कल्पना कीजिए एक ऐसे गांव की, जो पहाड़ों और जंगलों के बीच बसा हुआ है। सड़कें टूटी-फूटी हैं और ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आप सोचिए कि वहां के लोगों का जीवन कैसा होता होगा। किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के बाद वे लोग क्या करते होंगे? यही संकट था नन्ही-सी बच्ची नमलेन ओरेया के सामने। वह खूंटी जिले के मुरहु प्रखंड स्थित तुम्बाकेल गांव की रहने वाली है। इसे न के बराबर दिखाई देता था। पढ़ाई-लिखाई की बात तो दूर, वह बच्ची अपने दोस्तों के साथ खेल भी नहीं पाती थी। नमलेन के पिता एक साधारण गरीब किसान हैं।
गरीबी बन रही थी बाधा
बच्ची के इलाज में उसके परिवार की गरीबी बाधा बन रही थी। कुछ समय पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक उसके गांव में पहुंचे, तो उन्हें उसकी बीमारी का पता चला। इसके बाद वे स्वयंसेवक नमलेन की मदद के लिए आगे आए। उसकी आंखों का ऑपरेशन कराया गया। अब वह पढ़ने के लिए विद्यालय जाने लगी है, दोस्तों के साथ खेलती भी है। यानी उसका जीनव बिल्कुल सामान्य हो गया है।
लगभग ऐसी व्यथा अश्विन बराह की भी थी। वह भी मोतियाबिंद से पीड़ित था। उसका परिवार पश्चिम सिंहभूम के चक्रधरपुर की इंदिरा कॉलोनी में रहता है। पिता मजदूरी करते हैं और इसलिए वह उसकी आंखों का इलाज नहीं करा पा रहे थे। संघ के स्वयंसेवकों के प्रयासों से 23 दिसंबर, 2025 को खूंटी स्थित अस्पताल में उसकी सर्जरी हुई। अब वह भी आसानी से दुनिया को देख पा रहा है।
सैकड़ों लोगों के जीवन में आया उजियारा
इन दिनों झारखंड में नमलेन ओरेया, अश्विन बाराह जैसे अनेक बच्चों के साथ ही सैकड़ों लोगों के जीवन पर छाया अंधेरा छंट रहा है और उजाला फैल रहा है। यह संभव हो रहा है संघ के स्वयंसेवकों द्वारा स्थापित ‘सर्वांगीण ग्राम विकास’ संस्था के कारण। संघ शताब्दी वर्ष पर यह संस्था विशाल सेवा अभियान ‘अंधकार से प्रकाश की ओर’ चला रही है। 2025 से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 1,770 लोगों के मोतियाबिंद का सफल इलाज हो चुका है। ‘सर्वांगीण ग्राम विकास’ संस्था के संस्थापक और वर्तमान अध्यक्ष पद्मभूषण कड़िया मुंडा कहते हैं, ”यह संस्था पिछले कई दशक से ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही है, लेकिन इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष ने इस सेवा को नई गति देने का काम किया। खूंटी से जुड़े स्वयंसेवकों ने सेवा भारती और ‘सर्वांगीण ग्राम विकास’ संस्था के माध्यम से 111 गांवों को मोतियाबिंद एवं अंधत्व—मुक्त बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। यह अभियान अक्तूबर, 2026 तक चलेगा।”
कई जिलों तक फैला अभियान
खूंटी जिले से शुरू हुआ यह अभियान रांची, गुमला, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला तक फैल चुका है। संस्था से जुड़े लोगों का मानना है कि यह सब ईश्वर की कृपा, दानदाताओं के सहयोग और स्वयंसेवकों के नि:स्वार्थ समर्पण की वजह से ही संभव हो पा रहा है।
बता दें कि ‘सर्वांगीण ग्राम विकास’ संस्था की स्थापना 1980 के दशक में हुई थी। उस समय झारखंड (तब बिहार का हिस्सा) के ग्रामीण इलाकों में नेत्र रोग एक महामारी के रूप में फैला हुआ था। तब संघ के स्वयंसेवक डॉ. नारायण दास ग्रोवर और उनके छोटे भाई डॉ. अर्जुन दास ग्रोवर ने अपनी प्रतिष्ठित जिंदगी छोड़कर सेवा का मार्ग चुना। डॉ. नारायण दास संगठन और उसके विस्तार के सूत्रधार बने, जबकि डॉ. अर्जुन दास देशभर के विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों को जोड़कर उच्चस्तरीय इलाज सुनिश्चित करते थे। उस सेवा कार्य को व्यवस्थित रूप देने के लिए ‘सर्वांगीण ग्राम विकास’ संस्था की स्थापना हुई थी। बाद में इस संस्था ने खूंटी और अन्य स्थानों पर अस्पताल और विद्यालय बनवाए। इनसे ग्रामीणों को बड़ी मदद मिलती है। खूंटी के अस्पताल में 90 प्रतिशत सेवाएं निःशुल्क हैं।
अब संघ शताब्दी वर्ष पर इस संस्था के कार्यकर्ताओं ने जो संकल्प लिया है, उसकी चारों ओर प्रशंसा हो रही है।
सेवा अभियान द्वारा मोतियाबिंद सर्जरी रिपोर्ट : 2025–26
वर्ष 2025
जनवरी : 139, फरवरी : 161, मार्च : 116, अप्रैल : 90, मई : 97, जून : 82, जुलाई : 85, अगस्त : 81, सितंबर : 104, अक्टूबर : 124, नवंबर : 122, दिसंबर : 117
वर्ष 2026
जनवरी : 137, फरवरी : 159, मार्च : 156
कुल सर्जरी : 1770
‘सर्वांगीण ग्राम विकास’ संस्था पिछले कई दशक से ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही है, लेकिन इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष ने इस सेवा को नई गति देने का काम किया। खूंटी से जुड़े स्वयंसेवकों ने सेवा भारती और ‘सर्वांगीण ग्राम विकास’ संस्था के माध्यम से 111 गांवों को मोतियाबिंद एवं अंधत्व—मुक्त बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
—कड़िया मुंडा, संस्थापक, ‘सर्वांगीण ग्राम विकास’
















