पाकिस्तान मिडिल ईस्ट युद्ध में ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम किए जाने की क्रेडिट लेने की कोशिश पाकिस्तान कर रहा है। वो खुद को डिप्लोमेसी का बादशाह दिखाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अमेरिका ने उसकी घनघोर बेइज्जती कर दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि लेबनान इस समझौते में शामिल नहीं है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को ऐलान किया था कि ईरान और अमेरिका, अपने सहयोगियों के साथ, लेबनान समेत सभी जगहों पर तुरंत युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। यह फैसला उसी वक्त से लागू हो गया है। शरीफ ने इसे समझदारी का फैसला बताया और दोनों देशों के नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे इलाके में शांति कायम होगी।
शरीफ ने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने सूझबूझ दिखाई है। उन्होंने ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार को इस्लामाबाद बुलाया। वहां सभी विवाद सुलझाने के लिए बातचीत होगी, जिसे उन्होंने ‘इस्लामाबाद वार्ता’ नाम दिया। उनका कहना था कि इससे स्थायी शांति की राह निकलेगी और अच्छी खबरें आएंगी। लेकिन अमेरिका ने उसकी हेकड़ी निकाल दी।
जेडी वांस ने बताया गलतफहमी
लेकिन अमेरिका और इजराइल ने इस ऐलान को साफ तौर पर खारिज कर दिया। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा कि कोई गलतफहमी हो गई है। उन्होंने बताया कि ईरान शायद सोच रहा था कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह समझौता सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच है, जिसमें उनके सहयोगी जैसे इजरायल और अरब देश शामिल हैं, लेकिन लेबनान नहीं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ किया कि लेबनान को इस डील में नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि इजरायल की लेबनान में चल रही कार्रवाई अलग मुद्दा है और यह समझौते का हिस्सा नहीं है। ट्रंप ने कहा, “उन्हें शामिल नहीं किया गया है। सब ठीक है।”
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इजरायल-अमेरिका का एक ही सुर
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने अमेरिका के फैसले का स्वागत किया कि ईरान पर हमले रोके जाएं, लेकिन कहा कि दो हफ्ते का यह युद्धविराम लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर लागू नहीं होता। इजराइल ने लेबनान में हमले जारी रखे।
इन हमलों में लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कम से कम 89 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए। कुछ रिपोर्ट्स में मौतों की संख्या और भी ज्यादा बताई गई। ये हमले युद्धविराम के ऐलान के कुछ घंटों बाद हुए। पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका में रखा था। शरीफ ने दावा किया था कि उनका अनुरोध मान लिया गया और पूरे इलाके में, लेबनान सहित, शांति हो गई। लेकिन दोनों बड़े देशों ने साफ मना कर दिया कि लेबनान इस डील का हिस्सा नहीं है।

















