केरल और तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी के गठबंधन में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी और उसके अन्य सहयोगी दक्षिण के राज्यों में मुस्लिम मतों को अपने पाले में करने के लिए इसी दल का लम्बे समय से इस्तेमाल करती रही हैं। देश के अन्य राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय दलों के पदार्पण के कारण मुस्लिम मत कांग्रेस पार्टी के पाले से पूर्णतः छिटक कर अब इन दलों के पास है। मगर कांग्रेस पार्टी को आभास है कि दक्षिण के राज्यों में भी देश के अन्य हिस्सों की तरह मुस्लिम मतों को नहीं खोना है तो उसे इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की वैशाखी पर ही चलना पड़ेगा।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग भी कांग्रेस पार्टी से इसका कीमत वसूलने में पीछे नहीं रहती है और विगत दो लोकसभा चुनावों 2019 हुए 2024 में कांग्रेस पार्टी नीत गठबंधन में तमिलनाडु की रामनाथपुरम लोकसभा की सीट अपने लिए आवंटित करवा कर वहां से चुनाव जीत रही है। दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस पार्टी की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग पर निर्भरता इतनी बढ़ गई हैं कि वो इसके बगैर कोई भी राजनीतिक कदम लेने का नहीं सोच सकती है।
कांग्रेस पार्टी केरल में दो लोकसभा की सीट पोन्नानी और मल्लपुरम सदैव के लिए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के लिए आरक्षित कर दिया है। मलप्पुरम लोकसभा सीट पर प्रथम 1952 के लोकसभा के चुनाव से ही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सिर्फ 2004 को छोड़कर हर बार चुनाव जीत रही है। 1957 में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता बी पोकर निर्दलीय चुनाव जीते थे।
कांग्रेस करती रही है मुस्लिम लीग की मदद
कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दल विशेषकर तमिलनाडु और पुडुचेरी की द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को अपनी पहचान देकर मदद करते रहे हैं और इस पार्टी के राजनीतिक मकसद को गुपचुप आगे बढ़ाने में मदद करते रहे हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वर्तमान अध्यक्ष के. एम. कादर मोहिदीन 2004 में द्रमुक उम्मीदवार के तौर तमिलनाडु के वेल्लोर लोकसभा सीट से सांसद बन चुके हैं। 1989 लोकसभा चुनाव में जब स्वर्गीय राजीव गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष थे तब भी वेल्लोर लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता अब्दुल समद को वेल्लोर से अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनवाकर चुनाव जीतने में मदद किया था।
अब्दुल समद तमिलनाडु में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के अध्यक्ष थे। इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी द्वारा इनको अपने उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा सांसद बनने में मदद की गई थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता अब्दुल रहमान को वेल्लोर लोकसभा सीट से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार के तौर चुनाव जीतने में मदद की थी।
DMK-कांग्रेस का आत्मघाती कदम
मगर कांग्रेस पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का यह कदम अब उनके लिए खुद ही आत्मघाती हो रहा है और अब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इन दलों से कीमत वसूलना शुरू कर दिया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग रामनाथपुरम की लोकसभा की सीट विगत दो चुनावों से ले रही है। इन दलों को मजबूरी में अब रामनाथपुरम सीट रामनाथपुरम को देना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि रामनाथपुरम सीट के लिए कांग्रेस पार्टी और द्रमुक के पास मुस्लिम वर्ग का उम्मीदवार नहीं है मगर मजबूरी में इन दलों को ऐसा करना पड़ रहा है।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग केरल के साथ ही तमिलनाडु में भी कांग्रेस पार्टी और द्रमुक गठबंधन से विधानसभा में सीटों का आवंटन अपने मन मुताबिक करवा रही है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की दीर्घकालिक योजना इन दलों के सहारे केरल और तमिलनाडु में अपने जनाधार का विस्तार करके कुछ समय बाद अपने ताकत से खुद चुनाव लड़ना है। केरल में कांग्रेस पार्टी जिस प्रकार इंडियन यूनियन मुस्लिम के बगैर चुनावी मैदान में उतरने का सोच भी नहीं सकती है उसी प्रकार द्रमुक भी कुछ समय बाद ऐसा नहीं कर सकेगी।

















