। इस आधार पर संवैधानिक सदाचार की व्याख्या को भारतीय सामाजिक मूल्यों से जोड़ने की मांग की गई है।

‘Religion’ नहीं, व्यापक अर्थ में ‘धर्म’

दस्तावेज़ में यह भी स्पष्ट किया गया कि संविधान में प्रयुक्त “religion” शब्द का अर्थ भारतीय संदर्भ में “धर्म” है, जो जीवन के हर पहलू—आचरण, कर्तव्य, आध्यात्मिकता—को प्रभावित करता है। इससे धर्म की व्यापक परिभाषा को मान्यता देने की बात कही गई है, जो पश्चिमी सीमित अवधारणा से अलग है।

न्यायिक व्याख्या पर पड़ सकता है दूरगामी प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहस भविष्य में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। खासकर तब, जब अदालत को “संप्रदाय”, “धर्म” और “सदाचार” जैसे शब्दों की व्याख्या करनी होगी। इस पूरे विवाद से यह संकेत मिलता है कि अब संविधान की व्याख्या में भारतीय परंपरा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को अधिक महत्व दिया जा सकता है।

भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता देने की दिशा में कदम

अगर इस पूरे मामले का सार निकालें तो संविधान की व्याख्या केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे भारतीय सभ्यता, परंपरा और सामाजिक संरचना के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। संविधान हिंदी बनाम अंग्रेजी की यह बहस आने वाले समय में न्यायिक दृष्टिकोण को नई दिशा दे सकती है।

Topics: Supreme Court constitution debateArticle 394A Hindi constitutionreligious denomination meaning Indiaconstitutional interpretation IndiaHindi vs English constitutionlegal news India todayIndian judiciary news
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Supreme court judge oath

Sabarimala Case में नया मोड़! केंद्र ने 2018 फैसले पर उठाए सवाल

Load More

ताज़ा समाचार

Indian Economy development growth Engine

Explainer: भारत की अर्थव्यवस्था 10 साल में तीन गुना हो सकती है? कितना संभव है?

पंजाब में क्या ढूंढ रही है ED, क्यों उड़ी है AAP सरकार की नींद?

Enforcement Directorate

पंजाब में ईडी की बड़ी कार्रवाई: AAP मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार के घर रेड, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

MP Weather Today

उत्तर-पश्चिम में मानसून वापसी, बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात – 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नेतन्याहू vs ममदानी: युद्ध अपराधी कहने पर इजरायली पीएम का तीखा जवाब, कहा-‘मैं आपकी सच्चाई बताने UN आ रहा हूँ’

प्रतीकात्मक तस्वीर

UNFPA रिपोर्ट: गाजा में महिलाओं और लड़कियों के साथ यौन शोषण, जबरन निकाह बढ़े – फेमिनिस्ट क्यों मौन?

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में नदियों का स्वास्थ्य परीक्षण, रामगंगा इनीशिएटिव की शुरुआत

Supreme Court

मुस्लिम महिलाओं के साथ विरासत में भेदभाव क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जबाव

मई में चीन में शी नहीं आए थे स्वागत करने, अब अमेरिका में ट्रंप ने खुद बिछाए पलक-पावड़े

ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर डबल डेकर बस धू-धूकर जली, 9 की मौत; महिलाएं और बच्चे भी शामिल

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies