असम में जुलाई 2012 में हिंसा भड़क गई थी। असम के बोडोलैंड इलाके में रहने वाले बोडो और बंगाली मुसलमानों (जिन्हें वहां मिया कहा जाता है) के बीच बड़े पैमाने दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों लोगों की जाने गई। असम में 2012 में कोकराझार और धुबरी जिलों की बिगड़े हालात ने बांग्लादेश से मुसलमानों के बड़े पैमाने पर देश में अवैध घुसपैठ के समस्या को पूरे देश के सामने लाया था। अत्यधिक अवैध घुसपैठ के कारण राज्य के कई जिलों में मूल हिंदू आबादी अल्पसंख्यक बन चुकी है। कई तालुकों में तो मुश्किल से ही कोई मूल हिंदू बचा है। असम में हालात इतने खराब हो गए थे कि आम तौर पर चुप रहने वाले भारत के पूर्व चुनाव अधिकारी श्री हरिशंकर ब्रह्मा को भी अपनी आशंकाएं जनता के समक्ष लाना पड़ा था।
असम में मुसलमानों की घुसपैठ बढ़ी
बंगाली बोलने वाले मुसलमानों का निचले असम में अवैध आवागमन इतना अधिक है कि इस पर पर्दा डालना नामुमकिन है। 1901 के बाद से सभी जनगणना आकड़ों से यह साफ़ होता है कि अंग्रेजों ने जानबूझकर बंगाली मुसलमानों को खासकर पूर्वी बंगाल के मैमनसिंह जिले से ब्रह्मपुत्र घाटी के निचले असम जिलों में बसाना शुरू किया था। इसके कारण असम में मुसलमानों का हिस्सा 1901 में 15 परसेंट से बढ़कर 1951 में बढ़कर एक चौथाई लगभग 25 प्रतिशत हो गया था। असम में मुसलमानों की संख्या 1901 में 5 लाख से भी कम थी जो 1951 में बढ़कर लगभग 20 लाख हो गई। इस समय काल में असम में हिंदुओं की आबादी लगभग 29 लाख से बढ़कर 59 लाख हुई जो लगभग दोगुनी थी।
असम के मुसलमान 1901-1951 के दौरान अविभाजित भारत के अन्य हिस्सों की तरह ही बढ़े होते तो 1951 में असम में सिर्फ़ 8 लाख मुसलमान होने चाहिए थे। मगर यह संख्या लगभग ढाई गुनी हो गई थी। यह भी उल्लेखनीय है कि आने वाले मुसलमान असम के एक छोटे से इलाके में बस गए थे। 1951 में असम में 80 प्रतिशत मुसलमान उस समय के अविभाजित चार जिलों गोलपारा, कामरूप, दरांग और नागांव में थे। इन चार जिलों में मुसलमानों का अनुपात 1901 में 13 प्रतिशत से भी कम से बढ़कर 1951 में लगभग ढाई गुना लगभग 33 प्रतिशत हो गया।
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अलग देश बना फिर भी मुसलमान करते रहे घुसपैठ
मगर देश के विभाजन के बावजूद भी पूर्वी बंगाल से मुसलमानों का आना नहीं रुका। इस अवैध घुसपैठ के कारण असम में मुसलमानों की संख्या 1951 में लगभग 20 लाख से बढ़कर 2001 में चार गुना से अधिक 82 लाख गया। यह भी एक संयोग ही हैं की 1901 से 1951 के बीच भी असम में मुस्लिम आबादी चार गुनी हुई और 1951 से 2011 के बीच भी चार गुनी हो गई। यह सिर्फ अवैध घुसपैठ का ही नतीजा है।
जानकारों के अनुसार, असम के मुसलमान देश की औसत जनसंख्या वृद्धि दर से बढ़े होते तो 2001 में मुस्लिम जनसंख्या महज 56 लाख होता। अतएव 2001 में लगभग 24 लाख अधिक मुस्लिम थे जो अवैध घुसपैठिए ही थे। असम में मुस्लिम जनसंख्या एक ख़ास इलाके निचला असम जो बांग्लादेश की सीमा से सटा है, वहीं पर सबसे अधिक बढ़ रही है। निचले असम में मुसलमानों की आबादी बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया है।

















